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जून माह की यूनिप्रतियोगिता मे भाग लें


इंटरनेट पर कविता के प्रोत्साहन की अपनी मासिक परंपरा को बरकरार रखते हुए हम जून 2011 के लिये यूनिकवि और यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिये सभी प्रतिभागियों से प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। प्रतियोगिता का यह चौवनवाँ आयोजन है।



जून 2011 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 जून 2011 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 जून 2011 से 30 जून 2011 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को हिन्द-युग्म द्वारा हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव में यूनिकवि सम्मान

2) यूनिपाठक को हिन्द-युग्म की ओर से पुस्तकें और प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को हिन्द-युग्म की ओर से गृह प्रकाशन की किसी एक पुस्तक की 1-1 प्रति

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

विशेष: हमारे जिन इच्छुक प्रतिभागियों ने अपनी प्रविष्टियाँ हिंद-युग्म के धूमिल सम्मान के लिये अभी तक नही भेजी हैं, उन्हे हम बता दें कि प्रतियोगिता मे भाग लेने की अंतिम तिथि 15 जून है। हमारे नये पाठक नियम और शर्तों के लिये प्रतियोगिता की विज्ञप्ति यहाँ पर देख सकते हैं।

मई 2011 की यूनिप्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित


हिन्द-युग्म मई 2011 की यूनिप्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। हिन्द-युग्म ने हाल ही में धूमिल सम्मान की विज्ञप्ति ज़ारी की है (अधिक जानकारी के लिए देखें)। धूमिल सम्मान भी प्रत्येक वर्ष दिये जाने की योजना है। यदि आप इस सम्मान के लिए अपनी प्रविष्टियाँ भेजना चाहते हैं तो पहले किसी भी माह की यूनिकवि प्रतियोगिता के शीर्ष 10 कवियों में स्थान बनाना होगा। इसलिए यूनिकवि सम्मान में भाग लेने से ना चूकें।


मई 2011 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 मई 2011 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 मई 2011 से 31 मई 2011 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को हिन्द-युग्म द्वारा हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव में यूनिकवि सम्मान

2) यूनिपाठक को हिन्द-युग्म की ओर से पुस्तकें और प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को हिन्द-युग्म की ओर से गृह प्रकाशन की किसी एक पुस्तक की 1-1 प्रति

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

प्रथम हिन्द-युग्म धूमिल सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित


सुदाम पांडेय 'धूमिल'
धूमिल का जन्म वाराणसी के पास खेवली गांव में हुआ था| उनका मूल नाम सुदामा पांडेय था| धूमिल नाम से वे जीवन भर कवितायें लिखते रहे| सन् १९५८ मे आई टी आई (वाराणसी) से वेदयत डिप्लोमा लेकर वे वहीं विदयुत अनुदेशक बन गये| ३८ वर्ष की अल्पायु मे ही ब्रेन ट्यूमर से उनकी मृत्यु हो गई|
सन १९६० के बाद की हिंदी कविता में जिस मोहभंग की शुरूआत हुई थी, धूमिल उसकी अभिव्यक्ति करने वाले अंत्यत प्रभावशाली कवि है| उनकी कविता में परंपरा, सभ्यता, सुरुचि, शालीनता और भद्रता का विरोध है, क्योंकि इन सबकी आड् मे जो ह्र्दय पलता है, उसे धूमिल पहचानते हैं| कवि धूमिल यह भी जानते हैं कि व्यवस्था अपनी रक्षा के लिये इन सबका उपयोग करती है, इसलिये वे इन सबका विरोध करते हैं| इस विरोध के कारण उनकी कविता में एक प्रकार की आक्रामकता मिलती है| किंतु उससे उनकी उनकी कविता की प्रभावशीलता बढती है| धूमिल अकविता आन्दोलन के प्रमुक कवियों में से एक हैं| धूमिल अपनी कविता के माध्यम से एक ऐसी काव्य भाषा विकसित करते है जो नई कविता के दौर की काव्य- भाषा की रुमानियत, अतिशय कल्पनाशीलता और जटिल बिंबधर्मिता से मुक्त है। उनकी भाषा काव्य-सत्य को जीवन सत्य के अधिकाधिक निकट लाती है।
धूमिल के तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हैं – संसद से सड़क तक, कल सुनना मुझे और सुदामा पांडे का प्रजातंत्र। उन्हें मरणोपरांत १९७९ में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हिन्द-युग्म की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता ने फरवरी 2011 में 50 महीने पूरे कर लिए हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का 50 बार से अबाध गति से चलना एक बड़ी उपलब्धि है, और हमने इस उपलब्धि को खास तरह से मनाने का निश्चय किया है। हिन्द-युग्म की इस प्रतियोगिता में लगभग हर आयु-वर्ग के हज़ारों कवियों और पाठकों ने भाग लिया है।

