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महीना चाहे कोई-सा हो, हिन्दी में लिखिए-पढ़िए, इनाम-सम्मान पाइए


यह हिन्द-युग्म की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का 35वाँ आयोजन है। हिन्द-युग्म यह प्रतियोगिता इंटरनेट पर लिखने और पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने आयोजित करता है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से हिन्द-युग्म ने अब तक 32 साहित्य-सितारों को साहित्याकाश में टाँका है।

हम उम्मीद करते हैं कि हमेशा की तरह इस बार भी कवि और पाठक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और इसे सफल बनायेंगे। जो लेखक-पाठक अब तक हिचकिचाते रहे हैं, उनसे आग्रह है कि वे हर तरह की झिझक त्यागे और इस प्रयास का हिस्सा बनें।

नवम्बर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 15 नवम्बर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 नवम्बर 2009 से 30 नवम्बर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2009 के वार्षिकोत्सव को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

२) यूनिपाठक को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक प्रति तथा प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को रामदास अकेला के कविता-संग्रह 'आईने बोलते हैं' की एक-एक प्रति।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

मार्च 2009 माह की यूनिप्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित


यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के २7वें अंक के लिए प्रविष्टियाँ हम इस सूचना के साथ आमंत्रित कर रहे हैं कि जल्द ही हम नये तरह के सम्मान देने की घोषणा लेकर आने वाले हैं। यूनिकोड (हिन्दी) के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए 'यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता' से आगे निकलकर हम अन्य पुरस्कारों का गुलदस्ता लेकर आयेंगे।

मार्च २००९ का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ मार्च २००९ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ मार्च २००९ से ३१ मार्च २००९ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को हिजड़ों पर केंद्रित रुथ लोर मलॉय द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'Hijaras:: Who We Are' के अनुवाद 'हिजड़े:: कौन हैं हम?' (लेखिका अनीता रवि द्वारा अनूदित) की एक प्रति तथा प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को हिजड़ों पर केंद्रित रुथ लोर मलॉय द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'Hijaras:: Who We Are' के अनुवाद 'हिजड़े:: कौन हैं हम?' (लेखिका अनीता रवि द्वारा अनूदित) की एक प्रति तथा प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को और दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को हिजड़ों पर केंद्रित रुथ लोर मलॉय द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'Hijaras:: Who We Are' के अनुवाद 'हिजड़े:: कौन हैं हम?' (लेखिका अनीता रवि द्वारा अनूदित) की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

फिर महका कविता का गुलशन


हिन्द-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के परिणाम में यह पहली बार हो रहा है कि एक ही कवि को हम दूसरी बार यह सम्मान दे रहे हैं। अमूमन यूनिकवि बनने के बाद कवि हिन्द-युग्म की स्थाई सदस्यता लेकर स्वयं ही अपनी कविताएँ प्रकाशित करने लगता है, लेकिन कई कवि स्थाई तौर पर योगदान देना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं, इसलिए कभी-कभार प्रतियोगिता के रास्ते अपना योगदान देते रहते हैं। आज हम जिस कवि की बात कर रहे हैं उनका नाम है गुलशन सुखलाल। गुलशन सुखलाल ने मई २००८ के यूनिकवि का खिताब भी जीता था। गुलशन सुखलाल के अतिरिक्त यूनिकवि केशव कुमार कर्ण और यूनिकवयित्री दिव्या श्रीवास्तव ने पुरस्कार पाने के बाद इस प्रतियोगिता में भाग लिया है।

नये पाठकों को बता दें कि यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का आयोजन हिन्द-युग्म द्वारा प्रत्येक माह किया जाता है। प्राप्त कविताओं से यूनिकविता चुनने का काम कई चरणों के जजमेंट द्वारा सम्पादित किया जाता है। एक निर्णायक को न तो दूसरे निर्णायक के बारे में कोई जानकारी दी जाती है और न ही रचना के रचनाकार के विषय में। जनवरी माह की यूनिकवि प्रतियोगिता के लिए हमें कुल ४५ कविताएँ प्राप्त हुई थीं। इस बार निर्णय ३ चरणों में कराया गया। पहले चरण में तीन जज, दूसरे में २ और अंतिम चरण में एक निर्णायक की अनुभवी दृष्टि से गुजरने के बाद गुलशन सुखलाल की कविता 'अर्थ का भय' यूनिकविता बनी। इस कविता पर टिप्पणी करते हुए हमारे अंतिम निर्णयकर्ता ने कहा-

