हिन्द-युग्म पर आयोजित होने वाली यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता एक ग्लोबल प्रतियोगिता है, जिसमें दुनिया भर के हिन्दी-कवि और उनकी कविताओं के रसज्ञ भाग लेते हैं। जनवरी 2007 से यह हर महीने आयोजित हो रही है। आज हम इसके 43वें संस्करण के परिणाम लेकर उपस्थित हैं। 43वीं यूनिकवि प्रतियोगिता (जो कि जुलाई 2010 में आयोजित की गई थी) में कुल 46 कवियों ने भाग लिया।
निर्णय 2 चरणों में सम्पन्न हुआ। पहले चरण में 4 जज और दूसरे चरण में 2 जज शामिल थे। पहले चरण में सभी जजों को अपनी पसंद की 10 कविताओं को चुनने का कार्यभार सौंपा गया। पहले चरण के निर्णायकों ने अपनी पसंद की 10 कविताओं को 10 में से अंक भी दिये। इस प्रकार कुल 24 कविताएँ दूसरे चरण के निर्णय के लिए चुनी गयीं।
दूसरे चरण में 2 निर्णायक शामिल थे। इन दो निर्णायकों द्वारा 24 कविताओं को दिये गये अंकों और पहले चरण के जजों द्वारा दिये गये अंकों के औसत तथा पसंदों की संख्या के आधार पर शीर्ष 24 कविताओं के क्रम निर्धारित किये गये।
पहली बार हमें 43वें कवि के रूप में उत्तराखंड राज्य से यूनिकवि मिला है। पिछले 42 महीनों से ऐसा संयोग नहीं आया कि इस नये राज्य से हमें कोई यूनिकवि मिल सके, जबकि उत्तराखंड राज्य हिन्दी कवियो का गढ़ है।
यूनिकवि- अनिल कार्की

इनकी उम्र पच्चीस वर्ष है। उत्तराखण्ड के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ के मुवानी पीपलतड़ बरला से इन्होंने अपनी जीवन यात्रा आरंभ की, इनका परिवार पूरी तरह निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार है। दुनिया के यथार्थ में से जो इनकी दुनिया का छोटा सा यथार्थ था, इनका अपना जनपद और गाँव था, दुनिया के इस कोने में साहित्य के अपने माइने थे। वह इन्हें कभी विचारधारओं में जकड़े हुए नही मिले, ये सच्चाई हैं कि इन्होंने बहुत ज्यादा अध्ययन भी नही किया है। अब जाकर पिछले तीन सालों में मैने कुछ किताबों का अध्ययन अपने बड़े भाई रूपेश डिमरी जिन्होंने इन्हें किताबों की दुनिया से परिचय करवाया, किया उनमें - पाश, गोरख पाण्डे, नागार्जुन, मुक्तिवोध, त्रिलोचन, रघुवीर सहाय, शमशेर, मंगलेश डबराल, श्याम मनोहर जोशी, श्रीलाल शुक्ल, भीष्म सहानी, काशीनाथ सिंह, राजेन्द्र यादव, विष्णु सखाराम खांड़ेकर की ययाति, खुशवंत सिह, आदि थे। वर्तमान में पिथौरागढ़ से ही समकालीन कविता की पत्रिका का संपादन करते हुए कुमाँऊ विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर नैनीताल से डॉ. शिरीष कुमार मौर्य के निर्देशन में हिन्दी शोधकार्य कर रहे हैं। ये अपने मित्र पंकज भट्ट का भी धन्यवाद करना चाहेंगे, जिन्होंने इन्हें हिन्द-युग्म में कविता भेजने के लिए प्रेरित किया।
फोन संपर्क- 9456757646
पता- ग्राम,पोस्ट- भदेलवाड़ा ऐंचौली
जिला -पिथौरागढ़
पिन-252630
यूनिकविता- मौन अपेक्षित है
जिला पुस्तकालय पिथौरागढ़ में दीवार पर टंगी तख्ती ‘मौन अपेक्षित है’ और सामने टेबल पर बैठी हमउम्र लड़की को देखकर-
किताबें,
कुछ-कुछ शोर,
गूँजता है-
एक नई किस्म की कम्पनी है।
एक पौधशाला।
व्यवस्था के नए चाकर यहीं पैदा होते हैं अब,
पूछो- सब आई.ए.एस., पी.सी.एस.,
मास्टरों, प्रोफेसरों की लम्बी कतार,
यहीं से निकलेगी कल,
ये वही जगह है- जहाँ दीवार पर टंगी है एक तख्ती,
जिस पर लिखा है- मौन अपेक्षित है।
कभी-कभार समाजशास्त्र, इतिहास, भूगोल पढ़ते हुए-
हल्के से निकल आती है,
लचर व्यवस्था की बात।
फिर दूसरे ही पल सावधान हो जाते हैं यह कहकर सब-
क्या लेना व्यवस्था से हमें, ये करियर की लड़ाई है।
इन टेबलों पर बैठ चाय पी लेने
या व्याख्यान दे देने से नहीं बचने वाली,
कविता, कहानी की अस्मिता।
वो बेच दी जायेगी
अलग-अलग फ्लेवरों में तुम्हारे ही सामने।
खुद को हिजड़ा कहने में भी तालियाँ नहीं बजेंगी।
कभी-कभी प्रतियोगिता परीक्षा की,
मोटी किताब के बीच हँसता है-
एक चेहरा कुछ देर के लिए,
तो लगता है, चालीस करोड़ भूखे नंगों का देश भी
हँसेगा, मुस्कुरायेगा।
हमने सोचा था कि धरती बहुत बड़ी है।
उसकी परिधि पर मानवता का महायज्ञ होगा।
और हम धीरे-धीरे अन्दर की ओर सिमटेंगे।
किसी केन्द्र बिन्दु पर।
कौन सा केन्द्र बिन्दु?
