समयजयी दोहा रचे, सत्-शिव-सुन्दर मूल्य.
सत्-चित-आनंद दे 'सलिल', दोहानंद अमूल्य.
आपकी पंक्तियाँ आपको ही समर्पित हैं:
अद्भुत जी! आपका स्वागत...दोहा को जितना अधिक जानेंगे उतना अधिक जानने की इच्छा होगी. दोहा तथा अन्य छंद ध्वनि-विज्ञान के नियमों पर आधारित हैं. अक्षरों के उच्चारण के स्थान तथा उनके प्रभाव को छंद-दृष्टा ऋषियों ने आत्मसात करने के बाद ही छंद की रचना की. एक विशेषता यह है जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा तथा पढ़ा जाता है. इस कारण अन्तरिक्ष में अन्य ग्रहों पर संभावित सभ्यताओं से संकेत-संप्रेषण के लिए विश्व के वैज्ञानिकों सर्वाधिक उपयुक्त दो भाषाएँ संस्कृत और हिन्दी मानी हैं. अस्तु...
शन्नो जी! आपमें बहुत प्रतिभा है. सहज हास्य आपकी विशेषता है...हास्य लिखना सर्वाधिक कठिन है...आप शब्द-चयन तथा गति-यति के प्रति कुछ अधिक सजग हो सकें तो हम सबको आपसे बहुत मधुर और मनोरंजक रचनाएँ मिलेंगी.
जबसे करने मैं लगी, हिन्दयुग्म पे सैर
हर दिन नयी आस मिले, अपने लगते गैर.
'पे' के स्थान पर 'पर' तथा 'नयी आस' के स्थान पर 'नव आशा' करना चाहेंगी क्या?
घर बैठे करने चली, पूरे चारों धाम
यात्रा तो चलती रहे, पैर करें आराम.
तीसरे चरण को 'मन यात्रा करता रहे' करने से अर्थ या प्रभाव में आये परिवर्तन पर ध्यान दें. शिल्प सध रहा है...अ़ब भावों की विविधता आपकी दृष्टि में आ सकें तो शब्द को औजार की तरह काम में ला सकेंगी.
मन रक्खें अपना दुरुस्त, बनें काम में चुस्त
११ २ २ १ १ २ १ २ १, १२ २ १ २ २ १ = १४, ११
चाय-शाय पीते रहें , कक्षा में न हों सुस्त.
२ १ २ १ २ २ १ २, २ २ २ १ २ २ १ = १३, १२
मन दुरुस्त अपना रखें, बनें काम में चुस्त
चाय-शाय पीते रहें, हों न वर्ग में सुस्त.
आप सहमत होंगी कि कोई भी बदलाव ऐसा नहीं जो आप न कर सकें...आवश्यकता केवल थोडा सजग होने की है. दो व्यक्तियों के पास एक जैसे कपडे हों, उनमें से एक कपडे धोकर, प्रेस कर पहने और दूसरा बिना धोये पहन ले तो किसे अधिक अच्छा कहेंगी?
कक्षा में हूँ सुस्त तो, क्या कर लेंगी आप...?
टोपी पर कर टिप्पणी, छोडेंगी निज छाप....?
जो भी लिखिए युग्म पर, सुनिए 'मनु' की बात.
अंगरेजी तज मनस में, हिंदी रखिये तात.
टोपीवाला सुन रहा, गुपचुप सारी बात.
'क्या कर लोगी?, चुनौती, बढा शीश का ताप.
टोपीवाले बता दे, गिटपिट कर मत भाग.
धमकी क्यों दी है मुझे, क्या तेरा खटराग?
अंगरेजी में बोलते हैं हिंदी के बोल.
हाय! घोर अंधेर है, बोल रहे बिन तोल
बच्चे बहुत शरारती, सब हैं धींगामस्त.
गुरु जी छुट्टी पर गए, ध्वजवाहक है पस्त.
ध्वजवाहक है पस्त, सम्हाले कक्षा कैसे?
टोपी-टोपी खेल रहे, है इच्छा जैसे.
'अजित' कहे विनती सुनिए, सब मन के सच्चे.
गुरूजी दंड न देना, अच्छे हैं सब बच्चे.
कन्धों पर डाला हुआ, सारा बोझ सम्हाल.
पोंछ पसीना- सार भी, लाईं किया कमाल.
हम निखट्टूओं का भला, किया नहीं अंदाज़.
