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अप्रैल माह की यूनिप्रतियोगिता मे भाग लें



हिंद-युग्म की मासिक यूनिप्रतियोगिता के अप्रैल संस्करण की विज्ञप्ति आपके समक्ष है। यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के 52वें आयोजन के लिये सभी प्रतिभागियों से प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं। प्रतियोगिता मे अब तक सभी प्रतिभागियों और पाठकों का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिये हम सभी के आभारी हैं।

अप्रैल माह के यूनिकवि को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें तथा प्रशस्तिपत्र भेंट किया जायेगा। यूनिकवि के पास अपनी कविता के ’समयांतर’ पत्रिका मे प्रकाशन का अवसर भी होगा। जबकि शीर्ष दस के अन्य कवियों को हिंद-युग्म प्रकाशन की ओर से पुस्तकें दी जायेंगी।  प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा। प्रतियोगिता मे प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल है। प्रतियोगिता के परिणाम मई प्रथम सप्ताह मे अपेक्षित हैं।


अप्रैल 2011 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 18 अप्रैल 2011 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्यूनिटीज्‌ में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 अप्रैल 2011 से 30 अप्रैल 2011 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र। यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2011 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

मार्च 2011 की यूनिप्रतियोगिता मे भाग लें



विगत वर्षों मे मासिक यूनिप्रतियोगिता का निर्बाध आयोजन हिंद-युग्म के लिये सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों मे से एक है। इसीलिये जनवरी माह मे प्रतियोगिता के 49 माहों का पड़ाव पार कर लेना हमारे लिये बेहद उत्साहजनक और भावनात्मक अवसर रहा। जैसा कि हमने पहले भी कहा था कि प्रतियोगिता के पचासवें संस्करण को हमने अलग और विशिष्ट तरीके से मनाने का निर्णय किया है। इसीलिये फ़रवरी माह की प्रतियोगिता के मासिक प्रारूप को स्थगित करते हुए हम इसे व्यापक और धमाकेदार तरीके से मनाना चाहते हैं। पचासवीं प्रतियोगिता की संशोधित विज्ञप्ति 1-2 दिनों के भीतर ही आपके समक्ष होगी और इसका फ़लक भी विस्तृत होगा। फ़िलहाल हम प्रतियोगिता के क्रम को बरकरार रखते हुए मार्च माह के मासिक प्रारूप मे चलते हैं जो हमारी प्रतियोगिता का इक्यावनवाँ संस्करण है। हम मार्च माह के संस्करण के यूनिकवि एवं यूनिपाठक सम्मान के लिये प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। इस प्रतियोगिता के नियम व शर्तें आदि हमारी पिछली मासिक प्रतियोगिताओं से समान ही है। चूँकि प्रतियोगिता के अर्धशतक के अवसर को मनाने के मद्देनजर फ़रवरी माह मे आयोजित होने वाली प्रतियोगिता स्थगित की गयी है इसलिये फ़रवरी माह के लिये भेजी गयी कविताएं हम मार्च माह की प्रतियोगिता मे शामिल कर रहे हैं। अतः जिन प्रतिभागियों ने फ़रवरी माह मे अपनी प्रविष्टि भेजी है वे इस माह के लिये पुनः अपनी प्रविष्टि न भेजें, उनकी पिछली प्रविष्टि ही मान्य रहेंगी


मार्च माह के यूनिकवि को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें तथा प्रशस्तिपत्र भेंट किया जायेगा। यूनिकवि के पास अपनी कविता के ’समयांतर’ पत्रिका मे प्रकाशन का अवसर भी होगा। जबकि शीर्ष दस के अन्य कवियों को हिंद-युग्म प्रकाशन की ओर से पुस्तकें दी जायेंगी।  प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा। प्रतियोगिता की विज्ञप्ति के विलंब से आने की वजह से प्रविष्टियाँ भेजने की अंतिम तिथि भी बढ़ा कर 21 मार्च कर दी गयी है। प्रतियोगिता के परिणाम 10 अप्रैल तक अपेक्षित हैं।