प्रतियोगिता के आयोजन के बिलकुल शुरूआत में इसका एकमात्र उद्देश्य कम्प्यूटर और इंटरनेट पर यूनिकोड (हिन्दी) के प्रयोग को प्रोत्साहित करना था। धीरे-धीरे जब इससे गंभीर और समकालीन लोग जुड़ने लगे, तो इसका रंग-रूप एक स्तरीय कविता प्रतियोगिता का हो गया। पिछले वर्ष से हिन्द-युग्म ने अपने यूनिकवियों को सामूहिक समारोह में सम्मानित करना शुरू किया, इससे इसकी गरिमा और भी अधिक मुखरित हुई।

निःसंदेह अब यह तो कहा ही जा सकता है कि यूनिकवि प्रतियोगिता ने बहुत से सम्भावनाशील कवियों की पहचान की और उनके लेखनकर्म को अपने सामर्थ्यानुसार प्रोत्साहित किया। लेकिन अपनी यूनियात्रा के 50वें पायदान पर आवश्यकता थोड़ा ठहरकर यह विचारने की है, कि हमने जिन रचनकारों में कभी सम्भावनाएँ देखी, वे अब कैसा लिख रहे हैं। हिन्दी-कविता में उनके समग्र योगदान को कितना आँका जा सकता है। मतलब यह समय पुनर्समीक्षा का है।

अतः 50वीं यूनिप्रतियोगिता को हम विशेष तरीके से मना रहे हैं। इसके माध्यम से हम कविता का एक नया सम्मान शुरू कर रहे हैं, जिसे हमने हिन्द-युग्म धूमिल सम्मान नाम दिया है।

इस प्रतियोगिता में कौन भाग ले सकेगा-

1) यूनिप्रतियोगिता के पहले से 49वें अंक तक वे शीर्ष 10 में चुने गये कवि। मतलब जिन कवियों की कविताओं को पहली से 49वीं युनिप्रतियोगिता के शीर्ष 10 कविताओं में कम से कम एक बार स्थान मिला हो।

शर्तेः-

1) प्रत्येक प्रतिभागी को अपनी श्रेष्ठतम 10 कविताएँ ईमेल करनी होगी। कोई कवि 10 से कम कविताएँ तो भेज सकता है, लेकिन 10 से अधिक कविताएँ नहीं भेज सकेगा। कवि स्वयं तय करे कि अब तक उसने कितनी अच्छी कविताएँ लिखी हैं।
2) कविता का अप्रकाशित होना अनिवार्य नहीं है।
3) कवि को अपनी कविताएँ ईमेल से ही भेजनी होगी। अपनी कविताएँ unikavita@hindyugm.com पर भेजें।
4) कविताएँ भेजने की अंतिम तिथि 30 जून 2011 है।
5) कविताओं के साथ अपना संक्षिप्त परिचय, चित्र, पता और फोन नं. इत्यादि भी भेजें।