होती तो देती हटा, मैं टोपी का ताज.
भार लिया सबसे अधिक, सचमुच किया कमाल.
नमन आपको कर रही, कितना ह्रदय विशाल?
शैतानी से त्रस्त पर, नहीं दे रहीं दंड.
नतमस्तक मैं हो रही, कर सम्मान अखंड.
टोपी वाला हो गया, बहुत अधिक उद्दंड
गुरु जी जब आयें तभी, देंगें उसको दंड.
देंगें उसको दंड, रंग में भंग कर दिया
आया बहुत देर से सबको तंग कर दिया.
डरकर 'शन्नो' कहे, लगे जो भोला-भाला
उत्तर पूरे नहीं बताता टोपीवाला.
शन्नो जी की चुहल से, है कक्षा जीवंत.
याद आई कॉलेज की, कर अंतर का अंत
जन्मकुंडली-चित्र दें, लगता यह अनिवार्य
शिरोधार्य गुरु-आज्ञा, करुँ- कठिन कुछ कार्य.
धीरे-धीरे बढायें, दोहा कक्षा आप.
अन्य ज्ञान भी दीजिये, सके सभी में व्याप.
यह दोहा कक्षा आपकी, आपके लिए, आपके द्वारा संचालित है. आप अपनी रूचि की बात करें, बीच-बीच में सीखे हुए छंद प्रयोग करते रहें और गृह कार्य यथा समय करें. आपके चाहे अनुसार हम आगे बढ़ने की गति मंद कर रहे हैं.
अवनीश जी की कुछ द्विपदियों को दोहा ध्वजवाहिका अजित जी दोहा में ढाल रही हैं.
खुसरो और कबीर के दोहे आपने खोजे, सराहे और समझे...खुसरो और कबीर दोनों सूफी मत से हैं. सूफी मत में भक्त अपनी आत्मा को प्रेमिका तथा परमात्मा को प्रेमी मानकर भक्ति करता है. इस नाते दोनों संत कवियों में श्रृंगार के दोनों पक्षों मिलन-विरह को केंद्र में रखकर की गयी रचनाएँ हैं. यह श्रृंगार द्विअर्थी है...सामान्य जन इसे लौकिक मान सकते हैं, भक्त या विद्वान् अलौकिक...दोनों के साहित्य में एक और समानता है कि वे आम आदमी की भी समझ में आजाते हैं और बड़े-बड़े ज्ञानी भी उन्हें नहीं समझ पाते. दोनों में अंतर भी बहुत हैं. कबीर फक्कड़ मेहनतकश जुलाहे थे. खुसरो के नाम के पूर्व लगा विशेषण 'अमीर' ही उनके सामाजिक स्थान और आर्थिक हैसियत का पता देता है. खुसरो शिक्षित, बहुभाषी और दरबारी थे जबकि कबीर शिक्षा से वंचित होने पर भी भाषा के अद्भुत जानकार थे. डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने कबीर को भाषा का डिक्टेटर कहा है, आशय यह कि कबीर ने अनेक शब्दों को उनके प्रचलित अर्थ से भिन्न अर्थ में प्रयोग किया. खुसरो कि मुर्कियाँ और पहेलियाँ जन-जन का कंठ हार हैं तो कबीर की सखियाँ और बीजक जनगण के हृदय की धड़कन हैं. सामान्य बिम्बों और शब्दों को गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ में प्रयोग करने में दोनों का सानी नहीं. दोनों की रचनाओं को आमजन, सामान्य गायक तथा शास्त्रीय गायक अनेक रागों में गाते रहे हैं...यही दोहा सिद्ध होने का लक्षण है. जिस दोहे को कई तरीकों से गया जा सके, कोई शब्द अटकता-खटकता न लगे, वह शुद्ध दोहा है.
दोहा ध्वजवाहिका अजित जी के श्रम और लगन,.दोहा कक्षा नायिका शन्नो जी की जीवन्तता और मनु जी के दोहा-प्रेम को नमन.
अब बारी मनु जी की... मनु जी! यह पता लगायें कि क्या दोहा बहर में लिखा जा सकता है? यदि हाँ तो किस बहर में? एक ही बहर में या एक से
अधिक बहरों में? बहर के आधार पर रचे गए दोहे भी लाइए ताकि उनको समझा जा सके...