मार्च 2011 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 21 मार्च 2011 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें। यदि आप फ़रवरी माह मे अपनी प्रविष्टि भेज चुके हैं तो इस माह के लिये पुनः अपनी प्रविष्टि न भेजें, हम आपकी फ़रवरी माह की प्रविष्टि को ही इस प्रतियोगिता मे शामिल कर लेंगे।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 मार्च 2011 से 31 मार्च 2011 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र। यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2011 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

जनवरी 2011 की युनिप्रतियोगिता मे भाग लीजिये


हिंद-युग्म की मासिक यूनिप्रतियोगिता एक और पड़ाव पार कर 2011 मे प्रवेश कर रही है । जनवरी 2007 से आरंभ हुए कविता के इस मासिक आयोजन का यह 49वाँ संस्करण है।  विगत माहो की तरह जनवरी 2011 माह के लिये  हम यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं।सभी प्रतिभागियों और पाठकों का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन इस प्रतियोगिता की उपलब्धि है।

प्रतियोगिता के पुरस्कार मे इस बार परिवर्तन किया गया है। जनवरी माह के यूनिकवि को हिंद-युग्म से सद्यप्रकाशित सुधीर गुप्ता ’चक्र’ के नये काव्य-संग्रह ’उम्मीदें क्यों’ की प्रति तथा प्रशस्तिपत्र भेंट किया जायेगा। जबकि शीर्ष दस के अन्य कवियों को हिंद-युग्म प्रकाशन की पुस्तकें दी जायेंगी।  प्रतियोगिता द्वारा चयनित यूनिकवि को हिंद-युग्म के वार्षिकोत्सव मे विख्यात साहित्यकार के द्वारा सम्मानित भी किया जायेगा।


जनवरी 2011 का यूनिकवि बनने के लिए-

1) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 17 जनवरी 2011 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

2) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

3) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की। आप किसी अन्य फॉन्ट में भी अपनी कविता टंकित करके भेज सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि रचना word, wordpad या पेजमेकर में हो, पीडीएफ फाइल न भेजें, साथ में इस्तेमाल किये गये फॉन्ट को भी ज़रूर भेजें।

4) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।



यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड (हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टाइपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

1) 1 जनवरी 2011 से 31 जनवरी 2011 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

2) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

3) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त एक समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

4) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।


कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

1) यूनिकवि को सुधीर गुप्ता ’चक्र’ के नये काव्य-संग्रह ’उम्मीदें क्यों’ की प्रति। हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र। यूनिकवि को हिन्द-युग्म के वर्ष 2011 के वार्षिकोत्सव में प्रतिष्ठित साहित्यकारों के हाथों सम्मानित किया जायेगा।

2) यूनिपाठक को हिंद-युग्म प्रकाशन से पुस्तकें और हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।

3) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों हिंद-युग्म प्रकाशन से पुस्तकें।

प्रतिभागियों से यह भी अनुरोध है कि पिछले महीनों मे भेजी गयी अपनी किसी प्रविष्टि को दोबारा प्रतियोगिता के लिये न भेजें। कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

ईद पर कविताएँ आमंत्रित


काव्य-पल्लवन विषय-विशेष हो या विधा-विशेष हो?- इस पर हुई तीन दिवसीय चर्चा के बाद हमने काव्य-पल्लवन को इस बार भी किसी एक विषय पर ही कराने का निर्णय लिया है।

यह महीना रमजान का है। अगले महीने की २ तारीख को ईद है, उसी दिन महात्मा गाँधी की जयन्ती भी है। गाँधी जी पर हम पहले भी कविताएँ प्रकाशित करते रहे हैं, लेकिन पिछले २ वर्षों में ईद पर बहुत कम कविताएँ हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हुईं।

इसलिए इस माह का काव्य-पल्लवन 'ईद' पर केन्द्रित होगा। इसके अंतर्गत भाईचारा, रमजान आदि विषयों की कविताएँ भी संकलित होंगी। अपनी मौलिक रचनाएँ २४ सितम्बर २००८ तक kavyapallavan@gmail.com पर भेजें। ईद-विशेषांक काव्य-पल्लवन २५ सितम्बर को हिन्द-युग्म पर प्रकाशित होगा।

काव्य-पल्लवन के लिए जो पाठक नये हैं, वो यहाँ देखें।

काव्य-पल्लवन विषय-विशेष या विधा-विशेष?