चयन की विधिः

हमारे आकलन के अनुसार लगभग 200 कवियों द्वारा हमें 2000 कविताएँ प्राप्त होंगी। इन कविताओं का प्राथमिक आकलन हमारे निर्णायकों द्वारा किया जायेगा।

अंतिम चरण के निर्णायकों में कम से कम 200 कविताओं को देश के ख्यातिलब्ध कवियों/आलोचकों को शामिल किया जायेगा। अंतिम चरण के निर्णायकों के नाम जल्द ही तय कर लिये जायेंगे।

सम्मानः

1) किसी एक कवि को सर्वसम्मति से धूमिल सम्मान दिया जायेगा।

2) सम्मान स्वरूप प्रशस्ति-पत्र, सम्मान-प्रतीक और रु 11,000 की नगद राशि प्रदान की जायेगी।

3) इस सम्मानित होने वाले कवि के पास यदि एक कविता संग्रह के बराबर की स्तरीय कविताएँ होंगी तो उसका संकलन भी हिन्द-युग्म प्रकाशन से प्रकाशित होगा। यदि एक कवि की बजाय एक से अधिक कवियों की कविताओं में हमें अधिक स्तरीयता दिखती हैं तो एक सामूहिक कविता संकलन का प्रकाशन हिन्द-युग्म करेगा।

4) यह सम्मान अगस्त-सितम्बर 2011 में एक समारोह आयोजित करके प्रदान किया जायेगा। समारोह लखनऊ में आयोजित करने की योजना है।


अपीलः

सम्मान की राशि हिन्द-युग्म आपसी सहयोग से एकत्रित कर रहा है। यदि आप इस सम्मान को ज़ारी रखने में यकीन करते हैं तो कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें। अधिक जानकारी के लिए hindyugm@gmail.com या 9873734046 पर संपर्क करें।

महत्त्वपूर्णः

जो कवि अभी तक हिन्द-युग्म की यूनिकवि प्रतियोगिता में शीर्ष 10 में नहीं आ सके हैं, वे कृपया इसमें भाग लेते रहें, यदि वे शीर्ष 10 में स्थान बनाने में सफल हो पाते हैं तो अगले हिन्द-युग्म धूमिल सम्मान में भाग लेने के योग्य होंगे।

नोटः-
पहले यह सम्मान पाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र' के नाम से आयोजित करने की सूचना प्रकाशित की गई थी, लेकिन कविता के लिए यह पुरस्कार एक कहानीकार (कुछ छिटपुट कविताएँ भी लिखीं) के नाम पर दिया जाना ज्यादा श्रेयस्कर नहीं है। इसलिए हमलोगों ने उस सूचना को तुरंत प्रभाव से हटा लिया। ऐसे प्रतिभागी जिनके पास पुरानी सूचना है, उसे कृपया इस विज्ञप्ति से अपडेट कर लें।

धूमिल मात्र अनुभूति के नहीं, विचार के भी कवि हैं। उनके यहाँ अनुभूतिपरकता और विचारशीलता, इतिहास और समझ, एक-दूसरे से घुले-मिले हैं और उनकी कविता केवल भावात्मक स्तर पर नहीं बल्कि बौद्धिक स्तर पर भी सक्रिय होती है।

धूमिल ऐसे युवा कवि हैं जो उत्तरदायी ढंग से अपनी भाषा और फॉर्म को संयोजित करते हैं।

धूमिल की दायित्व भावना का एक और पक्ष उनका स्त्री की भयावह लेकिन समकालीन रूढ़ि से मुक्त रहना है। मसलन, स्त्री को लेकर लिखी गई उनकी कविता उस औरत की बगल में लेट कर में किसी तरह का आत्मप्रदर्शन, जो इस ढंग से युवा कविताओं की लगभग एकमात्र चारित्रिक विशेषता है, नहीं है बल्कि एक ठोस मानव स्थिति की जटिल गहराइयों में खोज और टटोल है जिसमें दिखाऊ आत्महीनता के बजाय अपनी ऐसी पहचान है जिसे आत्म-साक्षात्कार कहा जा सकता है।