शन्नो जी! आप को यह जानकारी जुटानी है कि अंगरेजी की द्विपदियाँ (कप्लेट्स) दोहा से क्या साम्य या भिन्नता रखते हैं? कुछ उदहारण हों तो सोने में सुहागा...
इस बीच विलंब से सम्मिलित छात्र तेजी से पिछले पाठ पूरे करें ताकि साथ-साथ चल सकें. शेष फिर...
आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)
17 कविताप्रेमियों का कहना है :
इस कारण अन्तरिक्ष में अन्य ग्रहों पर संभावित सभ्यताओं से संकेत-संप्रेषण के लिए विश्व के वैज्ञानिकों सर्वाधिक उपयुक्त दो भाषाएँ संस्कृत और हिन्दी मानी हैं. अस्तु...
आचार्य ,,,,
इस जानकारी के लिए धन्यवाद ,,,,
पढ़कर न केवल आनद आया अपितु गर्व से सर ऊंचा हो गया,,,,,
सच में आज की सुबह इस जानकारी के साथ और भी suhani कर दी आपने,,,,,
झण्डा दोहा कक्षा का, अब है मनु के हाथ
शन्नो भी पीछे नहीं, देती पूरा साथ
देती पूरा साथ, मनाऊँ मैं तो छुट्टी
मनु गिनते अब बहर, द्विपद की शन्नो घुट्टी
बोले इनसे अजित, चलाओ अब तुम डण्डा
टोपी है अब शान, उठाओ तुम ही झण्डा।
एक पुराना चुटकुला याद आया,,,,,(संक्षिप्त में कहता हूँ)
आचार्य के प्रश्न .....
शन्नो जी......(!) cat की स्पेलिंग बताएं....?
(२)प्रथम विश्व युध्ध कब हुआ ...?
अजित जी....(१) एप्पल की स्पेलिंग बताएं....?
(२) और बताएं के उस प्रथम विश्वयुद्ध में कितने लोग मारे गए.....?
अब मनु की बारी है....(१) चेकोस्लोवाकिया की स्पेलिंग बताएं......?
(२) प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए लोगों के नाम बताएं..? (संभव हो तो पते
भी बताएं...?)
हा,,,हा,,,,,,,हा,,,,,हा,,,,,,,
अब आचार्य पहले मैं बहर को पढ़ सीख कर आऊँ,,,,,
फिर अलग अलग मात्र गणना नियमों को ध्यान में रख कर पोस्ट मार्टम करून,,,,,
गुरु जी,
जो भी कुछ आपने कहा उससे मैं सोलहों आना सहमत हूँ. दोहों की नदिया में जरा किनारे के पानी में ही तैरना सीखा है. अब आपका कहा मानकर और उस पर अमल करते हुए मैं अपने दोहों पर अधिक ध्यान देने की कोशिश करूँगीं. आप मुझे बस यूँ ही हमेशा सही मार्ग दिखाते रहें. और अपना आशीर्वाद बनाये रखें. मैं हमेशा ही आपकी बहुत आभारी हूँ और रहूंगी. दोबारा फिर कुछ और लेकर (जैसा आपने पूछा है couplets के बारे में) किसी समय फिर आती हूँ तब तक के लिए एक यह प्रयोग:
हिच्च, हिच्च करता फिरे, कर में बोतल भींच
आते होंगें गुरु जी, अब कानों को खींच
अब कानों को खींच, सजा में अब बहर लिखे
चहक रहीं अजित जी, झंडा लहराती दिखे
फरक पड़े न मनु को, अब बहर लिखेंगें कुच्छ
बेडा अपना गरक, अंग्रेजी में ही हिच्च.
दफ्तर के कामों का भार मुझे दोहा कक्षाओं से दूर कर देता है |
कोशिश है हर कक्षा में रहूँ ...
अपने लिखे दोहों को मैं खुद भी सुधार रहा हूँ |
अवनीश तिवारी
आचार्य जी,
आज मनु जी के कार्टून को देखा तो अचानक लगा कि अंधे के हाथ बटेर लग गयी....मतलब दोहे लिखने का मेरे लिये नया मसाला. तो जो दोहा आज भेजा था उसी का मसाला इस्तेमाल करके उसकी मात्रा को इधर-उधर करके अलग-अलग तरीके से और भी दोहो को रचा है. जायका लेकर बताइये कि कैसे हैं.
दोहा: १.
बोतल पकड़े हाथ में, रहा युग्म पर घूम
पैर न पड़ें जमीन पर, मचा रखी है धूम.