प्रेमिका की नाभि पर आधुनिकता देखने का निर्णय हमारा है।
उसके अधखुले जिस्म को चाट लेने का ख्वाब हमने ही सजाया है।
नहीं इस तरह नहीं!
बस घिन से थूक देने से काम नहीं चलेगा!
ये देश अकेले हमारा या अकेले उनका नहीं है।
ये चालीस करोड़ भूखे-नंगों का देश है, लूले और लंगड़ों का भी।
ये रिक्शा, टम्पो, इक्का, तांगा, बैलगाड़ी का देश है।
और कहाँ धरे के धरे रह गये तुम्हारे पोलियो के टीके!
चोरो! पुराने माल को हाईब्रिड बनाकर बेच रहे हो!
इस तरह कैमेस्ट्री, फिजिक्स, गणित का ट्यूशन पढ़ा लेना-
बुद्धिजीवी बन जाना नहीं होता।
किसी बार में बैठकर बियर की चुस्कियों के साथ,
शोषितों की बात करना अच्छा लगता है।
किसी अखबार का सम्पादक बन जाना भी अच्छा है।
और सुनो! क्यों पढ़ रही हो ये सब?
इसलिए न कि! अब लड़के पढ़ी-लिखी पत्नियाँ माँगते हैं।
ये मोटी किताबें दूल्हे पाने के लिए नहीं,
दूल्हे बने सत्ता के खिलाफ़ हथियार हैं।
आधुनिकता के मायने, फिगर मेन्टेन कर-
पतली कमर लचकाते हुए रैम्प पर उतरना नहीं होता है।
ये सब के सब वहशी चीर-फाड़ डालेंगे तुम्हें!
और तुम कानून की दुहाई देते रहना,
इस तरह नहीं-
कमीना होकर भी लड़ना अच्छा तो है-
दूध का धुला कोई नहीं होता।
पर मौन बिल्कुल अपेक्षित नहीं है!
ये तख्ती जो पुस्तकालय में टंगी है-
जिसपे लिखा है ‘मौन अपेक्षित है’
ये तख्तियाँ कल तुम्हारे घरों पे होंगी,
ये तख्तियाँ कल हमारे गले में डाल देंगी सरकारें।
मौन अपेक्षित नहीं है।
बस आज समझ लेना होगा-
मौन को अपेक्षित मान लेना ही-
मुखर हो जाने का सवाल है।
सवाल छोटा है पर-
बहुत बड़ा है मौन होना,
इस मौन के खिलाफ।
पुरस्कार और सम्मान- विचार और संस्कृति की चर्चित पत्रिका
समयांतर की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता तथा हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र। प्रशस्ति-पत्र वार्षिक समारोह में प्रतिष्ठित साहित्यकारों की उपस्थिति मे प्रदान किया जायेगा। समयांतर में कविता प्रकाशित होने की सम्भावना।
इनके अतिरिक्त हम जिन अन्य 9 कवियों को समयांतर पत्रिका की वार्षिक सदस्यता देंगे तथा उनकी कविता यहाँ प्रकाशित की जायेगी उनके क्रमशः नाम हैं-
शेखर मल्लिक
योगेंद्र वर्मा व्योम
एम वर्मा
अपर्णा भटनागर
खन्ना मुजफ़्फ़रपुरी
स्वप्निल तिवारी आतिश
सुधीर गुप्ता 'चक्र'
मनोज वर्मा मनु
डिम्पल मलहोत्रा
हम शीर्ष 10 के अतिरिक्त भी बहुत सी उल्लेखनीय कविताओं का प्रकाशन करते हैं। इस बार हम निम्नलिखित 6 अन्य कवियों की कविताएँ भी एक-एक करके प्रकाशित करेंगे-
राजेश पंकज
दीपक कुमार
महेंद्र वर्मा
अनवर सुहैल
सुभाष राय
आलोक उपाध्याय 'नज़र'
उपर्युक्त सभी कवियों से अनुरोध है कि कृपया वे अपनी रचनाएँ 31 अगस्त 2010 तक अन्यत्र न तो प्रकाशित करें और न ही करवायें।
हम उन कवियों का भी धन्यवाद करना चाहेंगे, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाया। और यह गुजारिश भी करेंगे कि परिणामों को सकारात्मक लेते हुए प्रतियोगिता में बारम्बार भाग लें। शीर्ष 24 कवियों के नाम अलग रंग से लिखित है।
सुरेंद्र अग्निहोत्री
अनिता निहलानी
हरदीप राणा कुँअर जी
विवेक जैन
जोमयिर जिनी
ऋतु सरोहा 'आँच'
शामिख फ़राज
अश्विनी राय
मनसा आनंद मानस
लोकेश उपाध्याय
खान साब खान
सीमा सिंहल ’सदा’
सनी कुमार
हरप्रीत धंजल
अनिरुद्ध यादव
अशोक कुमार शर्मा
आलोक गौर
शील निगम
हरकीरत हकीर
उषा वर्मा
विभोर मिश्र खज़िल
आशीष पंत
अंजू गर्ग
विनय कृष्ण
संगीता सेठी
सुमिता केशवा
प्रदीप वर्मा
कमल किशोर सिंह
रश्मि सिंह
नरेंद्र कुमार तोमर
नोट- हम यूनिपाठक/यूनिपाठिका का सम्मान वार्षिक पाठक सम्मान के तौर पर सुरक्षित रख रहे हैं। वार्षिक सम्मानों की घोषणा दिसम्बर 2010 में की जायेगी और उसी महीने हिन्द-युग्म वार्षिकोत्सव 2010 में उन्हें सम्मानित किया जायेगा।