"शब्दों की सार्थकता पर एक अच्छी कविता। आज समय और साहित्य की चुनौतियाँ हैं कि शब्दों को निर्रथक होने से बचाया जाय। पर समय इतना कठिन है कि रचनाकार को अपने शब्द यानी अपनी अभिव्यक्ति को सार्थकता प्रदान करने के लिये निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। कवि पर एक ओर अपने परिवेश का दबाव काम करता है, तो दूसरी ओर शब्दों से भी संघर्ष करना पड़ता है-
"आज मेरे शब्दों के चारों तरफ़
काला घना कोहरा छा रहा है
काई सी बैठ रही है
तमाम
तेलाँस पदार्थों की काई
जैसे
गाड़ी के शीशे पर बैठती है"

कविता की लय कहीं-कहीं टूट गयी है पर उसकी अंतर्वस्तु इन्टैक्ट है जो कविता के लक्ष्य को सफलीभूत करती है।"



गुलशन सुखलाल महात्मा गांधी संस्थान, मोका मॉरिशस के हिन्दी विभाग में वरिष्ठ व्याख्याता हैं। हंसराज कॉलिज, दिल्ली विश्वविध्यालय से बीए गुलशन गंगाधरसिंह सुखलाल को अनुभूति-अभिव्यक्ति की संपादिका पूर्णिमा वर्मन प्रवासी हिन्दी युवा कवियों में बहुत ऊँचा स्थान देती हैं-

"बहुत ही कम कवि ऐसे हैं जो विदेशी होने के बावजूद हिन्दी को उतनी ही सहजता से अनुभूत करते और व्यक्त करते हैं जैसे गुलशन सुखलाल। निसन्देह यह हिन्दी के प्रति उनकी गहरे लगाव ही नहीं उनकी निरंतर श्रम और अध्ययन को व्यक्त करता है। नई समय की हर नई चीज़ और जीवन के हर टुकड़े से जुड़ी उनकी सीधी भाषा में लिखी गई तरल कविताएँ पाठक की संवेदना को गहराई से छूती हैं और सदा के लिए अपनी छाप छोड़ जाती हैं।"



इनकी कविता पर और अधिक बात तो पाठक करेंगे, हम सीधे कविता प्रकाशित करते हैं।

पुरस्कृत कविता- अर्थ का भय

बहुत डर लगता था मुझे
निरर्थकता से
बहुत...
बहुत ध्यान रखता था
एक-एक शब्द
एक-एक बात...
इतना ज़्यादा कि बहुत पहले से
मज़ाक करना भी बन्द कर दिया
इतना डरता था

लगता था
अर्थविहीन शब्द
पाप होते हैं
झूठ होते हैं
अन्याय होते हैं
या फिर शब्द ही नहीं होते

लगता था कोई आएगा
लाल स्याही की लिए हुए कलम
और बड़ा सा क्रॉस लगा देगा मेरे शब्दों पर
फ़ेल हो जाऊँगा

इसलिए चुनता था
छोटे-बड़े
तत्सम-तद्भव
अच्छे-बुरे...
सभी तरह के शब्द

अपनी विद्वत्ता दिखाने के लिए नहीं
मात्र निरर्थक न होने के लिए

पर फिर
थकने लगा
अर्थवान होते-होते
अकेला
घिरा हुआ
उन सभी से
जो हर वक्त, दिन-रात
ऐसे शब्द बोलते रहे हैं
जो अब नहीं आते समझ में किसी के
इतनी बार बोले गए हैं वे शब्द
और उनपर इतनी बार
निष्क्रियता
बेईमानी
लालच का
फेरा गया है झारन
कि उनका रूप बिगड़ गया है

अब वे निरर्थक हो गए है
सभी के लिए


फिर भी ये बोले जाते हैं
बोले जाते हैं
बोले जाते हैं

आज वे निरर्थक शब्द
एक-एक करके
घेर रहे हैं
मेरे शब्दों को
चुने हुए
सार्थक शब्दों को

आज मेरे शब्दों के चारों तरफ़
काला घना कोहरा छा रहा है
काई सी बैठ रही है
तमाम
तेलाँस पदार्थों की काई
जैसे
गाड़ी के शीशे पर बैठती है

आज इन सभी निरर्थक शब्दों से घिरकर
मेरे शब्द भी हो रहे हैं
निरर्थक
अब डर कम लगता है निरर्थकता का
आदत पड़ रही है

लेकिन जो गुज़र चुके है
इस काले कोहरे से
उन्होंने चेताया मुझे

'बहुत जल्द
फिर लगने लगेगा डर
सार्थकता से
अपने शब्दों की सार्थकता से...'



