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Saturday, April 18, 2009

दोहा गाथा सनातन : पाठ 13 बहुरूपी दोहा अमर


बहुरूपी दोहा अमर, सिन्धु बिंदु में लीन.
सागर गागर में भरे, बांचे कथा प्रवीण.

दोहा मात्रिक छंद है, तेईस विविध प्रकार.
तेरह-ग्यारह दोपदी, चरण समाहित चार.

विषम चरण के अंत में, 'सनर' सुशोभित खूब.
सम चरणान्त 'जतन' रहे, पाठक जाये डूब.

विषम चरण के आदि में, 'जगण' विवर्जित मीत.
दो शब्दों में मान्य है, यह दोहा की रीत.

छप्पय रोला सोरठा, कुंडलिनी चौपाइ.
उल्लाला हरिगीतिका, दोहा के कुनबाइ.

सुख-दुःख दो पद रात-दिन, चरण चतुर्युग चार.
तेरह-ग्यारह विषम-सम, दोहा विधि अनुसार.

द्रोह, मोह, आक्रोश या, योग, भोग, संयोग.
दोहा वह उपचार जो, हरता हर मन-रोग.


दोहा-यात्रा का अगला पड़ाव दोहा के २३ प्रकारों से परिचित होना का है। जो दोहा प्रेमी यात्रा के बीच में कहीं छूट गए वे फिर जुड़ सकते हैं। नए यात्रियों को पिछले पड़ावों की जानकारी ले लेना सुविधाजनक होगा। चलिए आने-जानेवालों के स्थान रखते हुए हम लगातार चलनेवालों को कुछ नया बताते रहें ताकि उनका रस-भंग न हो।

दोहा के २३ प्रकार लघु-गुरु मात्राओं के संयोजन पर निर्भर हैं। सम चरण में ११-११, विषम चरण में १३-१३ तथा दो पदों में २४-२४ मात्राओं के बंधन को मानते हुए २३ प्रकार के दोहे होना पिंगालाचार्यों की अद्‍भुत कल्पना शक्ति तथा गणितीय मेधा का जीवंत प्रमाण है. विश्व की किसी अन्य भाषा के पास ऐसी सम्पदा नहीं है।
छंद गगन के सूर्या दोहा की रचना के मानक समय-समय पर बदलते गए, भाषा का रूप, शब्द-भंडार, शब्द-ध्वनियाँ जुड़ते-घटते रहने के बाद भी दोहा प्रासंगिक रहा उसी तरह जैसे पाकशाला में पानी। दोहा की सरलता-तरलता ही उसकी प्राणशक्ति है. दोहा की संजीवनी पाकर अन्य छंद भी प्राणवंत हो जाते हैं। इसलिये दोहा का उपयोग अन्य छंदों के बीच में रस परिवर्तन, भाव परिवर्तन या प्रसंग परिवर्तन के लिए किया जाता रहा है। कबीर और तुलसी ने दोहा में शब्दों को उनके प्रचलित असमान्य अर्थों से हटकर भिन्नार्थों में सफलतापूर्वक प्रयोग किया है पर वह फिर कभी, अभी तो प्रकारों की बात करें। निम्न सारणी देखिये-
क्रमांक नाम गुरु लघु कुल कलाएं कुल मात्राएँ

- - २४ ० २४ ४८

- - २३ २ २५ ४८

१. भ्रामर २२ ४ २६ ४८

२. सुभ्रामर २१ ६ २७ ४८
३. शरभ २० ८ २८ ४८
४. श्येन १९ १० २९ ४८
५. मंडूक १८ १२ ३० ४८
६. मर्कट १७ १४ ३१ ४८
७. करभ १६ १६ ३२ ४८
८. नर १५ १८ ३३ ४८
९. हंस १४ २० ३४ ४८
१०. गयंद १३ २२ ३५ ४८
११. पयोधर १२ २४ ३६ ४८
१२. बल ११ २६ ३८ ४८
१३. पान १० २८ ३८ ४८
१४. त्रिकल ९ ३० ३९ ४८
१५. कच्छप ८ ३२ ४० ४८
१६. मच्छ ७ ३४ ४२ ४८
१७. शार्दूल ६ ३६ ४४ ४८
१८. अहिवर ५ ३८ ४३ ४८
१९. व्याल ४ ४० ४४ ४८
२०. विडाल ३ ४२ ४५ ४८
२१. श्वान २ ४४ ४६ ४८
२२. उदर १ ४६ ४७ ४८
२३. सर्प ० ४८ ४८ ४८