उत्तरदायी होने के साथ धूमिल में गहरा आत्मविश्वास भी है जो रचनात्मक उत्तेजना और समझ के घुले-मिले रहने से आता है और जिसके रहते वे रचनात्मक सामग्री का स्फूर्त लेकिन सार्थक नियंत्रण कर पाते हैं।

यह आत्मविश्वास उन अछूते विषयों के चुनाव में भी प्रकट होता है जो धूमिल अपनी कविताओं के लिए चुनते हैं। मोचीराम, राजकमल चौधरी के लिए, अकाल-दर्शन, गाँव, प्रौढ़ शिक्षा आदि कविताएँ, जैसा कि शीर्षकों से भी आभास मिलता है, युवा कविता के संदर्भ में एकदम ताजा बल्कि कभी-कभी तो अप्रत्याशित भी लगती है। इन विषयों में धूमिल जो काव्य-संसार बसाते हैं वह हाशिए की दुनिया नहीं बीच की दुनिया है। यह दुनिया जीवित और पहचाने जा सकनेवाले समकालीन मानव-चरित्रों की दुनिया है जो अपने ठोस रूप-रंगों और अपने चारित्रिक मुहावरों में धूमिल के यहाँ उजागर होती है।

-अशोक वाजपेयी

प्रचार-प्रसार में मदद की अपील

हम अपने पाठकों से इस सम्मान की विज्ञप्ति को अपने ब्लॉग, वेबसाइट पर लगाने का निवेदन करते हैं। नीचे से कोड कॉपी करें-

बैनर-1

इस बैनर का कोडः


बैनर-2

इस बैनर का कोडः



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48वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता में भाग लें


हिंद-युग्म की मासिक यूनिप्रतियोगिता के दिसंबर संस्करण के आयोजन की सूचना के साथ हम आपके समक्ष  हैं। विगत माहो की तरह दिसंबर 2010 माह के लिये  हम यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। यह इस प्रतियोगिता का 48वाँ आयोजन है। सभी प्रतिभागियों और पाठकों का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन इस प्रतियोगिता की उपलब्धि है।

प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


नवंबर 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 दिसंबर 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 दिसंबर 2010 से 31 दिसंबर 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

47वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता में भाग लें



हिंद-युग्म का कविता संबंधी यह मासिक आयोजन अपने 46 पड़ाव पार कर निर्बाध अपनी अर्धशती की ओर अग्रसर है। विगत माहो की तरह नवंबर 2010 माह के लिये  हम यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। यह इस प्रतियोगिता का 47वाँ आयोजन है। सभी प्रतिभागियों और पाठकों का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन इस प्रतियोगिता की उपलब्धि है।

प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


नवंबर 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 नवंबर 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 नवंबर 2010 से 30 नवंबर 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

46वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता में भाग लें


हिन्द-युग्म अक्टूबर 2010 की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। यह इस प्रतियोगिता का 46वाँ आयोजन है। प्रतियोगिता की लोकप्रियता इसमे भाग लेने वाले प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या और उनके जोश से परिलक्षित होती है। बहुत से गैर हिन्दी भाषी कवि और पाठक भी इस आयोजन का हिस्सा रहे हैं।

प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


अक्टूबर 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 अक्टूबर 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 अक्टूबर 2010 से 31 अक्टूबर 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

45वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता में भाग लें


हिन्द-युग्म सितम्बर 2010 की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। यह इस प्रतियोगिता का 45वाँ आयोजन है। अब इसकी पहुँच भारत के ही हर कोने तक नहीं बल्कि दुनिया के लगभग सभी स्थानों के हिन्दी प्रेमियों तक हो गई है। बहुत से गैर हिन्दी भाषी कवि और पाठक भी इस आयोजन का हिस्सा रहे हैं।