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ३, ७, ६॰८
औसत अंक- ५॰६
स्थान- दसवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४॰८, ५, ५॰६ (पिछले चरण का औसत
औसत अंक- ५॰१३३३
स्थान- नौवाँ


अंतिम चरण के जजमेंट में मिला अंक- ८
स्थान- प्रथम


पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु १०० तक की पुस्तकें।

यूनिकवि की कुछ कविताएँ फरवरी माह के अन्य तीन सोमवारों को भी प्रकाशित होंगी, अतः शर्तानुसार रु १०० प्रत्येक कविता के हिसाब से रु ३०० का नग़द इनाम दिया जायेगा।

हिन्द-युग्म प्रत्येक माह इस प्रतियोगिता से कम से कम १० कवियों की कविताएँ प्रकाशित करता है और रचनाकार को पुस्तक के रूप में उपहार भी देता हैं। इस बार जिन अन्य १० कवियों को ग़ज़लगो द्विजेन्द्र द्विज का ग़ज़ल-संग्रह 'जन गण मन' भेंट किया जायेगा, उनके नाम हैं-

मुहम्मद असहन
चन्द्रदेव यादव
प्रदीप वर्मा
रेनू जैन
विवेक असरी
संजय सेन सागर
शामिख फ़राज़
अरूण मित्तल अद्भुत
स्मिता
उमेश पंत

उपर्युक्त कवियों से निवेदन है कि कृपया २८ फरवरी तक अपनी कविता न तो कहीं प्रकाशित करें और न ही करवायें।

अब पाठकों की बात भी कर ली जाय। हिन्द-युग्म के नियमित पाठकों में महिला पाठकों की संख्या शुरू से ही बहुत अधिक रही है। इस बार भी चार पुरस्कृत पाठकों में ३ स्थान महिला पाठकों ने ले रखा है। इस बार यूनिपाठिका के सम्मान के लिए हम चुन रहे हैं नीलम मिश्रा को। नीलम मिश्रा ने हिन्द-युग्म के सभी मंचों को सबसे अधिक पढ़ा, टिप्पणी की। इनकी टिप्पणियों से साफ झलकता है कि ये हर एक प्रविष्टि को बहुत ध्यान से पढ़ती हैं।
यूनिपाठिका- नीलम मिश्रा

पिता -श्रीधर मिश्रा
जन्मस्थान -ग्राम (पांडे वारी ), जिला- लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश
जन्म दिनांक ०१-०१-१९७१
प्रारम्भिक शिक्षा -बरेली, पटना, लखनऊ से
उसके बाद सारी शिक्षा (औपचारिक व अनौपचारिक) लखनऊ से ही संपन्न हुई। पुरातनपंथी ब्राह्मण परिवार में जन्म होने के कारण सिर्फ़ औपचारिक शिक्षा पर ही बल दिया गया, एम॰ए॰- अर्थशास्त्र में तथा बी.एड
सपना -भारत को और उसकी भाषा को पूरा सम्मान दिलाना
आत्म कथ्य -संभ्रांत और शिक्षित व्यक्तियों द्बारा प्रकृति की अवहेलना मन को आहत करती है, किसी भी रोते हुए मासूम के आँसू पोछना चाहती हूँ, किसी भी बूढ़ी औरत के घुटनों पर मलहम लगाकर उसके दर्द को बांटने की कोशिश, किसी हमदर्द की तन्हाई से बातें करने की कोशिश, सार यह है कि सभी को खुश देखना चाहती हूँ
अपने पिता को अपना आदर्श मानती हूँ, जिनके संघर्षों के साथ मैं भी बड़ी होती गई दुनिया का सबसे अच्छा इंसान मानती हूँ उन्हें, दूसरों कि नजरों में वो क्या हैं इसकी परवाह किए बिना

पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु २०० तक की पुस्तकें।

दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों के लिए हमने क्रमशः एम॰ ए॰ शर्मा 'सेहर', निर्मला कपिला और दिलशेर खान को चुना है। इनमें से एम॰ए॰ शर्मा 'सेहर' ने हिन्द-युग्म को खूब पढ़ा। हम उम्मीद करते हैं कि आगे से ये अपनी पठनीयता को और बढ़ायेंगी। तीनों पाठकों को कवि द्विजेन्द्र द्विज के ग़ज़ल-संग्रह 'जन गण मन' की एक-एक प्रति भेंट की जायेगी।

