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Monday, August 10, 2009

ध्यान और योगः 21वीं सदी की हँसी


1. हँसी

कुछ लोगों के पास कुछ भी नहीं होता
पर उनकी हँसी इतनी निश्चल होती है कि
मुस्कुरा उठता है सारा जहाँ उनके साथ.
चलते-चलते हथेली थाम ले तो
बरस उठता है नेह
भीग जाता है शरीर का रोआं-रोआं
थोड़ी-सी धरती भीगती है
भीग जाता है थोड़ा सा आसमान
मिल जाता है सूरज को अर्ध्य
छलछला जाते है नदियों की आँखों से आँसू
हौसला बढ़ जाता है पहाड़ों का
थोड़ी सी नमी पा
ठंडक मिलती है तपते रेगिस्तान को
थोड़ा सा सीना चौड़ा हो जाता है
बूढ़े समंदर का।

2. ध्यान और योग

सबने रट ली गीता
सब बन गए कृष्ण
निर्लिप्त, साक्षी, ध्यान, योग
ये चारों शब्द खुश है.
सदियों बाद फिर फैशन में है
टी वी पर कर रही है मॉडलिंग
पत्रिकाओं में पाते हैं बीच का पन्ना
सोशलाइट हो कर
बन गए है पेज थ्री
सेंसेक्स कुलांचे भर रहा है
जरूरत सिर्फ बिकाऊ बनने की है
उन्नीसवी सदी में प्रेम बिका था
बीसवी में बिक गए रिश्ते
इक्कीसवी सदी में बिक रहा है
ध्यान और योग

यूनिकवि अखिलेश कुमार श्रीवास्तव

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15 कविताप्रेमियों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

इक्कीसवी सदी में बिक रहा है
ध्यान और योग

baba ramdev ji apne ghutnon ka ilaaj liverpool me karwa rahe hain ,pakki khabar hai ,maan bhi lijiye janaab

neelam का कहना है कि -

छलछला जाते है नदियों की आँखों से आँसू
हौसला बढ़ जाता है पहाड़ों का
थोड़ी सी नमी पा
ठंडक मिलती है तपते रेगिस्तान को
थोड़ा सा सीना चौड़ा हो जाता है
बूढ़े समंदर का।

bahot khoob ,kaash ki hmaare ird gird bhi aise hi log ho ...........ameen

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

इक्कीसवी सदी में बिक रहा है
ध्यान और योग,
एकदम सही कहा आपने..नित नित नये योगी पैदा होते जा रहे हैं.

Manju Gupta का कहना है कि -

दोनों बहुत अच्छी कविताएँ हैं .सदी का बहुत ही मजेदार प्रतीक प्रयोग किया है . बधाई .

Nirmla Kapila का कहना है कि -

दोनो कवितायें बहुत सुन्दर हैं अखिलेश जी को बहुत बहुत बधाई

Harihar का कहना है कि -

ये चारों शब्द खुश है.
सदियों बाद फिर फैशन में है
टी वी पर कर रही है मॉडलिंग
पत्रिकाओं में पाते हैं बीच का पन्ना
सोशलाइट हो कर
बन गए है पेज थ्री

सुन्दर कविता !

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

यूनिकवि की सटीक कविता....

sada का कहना है कि -

कुछ लोगों के पास कुछ भी नहीं होता
पर उनकी हँसी इतनी निश्चल होती है कि
मुस्कुरा उठता है सारा जहाँ उनके साथ

बहुत ही सुन्‍दर पंक्तियां मन को भा जाने वाली प्रस्‍तुति के लिये बधाई

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

आपमें संबावनाएँ हैं, लेकिन आप कविता को मुक्कमल बनाने से पहले भटक जाते हैं।

manu का कहना है कि -

sunder kahaa hai ji..

akhilesh का कहना है कि -

aap sabhi ko dhanyabaad.
sailesh ji ne mijhe sambhavnaao mein gine is ke liye saadhubaad.

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत सही.

बीसवी में बिक गए रिश्ते
इक्कीसवी सदी में बिक रहा है
ध्यान और योग

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है अखिलेश जी,बधाई नहीं बधाइयां हां एक शब्द को दोबारा टाइप करें सारे मजे को किरकरा कर रहा है
पर उनकी हँसी इतनी निश्चल होती है कि
निश्छ्ल होना चाहिये निश्चल के स्थान पर मेरे खयाल से क्योंकि . हँसी निश्चल न होकर निश्छल ही हो सकती है
श्याम सखा श्याम

akhilesh का कहना है कि -

wo sabd nischal hi hai shyam ji,
typing mistake hai.

gaurav का कहना है कि -

उन्नीसवी सदी में प्रेम बिका था
बीसवी में बिक गए रिश्ते
इक्कीसवी सदी में बिक रहा है
ध्यान और योग
maan gaye bhai, kitni achi baat khi he
is kavita k liye bahoot-bahoot dhanyawad

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