प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


सितम्बर 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 सितम्बर 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 सितम्बर 2010 से 30 सितम्बर 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।


कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

अगस्त 2010 की यूनिप्रतियोगिता में भाग लीजिए


धीरे-धीरे हम यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के 44वें आयोजन तक पहुँच चुके हैं। पत्रिकाओं से कविता का कम होता स्थान इस बात का संकेत नहीं है कि कविता के रसज्ञों की संख्या घट रही है। यह बस एक अफवाह है या फिर कविता विरोधियों की साज़िश। क्योंकि हिन्द-युग्म का यह कविता मंच इस बात को खारिज करता है। जबकि इंटरनेट की पहुँच भारत के 5 प्रतिशत लोगों तक ही है, उसमें भी सबसे अधिक कविता को पसंद करने वाले ही लोग हैं।

हम अगस्त 2010 की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


अगस्त 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 अगस्त 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 अगस्त 2010 से 31 अगस्त 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।


कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

यूनिप्रतियोगिता के 43वें संस्करण में भाग लीजिए


हिन्दी कवियों को वैश्विक मंच देने और यूनिकोड-हिन्दी के प्रोत्साहन हेतु हिन्द-युग्म प्रत्येक माह यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता का आयोजन करता है। यह हिन्दी का एकमात्र ऐसा आयोजन है जो पाठकों को भी पुरस्कृत करता हैं। हिंद-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के 43वें संस्करण में जुलाई 2010 माह के लिये प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


जुलाई 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 जुलाई 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 जुलाई 2010 से 31 जुलाई 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।


कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

जून 2010 की यूनिप्रतियोगिता मे भाग लीजिये


हिंद-युग्म पर जनवरी 2007 से आरंभ हुआ यूनिप्रतियोगिता का सफ़र अबाध गति से 41 सोपानों को पार करता हुआ अपने 42वें माह मे प्रवेश कर रहा है। इस प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य दुनिया भर से काव्य प्रतिभाओं की तलाश करना तो है ही, साथ ही यूनिकोड-हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना भी रहा है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से जहाँ अनेकों काव्य-कुसुमों को पल्लवित होने का अवसर मिला है, वहीं अंतर्जाल के पाठकों मे हिंदी-कविता के प्रति रुचि जाग्रत करने मे भी यह प्रतियोगिता महत्वपूर्ण साबित हुई है। हिंद-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के 42वें संस्करण मे जून 2010 माह के लिये प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। प्रतियोगिता के विजेताओं को विचार एवं संस्कृति की चर्चित पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता दी जायेगी। प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।



जून 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 जून 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 जून 2010 से 30 जून 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को समयांतर की एक वर्ष की मुफ्त सदस्यता। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की 12 महीने की मुफ्त सदस्यता और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की 12 महीनों की निःशुल्क सदस्यता।


कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

40वीं यूनिप्रतियोगिता में भाग लीजिए और जीतिए हजारों के इनाम


हिन्द-युग्म 40वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। यह प्रतियोगिता जनवरी 2007 से हर महीने आयोजित हो रही है। इस प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य दुनिया भर से काव्य प्रतिभाओं की तलाश करना तो है ही, साथ ही यूनिकोड-हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना है। हिन्दी साहित्य की घटती पठनीयता के बरक्स यूनिपाठक पुरस्कार लगातार नये पाठकों जन्म देने का कारक रहा है। इस प्रतियोगिता में 10 कवियों और 4 पाठकों को प्रशस्ति-पत्र, पुस्तक इत्यादि भेंटकर प्रोत्साहित किया जाता है।


अप्रैल 2010 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 अप्रैल 2010 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 अप्रैल 2010 से 30 अप्रैल 2010 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