हम निम्नलिखित कवियों के भी आभारी हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया और यह निवेदन करते हैं कि फरवरी २००९ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भी अवश्य भाग लें।

मनु ’बेतखल्लुस’
तपन शर्मा
सुधीर सक्सेना 'सुधि'
दिलशेर "दिल" दतिया
अलका मिश्रा
चारु लेखा
प्रताप नारायण सिंह
अखिलेश श्रीवास्तव
नीलम मिश्रा
सारदा अरोरा
अवनीश तिवारी
केशव कुमार कर्ण
शिखा वार्ष्नेय
कमलप्रीत सिंह
सीमा सचदेव
पंकज स्मित
रश्मि प्रभा
प्रदीप पाठक
एम॰ ए॰ शर्मा 'सेहर'
संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
बृजेश गुप्त 'अक्स'
संगीता
योगेश गाँधी
अबयज़ ख़ान
अमन 'बस अमन'
अनिरुद्ध सिंह चौहान
शिवम शर्मा
विपुल कुमार श्रीवास्तव
बृजेश पंत
दिनेश शर्मा
सुनील सोनू
सोनिया शर्मा
सुनील मंथन शर्मा
जी मिश्रा

हिन्दी में लिखेंगे या पढ़ेंगे, इनाम और सम्मान पायेंगे


हिन्द-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का आयोजन प्रत्येक माह को करता है। जनवरी २००७ से शुरू हुए इस आयोजन के प्रमुख उद्देश्य देवनगारी हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना, रचनाधर्मिता का प्रोत्साहन करना तथा पठनीयता को बढ़ाना हैं। हम फरवरी माह की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं-

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ फरवरी २००९ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ फरवरी २००९ से २८ फरवरी २००९ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को कवयित्री निर्मला कपिला के कविता-संग्रह 'सुबह से पहले' की एक-एक प्रति।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को कवयित्री निर्मला कपिला के कविता-संग्रह 'सुबह से पहले' की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

नये साल में हिन्दी में लिखना शुरू करें और इनाम जीतें


हिन्द-युग्म ने यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के आयोजन के २ वर्ष पूरे कर लिये हैं। जनवरी २००९ माह की प्रतियोगिता के लिए हम कविताएँ आमंत्रित करते हैं। नये साल में संकल्प लें कि अब आप रोमन में हिन्दी लिखना छोड़ेंगे और अपनी रचनाओं को देवनागरी (यूनिकोड) में लिखकर भेजेंगे या कहीं प्रकाशित करेंगे। वे पाठक जो अब तक रोमन में टिप्पणी करते रहे हैं, उनसे भी निवेदन है कि कृपया देवनागरी में टिप्पणी देना शुरू करें।

हम उम्मीद करते हैं कि कवि तथा पाठक हमारे इस आयोजन में अपनी रचनाओं और टिप्पणियों से सजाकर इसे सफल बनायेंगे।

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १९ जनवरी २००९ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ जनवरी २००९ से ३१ जनवरी २०० के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को कवि द्विजेन्द्र द्विज के ग़ज़ल संग्रह 'जन गण मन' की एक-एक प्रति।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को कवि द्विजेन्द्र द्विज के ग़ज़ल संग्रह 'जन गण मन' की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

दिसम्बर माह की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का हिस्सा बनिए


यूनिकोड (हिन्दी) के प्रयोग के प्रचार-प्रसार हेतु हिन्द-युग्म विगत् २ वर्षों से प्रत्येक माह यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। जिसके माध्यम से १० कवियों और ४ पाठकों को पुरस्कृत तथा सम्मानित किया जाता है। अभी कल ही पाठक नये यूनिकवि और यूनिपाठिका से परिचित हो चुके हैं। दिसम्बर २००८ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाती हैं-

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ दिसम्बर २००८ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ दिसम्बर २००८ से ३१ दिसम्बर २००८ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को कवि गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' द्वारा संपादित हाडौती के जनवादी कवियों की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह 'जन जन नाद' की एक-एक प्रति।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को कवि गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' द्वारा संपादित हाडौती के जनवादी कवियों की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह 'जन जन नाद' की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

क्षणिकाओं की रचना...


