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Tuesday, December 01, 2009

प्रतियोगिता के तीसरे वार्षिकांक से इनामी पुस्तकें 'समयांतर' की ओर से


यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का यह 36वाँ आयोजन कुछ मायनों में बहुत खास है। हिन्द-युग्म अब तक इस प्रतियोगिता के विजेताओं को अपने सहयोगी लेखकों की पुस्तकें भेंट करता रहा है। श्याम सखा द्वारा संपादित साहित्यिक त्रैमासिक 'मसि-कागद' की ओर से भी कई दफ़ा पुस्तकें भेंट की गईं। लेकिन अब तीसरे वर्ष के अंत में यह सूचना हमारे सभी प्रतिभागियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि बहुचर्चित पत्रिका समयांतर उन्हें चुनिंदा पुस्तकें भेंट कर सम्मानित करेगी। और इतना ही नहीं हर महीने की 3 श्रेष्ठ कविताएँ समयांतर में प्रकाशित भी होंगी। इससे इंटरनेट पर सक्रिय कवियों की कलम से प्रिंट के लेखक और पाठक भी परिचित हो सकेंगे। गौरतलब है कि 'समयांतर' वरिष्ठ कथाकार पंकज बिष्ट द्वारा संपादित विचार और संस्कृति की लोकप्रिय पत्रिका है।

यह शुरूआत नवम्बर 2009 के विजेताओं से की जायेगी। और समयांतर के जनवरी या फरवरी 2010 अंक में अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर माह की प्रतियोगिता की चुनिंदा कविताएँ प्रकाशित की जायेंगी।

तो मौका न गँवाएँ, यदि आपने नवम्बर अंक में भाग नहीं भी लिया तो भी दिसम्बर 2009 (तीसरा वार्षिकांक) में ज़रूर भाग लें।

दिसम्बर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 दिसम्बर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 दिसम्बर 2009 से 31 दिसम्बर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।
यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2009 के वार्षिकोत्सव को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

२) यूनिपाठक को समयांतर की ओर से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को समयांतर की ओर से पुस्तकें।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

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5 कविताप्रेमियों का कहना है :

महाशक्ति का कहना है कि -

प्रतियोगिता को 3 वर्ष बीत गये, जैसे लग रहा है कि कल की बात है।

हिन्‍द युग्म की 'पहल' हिन्‍दी चिट्ठाकारी को क्रान्तिकारी परिणाम दिये है, आज इससे कोई भी मुँह नही मोड़ सकता है।

‍बहुत बहुत बधाई

राकेश कौशिक का कहना है कि -

छत्तीसवीं यूनीकवि और यूनीपाठक प्रतियोगिता आयोजित करने और तीसरी वर्षगांठ मनाने की ओर अग्रसर होने पर हिंदीयुग्म और हिंदीयुग्म परिवार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.

मनोज कुमार का कहना है कि -

बहुत अच्छा क़दम। आपको साधुवाद।

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

अब तो शायद ही ऐसा कोई महीना हो जब हम खुद को रोक पाए हिंदयुग्म पर कविता भेजने से..बड़े ही उत्साह के इंतज़ार रहता है इस प्रतियोगिता का हिन्दी के विकास और प्रचार में आपका यह प्रयास सराहनीय है..बहुत बहुत धन्यवाद!!! और हिन्दयुग्म पर बढ़ती पाठकों का रुझान भी इस बात भी लोकप्रियता को इंगित करता है..बधाई

Sumita का कहना है कि -

बहुत ही बढिया प्रयास हैं । हिन्दी प्रेमियों के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए हिन्दयुग्म को बधाई और शुभकामनाएं !

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