इसी से सोरठा:
रहा युग्म पर घूम, बोतल पकड़े हाथ में
मचा रखी है धूम, पैर न पड़ें जमीन पर.
दोहा २.
अरे ओ टोपी वाले, रख टोपी की लाज
बोतल पकड़े हाथ में, ना कर इतना नाज़.
इसी से सोरठा:
रख टोपी की लाज, अरे ओ टोपी वाले
ना कर इतना नाज़, बोतल पकड़े हाथ में.
इन सबके मिश्रण से कुंडलिनी:
अरे ओ टोपी वाले, रख टोपी की लाज
बोतल पकड़े हाथ में, ना कर इतना नाज़
ना कर इतना नाज़, सब रहे देख तमाशा
करे हैं तुमसे तो,'सलिल' जी कितनी आशा
शन्नो, अजित हंसें, कहें 'अरे मनु हट परे'
मनु घूर कर बोले, यह क्या है अरे-अरे.
सुबह वाली कुंडलिनी का नया प्रयोग:
हिच, हिच कक्षा में करे, कर में बोतल भींच
आते होंगें गुरु जी, अब कानों को खींच
अब कानों को खींच, सजा में अब बहर लिखें
फुदक रहीं अजित जी, पकड़े झंडा मनु दिखें
फिकर न है किसी को, शन्नो अब गयी भिंच
बेडा अपना गरक, अंग्रेजी करेगी हिच.
आचार्य जी प्रणाम,
आज मैंने दोहा से सम्बंधित काफी कार्य किया है. और आपको भेजा है उसे जांचने के लिये. और अब आपकी आज्ञानुसार कुछ अंग्रेजी के couplets के बारे में बताने आई हूँ. अपनी शिक्षाकाल के दौरान मैंने कभी भी अंग्रेजी में couplets नहीं लिखे थे ना ही कोई अंग्रेजी की poems. बस कुछ हिंदी की poems लिखी थीं फिर तमाम सारी बेकार समझ कर फेंक दी थीं और कुछ रख ली थीं. फिर यहाँ आने के बाद बस ऐसे ही कुछ अंग्रेजी में poems लिखीं. कभी भी उनकी गहराई में नहीं गयी. फिर भी आपकी इच्छानुसार आज कुछ जानकारी देती हूँ couplets के बारे में.
१. अंग्रेजी के couplets बहुत ही अकेलेपन का अहसास लिए होते हैं, minimalistic.
२. दोहों की तरह दो पंक्तिओं के होते हैं (single stanza) या दो से अधिक पंक्तिओं के भी (large stanza) वाले भी. मेरा मतलब है कि पंक्तिओं के समूह.
३. दोहों की तरह उनमे भी अपने बिचार, भावनाएं या सारगर्भित बातें कम शब्दों में कही जाती हैं.
४. उनमें भी लय होती है लेकिन हमेशा लय होना जरूरी नहीं होता.
५. लेकिन उनमें हिंदी के दोहों की तरह मात्राओं की झंझट नहीं होती.
५. इनके भी लिखने के कई तरीके होते हैं कुछ उदाहरण हैं जैसे कि:
छोटा 'short couplet' नाम है 'iambic'
एक उदाहरण देखिये यहाँ:
In to my empty head there come
a cotton beach, a dock wherefrom
बँटा 'split couplet' इसकी पहली पंक्ति का नाम 'iambic pentameter' है व छोटी पंक्ति का नाम होता है 'iambic meter'.
एक उदाहरण देखिये यहाँ:
The weighty seas are rowled from the deeps
In mighty heaps,
And from the rocks' foundations do arise
To kiss the skies.
'Heroic couplet' इसकी दोनों पंक्तियाँ 'iambic pentameter' में हैं.
एक उदाहरण देखिये यहाँ:
Wave after waves in hills each other crowds
As if the deep resolved to storm the clouds.
'Alexandrine heroic couplet' 'iambic hexameter' में है.
एक उदाहरण देखिये यहाँ:
And that black night, That blackness was sublime
I felt distributed through space and time
One foot upon a mountain top. One hand
under the pebbles of panting strand
One ear in Italy, one eye in Spain
In caves my blood, and in the stars, my brain.
बहुत समय पहले 1999 में जब लन्दन में Millennium Dome बना था तब उस पर मैंने एक poem लिखी थी उसमें की कुछ पंक्तियाँ यहाँ दे रही हूँ:
Like a giant spiky hat
Or, a crown for a king to wear
Looking over the crystal water
With all the glory and splendour.