आज हम प्रकाशित कर रहे हैं तीसरे पायदान की कविता। कवयित्री हैं रचना श्रीवास्तव, जिन्हें हम पहले भी कईं बार पढ़ चुके हैं। ये पहले भी प्रतियोगिता में प्रथम १० में स्थान बनाने में कामयाब रही हैं। जुलाई माह की प्रतियोगिता में आठवें नम्बर पर रहीं और अगस्त में १४वें। और इस बार इन्हें यूनिपाठिका का सम्मान तो मिला ही है। आइये इन्हें फिर पढ़ते हैं इस बार क्षणिकाओं में।

दुआ
-----------
सूखे से तरसी आंखों ने
मांगी दुआ वर्षा की
पानी बरसा और बरसता ही चलागया
सब कुछ बहा गया
कुछ यूँ कबूल होती है
दुआ गरीबों की


बटवारा
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घर, धन, वृद्ध आश्रम के खर्चे
यहाँ तक कि कुत्ते भी बटें
पर पिता के त्याग ,प्यार
माँ के आँसू ,दूध ,और पीडा
का कुछ मोल न लगा
क्योंकि पुरानी,घिसी चीजों का
कुछ मोल नही होता


शोर
---------

चहुँ और है शोर बहुत
भीतर बाहा हर ओर
तभी सुनाई नही देती
हिमखंड के पिघलने की आवाज़
गाँव के सूखे कुंए की पुकार
धरती में नीचे जाते
जल स्तर की चीख

समीकरण
--------------------
माँ पिता पालते हैं
चार बच्चे खुशी से
पर चार बच्चों पे
माँ पिता भारी है
ये कलयुग का समीकरण है


विस्फोट
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दर्द चीखा
लहू बहा
शहर काँपा
दुनिया के नक्शे पे
भारत थरथराया
राम हुआ शर्मिंदा
रहीम ने सर झुकाया

--------------------

लाशों की भीड़ में
खड़ी
माँ भारती रो रही
चिता जलाऊँ किस के लिए
बनाऊँ कब्र किसकी
मानव मानवता
धर्म धार्मिकता
देश देशभक्ति
है कौन यहाँ
हुई हो न मौत जिसकी



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- 8.5, 3.5, 5, 6, 4, 7.3
औसत अंक- 5.7166
स्थान- नौवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- 7, 6.8, 5.7166 (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- 6.50555
स्थान- तीसरा


पुरस्कार- कवि शशिकांत सदैव की ओर से उनकी काव्य-पस्तक 'औरत की कुछ अनकही'

सूचना : यूनिकवि/यूनिपाठक प्रतियोगिता परिणाम में विलम्ब


किन्हीं अपरिहार्य कारणों से हम सितम्बर माह की प्रतियोगिता के परिणाम आज नहीं प्रकाशित कर पा रहे हैं। परिणाम की घोषणा हम जल्द ही करेंगे। विलम्ब के लिये खेद है।

हिन्दी में लिखते हैं? तो पुरस्कार और सम्मान देगा हिन्द-युग्म


महीने का पहला दिन अर्थात् यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता की उद्‌घोषणा का दिन। इस प्रतियोगिता की यह १६वीं कड़ी है। हम लगातार प्रतिभागी कवियों और प्रतिभागी पाठकों की संख्या में वृद्धि करते जा रहे हैं। इस आशा के साथ कि इस बार भी बड़ी भारी संख्या में कवि और पाठक इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे, आयोजन की सूचना लगा रहे हैं।नये पाठकों को बता दें कि 'हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता' का आयोजन प्रत्येक माह होता है। कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कवियों को अपनी मौलिक तथा अप्रकाशित रचनाएँ महीने की १५ वीं तारीख तक भेजनी होती है, तथा पाठकों को पहले दिन से महीने के आखिरी दिन तक यहाँ प्रकाशित सभी प्रविष्टियों पर टिप्पणियाँ करनी होती है।

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ अप्रैल २००८ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ अप्रैल २००८ से ३० अप्रैल २००८ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के पाठकों को प्रो॰ सी॰बी॰ श्रीवास्तव 'विदग्ध' और विवेक रंजन श्रीवास्तव की ओर से पुस्तकें।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को कवयित्री डॉ॰ रमा द्विवेदी का काव्य-संग्रह 'दे दो आकाश' की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

आप भाग लेंगे तो हमारे प्रयास को बल मिलेगा, तो आइए और हमारा प्रोत्साहन कीजिए।