1) यूनिकवि को समयांतर की ओर से पुस्तकें तथा हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2010 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को समयांतर की ओर से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की ओर से पुस्तकें।


कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

प्रतियोगिता के तीसरे वार्षिकांक से इनामी पुस्तकें 'समयांतर' की ओर से


यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का यह 36वाँ आयोजन कुछ मायनों में बहुत खास है। हिन्द-युग्म अब तक इस प्रतियोगिता के विजेताओं को अपने सहयोगी लेखकों की पुस्तकें भेंट करता रहा है। श्याम सखा द्वारा संपादित साहित्यिक त्रैमासिक 'मसि-कागद' की ओर से भी कई दफ़ा पुस्तकें भेंट की गईं। लेकिन अब तीसरे वर्ष के अंत में यह सूचना हमारे सभी प्रतिभागियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि बहुचर्चित पत्रिका समयांतर उन्हें चुनिंदा पुस्तकें भेंट कर सम्मानित करेगी। और इतना ही नहीं हर महीने की 3 श्रेष्ठ कविताएँ समयांतर में प्रकाशित भी होंगी। इससे इंटरनेट पर सक्रिय कवियों की कलम से प्रिंट के लेखक और पाठक भी परिचित हो सकेंगे। गौरतलब है कि 'समयांतर' वरिष्ठ कथाकार पंकज बिष्ट द्वारा संपादित विचार और संस्कृति की लोकप्रिय पत्रिका है।

यह शुरूआत नवम्बर 2009 के विजेताओं से की जायेगी। और समयांतर के जनवरी या फरवरी 2010 अंक में अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर माह की प्रतियोगिता की चुनिंदा कविताएँ प्रकाशित की जायेंगी।

तो मौका न गँवाएँ, यदि आपने नवम्बर अंक में भाग नहीं भी लिया तो भी दिसम्बर 2009 (तीसरा वार्षिकांक) में ज़रूर भाग लें।

दिसम्बर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 दिसम्बर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 दिसम्बर 2009 से 31 दिसम्बर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2009 के वार्षिकोत्सव को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

२) यूनिपाठक को समयांतर की ओर से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की ओर से पुस्तकें।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

महीना चाहे कोई-सा हो, हिन्दी में लिखिए-पढ़िए, इनाम-सम्मान पाइए


यह हिन्द-युग्म की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का 35वाँ आयोजन है। हिन्द-युग्म यह प्रतियोगिता इंटरनेट पर लिखने और पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने आयोजित करता है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से हिन्द-युग्म ने अब तक 32 साहित्य-सितारों को साहित्याकाश में टाँका है।

हम उम्मीद करते हैं कि हमेशा की तरह इस बार भी कवि और पाठक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और इसे सफल बनायेंगे। जो लेखक-पाठक अब तक हिचकिचाते रहे हैं, उनसे आग्रह है कि वे हर तरह की झिझक त्यागे और इस प्रयास का हिस्सा बनें।

नवम्बर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 नवम्बर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 नवम्बर 2009 से 30 नवम्बर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2009 के वार्षिकोत्सव को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

२) यूनिपाठक को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक प्रति तथा प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक-एक प्रति।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

34वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के हिस्सेदार बनें


हिन्द-युग्म 34वीं यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। ग़ौरतलब है हिन्द-युग्म इंटरनेट पर हिन्दी-प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए जनवरी 2007 से प्रतिमास यूनिप्रतियोगताओं का आयोजन करता है, जिसके अंतर्गत 10 कवियों और 4 पाठकों को पुरस्कृत व सम्मानित किया जाता है

हम उम्मीद करते हैं कि हमेशा की तरह इस बार भी कवि और पाठक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और इसे सफल बनायेंगे।

अक्टूबर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 अक्टूबर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 अक्टूबर 2009 से 31 अक्टूबर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2009 के वार्षिकोत्सव को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

२) यूनिपाठक को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक प्रति तथा प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक-एक प्रति।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।