Under the blue sky, hot Sun
Rain or raging thunder
We wait to unfold your secrets
O, worlds greatest wonder.
एक poem और written long ago:
All those happy
moments of wait.
All my hopes
crushed by fate.
Let me drown
all my sorrows, fears
And painful memories
in the sea of tears.
There won't be anything
more peaceful than to
Sleep in the blissful
hands of death.
मेरा अपना कहना है यहाँ:
कपलेट की गिटपिट में, बना सब कुछ कीमा
न लय का कोई बंधन, न मात्रा की सीमा.
हिंदी के दोहे मधुर, कपलेट की न जीत
कुछ ही कपलेट अच्छे, हिंदी सबकी मीत.
अब मनु जी के लिए इतना सुंदर कार्टून बनाने की ख़ुशी में अंग्रेजी में दो chinese दोहे:
Once there was a dragon
who was alone carrying a lantern.
एक और:
Happiness peace and lots of good wishes
Eat plenty of prawns and tasty fishes.
आज दोहा कक्षा की तरफ झाँकने की भी हिम्मत नहीं हो रही अपनी तो,,,,,
एक तो उस तामसिक कार्टून पे दोहे हो रहे हैं इस सात्विक कक्षा में,,,और मुझे शर्म आ रही है,,
दुसरे ये जो शन्नो जी ने इतना सारा काम किया है ,,,उसको अनुवाद करके कौन बताएगा,,,,?
और एक प्रार्थना आपसे है आचार्य,,,,,यदि संभव हो सके तो,,,
जो आपने अंतरीक्ष पर अन्य सभुताओं से संपर्क करने के लिए विश्व के वैज्ञानिकों द्वारा हिंदी को ही चुना है,,,इस पर अधिक से अधिक प्रकाश डाले ,,,और ज्यादा जानकारियाँ दें,,,ये जानकार कैसा लग रहा है बता नहीं सकता,,,,
मनु जी,
अब बोलती हूँ तो सब बोलेंगे कि बोलती है.......पर बोलना तो कुछ पड़ेगा ही....
तो ऐसा कुछ नहीं किया है मैंने कि आप को अन्तरिक्ष पर हम सबसे जान बचाकर जाने की जरूरत पड़ जाये. गुरु जी ने जो मुझसे कहा था वो मैंने किया. बस उनकी आज्ञा का पालन किया. अब वह पछता रहे हैं तो उनकी गलती. अब मैं क्या बोलूँ? अच्छा अब समझी कि आप बहर लिखने के होम वर्क से बचना चाहते हैं. तभी इतनी लम्बी उड़ान भरने की सोच रहे हैं. कदापि नहीं. अब झंडा आप के हाथ में है ओ.के. या फिर गुरु जी के डंडे की ताकत को देखिये. अपनी तो battery down हो रही है.
अन्तरिक्ष पर दोहा और पहेलियों की कक्षाएं नहीं होंगीं और न गानों की महफिलें ही. और उधर महफ़िल में तन्हा जी तनहा रह गये तो फिर? उनका दिल कौन बहलायेगा आपके जाने के बाद? अब कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी. पताका लीजिये हाथ में और फिर बस ऐसे ही अजित जी के साथ एक्सचेंज करते रहिये. अन्तरिक्ष पर जाने की कोई जरूरत नहीं है. आप बस अपना मन दोहा व पहेलियों की कक्षा में नित लगायें. राघव जी की मोटर साइकिल का फायदा मत उठाने की कोशिश करिये. वह तो इसी चक्कर में हैं कि कोई पीछे वाली सीट पर बैठने वाला यात्री मिल जाये.
शन्नो जी! शत-शत नमन, खूब बटाया हाथ.
ले आयीं कपलेट्स को, कर गर्वोन्नत माथ..
आंग्ल द्विपदि का ले सकें, सब मिलकर आनंद.
जान सकें, क्या खासियत?, कैसे हिन्दी छंद?
त्याग छंद को- रच रहे, कविता छंदविहीन.
हिन्दी से सम्पन्नता छीन, बनाते दीन..
भाषा हो यदि शुद्ध तो, कहते यह है क्लिष्ट.
शब्द न समुचित सीखते, भाव न होते इष्ट..
दोहा ने इतिहास को रचा, सुधारा-मोड़.
दूजा कोई न कर सका, कैसे लेगा होड़?