इस लम्बी सूची को देखकर घबराइये मत। यह देखिये कि आचार्यों ने कसी गणितज्ञ की तरन समस्त संभावनायें तलाश कर दोहे के २३ प्रकार बताये। दोहे के दो पदों में २४ गुरु होने पर लघु के लिए स्थान ही नहीं बचता। सम चरणों के अंत में लघु हुए बिना दोहा नहीं कहा जा सकता।
२३ गुरु होने पर हर पद में केवल एक लघु होगा जो सम चरण में रहेगा। तब विषम चरण में लघु मात्र न होने से दोहा कहना संभव न होगा। आप ने जो दोहे कहे हैं या जो दोहे आपको याद हैं वे इनमें से किस प्रकार के हैं, रूचि हो तो देख सकते हैं। क्या आप इन २३ प्रकारों के दोहे कह सकते हैं? कोशिश करें...कठिन लगे तो न करें...मन की मौज में दोहे कहते जाएँ...धीरे-धीरे अपने आप ही ये दोहे आपको माध्यम बनाकर बिना बताये, बिना पूछे आपकी कलम से उतर आयेंगे। क्या आप इन दोहों से मिलाना चाहते हैं? यदि हाँ तो झटपट दो-दो दोहे लिख लाइए और उनके प्रकार भी बताइये। हम चटपट सभी २३ प्रकार के दोहों से आपकी भेंट कराएँगे।
बिदा होने के पूर्व दोहा का एक और किस्सा सुन लीजिये।

साखी से सिख्खी हुआ...

कबीर ने दोहा को शिक्षा देने का अचूक अस्त्र बना लिया. शिक्षा सम्बन्धी दोहे साखी कहलाये. गुरु नानकदेव ने दोहे को अपने रंग में रंग कर माया में भरमाई दुनिया को मायापति से मिलाने का साधन बना दिया. साखी से सिख्खी हुए दोहे की छटा देखिये।

पहले मरण कुबूल कर, जीवन दी छंड आस.
हो सबनां दी रेनकां, आओ हमरे पास..
सोचै सोच न होवई, जे सोची लखवार.
चुप्पै चुप्प न होवई, जे लाई लिवतार..
इक दू जीभौ लख होहि, लाख होवहि लख वीस.
लखु लखु गेडा आखिअहि, एकु नामु जगदीस..


आप में से जो भी इन सिख्खियों को खडी बोली के दोहे में कहेगा उसे उपहार में दोहा मिलेगा। तब तक के लिए नमन...

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7 कविताप्रेमियों का कहना है :

रश्मि प्रभा का कहना है कि -

द्रोह, मोह, आक्रोश या, योग, भोग, संयोग.
दोहा वह उपचार जो, हरता हर मन-रोग.
.........
waah

shanno का कहना है कि -

आचार्य जी,
प्रणाम
आज मैंने लपक कर बहुत ही उत्सुकता से इस बार आपकी दोहो के रूपों की सूची देखी और सांस थम गयी कुछ देर के लिये. डर लगने लगा और असहाय समझने लगी अपने आप को.
दोहों में इतनी varieties! इस बार जरूर सबके दिमाग का कचूमर निकल जायेगा या फिर हम सब इधर-उधर ताकने लगेंगे. अपुन तो कुछ शब्दों का अर्थ ही नहीं समझ रहे हैं तो फिर इन सीखों को खड़ी बोली में कैसे लिख पाऊंगी. जैसे कि:
सवनं, रेनका, लखवार,लिवतार, जीभौ, लखु-लखु, गेडा और आखिआई.
इनका अर्थ जानना जरूरी है मेरे लिये. वर्ना मैं असमर्थ महसूस कर रही हूँ.

manu का कहना है कि -

शन्नो जी की ही तरह हमारी भी हालत हो गयीई है,,,
पहले इन्हें समझना ,,,,फिर खड़े बोली के शब्द ढूँढने दोनों ही काम मुश्किल हैं.....
नीलम जी कर सकती हैं,,,
उन्हें कई तरह की बोलियों में लिखते देखा है,,,इस मामले में उस्ताद हैं वे ,,,,,
पर उनसे शायद दोहा ना लिखा जाए,,,,!!!!!!!!!!
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SURINDER RATTI का कहना है कि -

संजीव जी, नमस्कार
धन्यवाद आपका आपने इतनी महत्वपूर्ण जानकारी दी दोहों के बारे में. ,
सुरिन्दर रत्ती

Dr. Smt. ajit gupta का कहना है कि -

achrya ji
i am in bhopal till 22nd. after reaching udaipur i will do homework.

pooja का कहना है कि -

आचार्य जी ,

दो दोहे लिख रही हूँ, दोहे के २३ प्रकार तो देख लिए किन्तु समझ नहीं आया कि इनका वर्गीकरण किस आधार पर किया गया है? इस लिए इन दोहों का प्रकार नहीं बता सकती... :(

१) दोहा सत्य के करीब है, छिपा ह्रदय में सत्य
मिथ्या जग संसार यह , अजब कराये नृत्य .
२) देख ता-थैया जग की, फिर भी समझ ना आई,
लालच की लौ ना बुझे, हो चाहे रुसवाई.

आपके दिये हुए दोहों को खड़ी बोली में लिखने की कोशिश की है.....

एक जीभ से लाख बनें , लाख से लाख बीस,
उन लाखों से उच्चारिये , एक नाम जगदीस.

सोचा सत्य नहीं होता , जो सोचो लाखों बार,
शान्ति नहीं देती चुप्पी, चाहे हो समाहार .
(समाहार - एकाग्रता )

तीसरे को अनुवादित नहीं कर पाई....
पूजा अनिल

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

दोहा के उक्त वर्णित प्रकारों में टंकण त्रुटि का संशोधन निम्न है-
१२. बल ११ - २६ - ३७ - ४८
१६. मच्छ ७ - ३४ - ४१ - ४८
१७. शार्दूल ६ - ३६ - ४२ - ४८

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