गति, यति, लय, रस, क्षिप्रता, बेधकता है खूब.
दोहा ने हर काल में, मोहा- देखो डूब..
हम सब चाहें, कीजिये, कपलेट्स का अनुवाद.
कृपया अब सुन लीजिये, रचनात्मक fariyad..
'सोनेट' भी ले आइये, कपलेटों के बाद.
कुंडलि से तुलना करें, पायें सबसे दाद..
नहीं 'जाल' पर आज तक, हो पाया यह काम.
'युग्म-मंच' पर जुड़ सके, एक नया आयाम..
आशा है कर सकेंगी, मुझ पर यह उपकार.
धन्यवाद का समर्पित, है अग्रिम उपहार..
प्रणाम गुरुदेव,
नतमस्तक हूँ मैं यहाँ, भाया मेरा काम
इतनी मैं पुलकित हुई, सुनकर अपना नाम
सुनकर अपना नाम, यह अब क्या है ठानी
खुद मार कुल्हाड़ी, करी कितनी नादानी
कहा आपका मान, अब सीखे शन्नो सबक
करती है सम्मान, रहे शिष्या नतमस्तक.
गुरु जी,
पहले और दूसरे चरण में कुछ सुधार किया है.
कपलेट की गिटपिट से, हो गया सब कीमा
न लय का कोई बंधन, न मात्रा की सीमा
आचार्य जी
आपने सही लिखा है कि हमारी सम्पन्नता उन्हें समझ नहीं आती। वे छंद शास्त्र को समझ नहीं सकते इसीलिए अपनी बातों को कप-प्लेट ( जैसा कि शन्नो जी ने बताया) में परोसकर देते हैं। ज्ञान में भारत जितना समृद्ध है उतने ही वे विपन्न हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा माया जाल फैलाया है कि लोगों को लगता है कि भारत में तो कुछ भी नहीं है। इसी सम्पन्नता को दिखाने के लिए हम छंद सीखना चाहते हैं। आपने नवगीत की लिंक भेजा, अच्छी साइट है। शन्नो जी बहुत मेहनत कर रही हैं, उन्हें बधाई।
tiffany and co
fitflop shoes
ed hardy clothing
abercrombie and fitch
chanel 2.55
coach factor youtlet
oakley sunglasses
ray ban sunglasses
converse all star
michael kors outlet online
herve leger
tods shoes
longchamp handbags
lacoste shirts
asics shoes
cheap oakleys
toms shoes
cheap ray ban sunglasses
adidas shoes
discount oakley sunglasses
ray ban sunglasses uk
cheap oakley sunglasses
louis vuitton handbags
coach outlet online
true religion jeans sale
rolex watches
air jordan 11
kobe 9
cheap jordans
thomas sabo uk
michael kors handbags
mcm bags
coach purses
lebron james shoes
ed hardy t-shirts
tiffany and co
fred perry polo shirts
swarovski crystal
kate spade factoryoutlet
cheap oakley sunglasses
yao0410
0729
gucci outlet
chiefs jersey
lebron james jersey
michael kors uk outlet
mulberry sale
christian louboutin shoes
prada shoes
saints jerseys
raiders jerseys
mulberry,mulberry handbags,mulberry outlet,mulberry bags,mulberry uk
tory burch shoes
hermes outlet store
miami dolphins jerseys
nike roshe run
broncos jerseys
the north face outlet
stephen curry jersey
los angeles lakers jerseys
supra sneakers
prom dresses
atlanta falcons jersey
jeremy maclin jersey,jamaal charles jersey,joe montana jersey,justin houston jersey,dontari poe jersey,eric berry jersey
swarovski outlet
air jordan shoes
chicago bulls jersey
supra footwear
the north face clearance
nike sneakers
air max 2015
arthur jones jersey,deonte thompson jersey,courtney upshaw jersey,timmy jernigan jersey,jeromy miles jersey,haloti ngata jersey,joe flacco jersey,steve smith sr jersey
chicago blackhawks jersey
michael wilhoite jersey,y.a. tittle 49ers jersey,justin smith jersey,nike 49ers jersey
nike mercurial
cheap jordans
nike air max
adidas stan smith men
pandora bracelet
michael kors outlet online
longchamp
michael kors outlet
louboutin shoes
http://www.uggoutlet.uk
timberland outlet
WONDERFUL Post.thanks for share..more wait..
Buyandsellhair.com
Information
आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)