अब तक काव्य-पल्लवन विषय-विशेष पर पिछले १८ महीनों से आयोजित हो रहा है। पिछली बार बहुत से पाठकों के सुझाव आये कि काव्य-पल्लवन को विधा-विशेष पर भी आयोजित किया जाना चाहिए। (मतलब जैसे गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, गद्यगीत, तुकान्त इत्यादि में)।

लेकिन इसमें एक व्यवहारिक संकट यह है कि हम यदि विधा-विशेष में रचनाएँ मँगवायें तो विधा के व्याकरण के दोष से युक्त रचनाओं की प्राप्त होने की संभावना अधिक है। यह हिन्द-युग्म का २ वर्ष से अधिक समय का अनुभव है।

फिर भी यदि पाठकवर्ग यह समझता है कि किसी खास विधा में ही रचनाएँ आमंत्रित की जायँ, तो किस विधा में? आप किन-किन विषयों पर किसी एक ही विधा में कविताएँ पढ़ना चाहते हैं? कृपया आप अपने विचार वृहस्पतिवार ११ सितम्बर २००८ की मध्यरात्रि तक kavyapallavan@gmail.com पर लिख भेजें।

काव्य-पल्लवन के बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ देखें।

चाहे आप कवि हों, पाठक हों या हों दोनों, जीतिए इनाम


आज ही हमने बीसवीं यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किये हैं और संयोग से आज ही सितम्बर माह की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के आयोजन की उद्‌घोषणा कर रहे हैं। यह २१वाँ आयोजन है। चाहे आप कवि हों या हों पाठक या फिर दोनों, ले सकते हैं इसमें भाग और यूनिकोड हिन्दी के प्रोत्साहन का एक सिरा आप भी पकड़ सकते हैं।

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ सितम्बर २००८ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ सितम्बर २००८ से ३० सितम्बर २००८ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को मसि-कागद की ओर से पुस्तकें।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को कवि शशिकांत सदैव का काव्य-संग्रह 'स्त्री की कुछ अनकही' की एक-एक प्रति।

५) यूनिकवि, दूसरे स्थान के कवि तथा यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'यलो पिरामिड' (जो कि दीमागी स्थिरता, मनोबल बढ़ाता है और साहित्य सृजन व पढ़ाई में ध्यान लगाने में मददगार है) भेंट की जायेगी।

६)यूनिकवि और यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी से ध्यान (मेडिटेशन) पर किसी भी एक पैकेज़ की सम्पूर्ण ऑनलाइन शिक्षा पाने का अधिकार होगा। (लक पैकेज़ को छोड़कर)

७) इस बार जो भी पाठक माह भर में कम से कम १० टिप्पणियाँ करेंगे, उन्हें मसि-कागद का नया अंक भेंट किया जायेगा।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

आप भाग लेंगे तो हमारे प्रयास को बल मिलेगा, तो आइए और हमारा प्रोत्साहन कीजिए।

रिश्तों के तानेबाने में होगा अगस्त 2008 का काव्य-पल्लवन


अगस्त २००८ माह के काव्य-पल्लवन के लिए हम 'रिश्ते' विषय पर कविताएँ, पेंटिंग, फोटोग्राफ्स इत्यादि आमंत्रित करते हैं। इस विषय पर उपर्युक्त सामग्री २५ अगस्त २००८ तक kavyapallavan@gmail.com पर भेजें। कविता, पेंटिंग या फोटोग्राफ्स का मौलिक तथा अप्रकाशित होना आवश्यक है।

यह ध्यान रखें कि ब्लॉग, वेबसाइट, ग्रुप, कम्यूनिटी, पत्र-पत्रिका इस्यादि में प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित कहलायेंगी और उन्हें स्वीकार नहीं किया जायेगा।

इस बार के काव्य-पल्लवन के लिए हमें ढेरों विषय प्राप्त हुए जिसमें से 'आज़ादी' विषय को कइयों ने चुना भी, लेकिन चूँकि यह अंक २८ अगस्त २००८ को प्रकाशित होना है अतः हमसे इस मामले में देरी हो गई। यद्यपि 'आज़ादी' को हम बहुत बड़े संदर्भ में देख सकते हैं। इसे कभी और करा लेना भी ठीक रहेगा। अतः दूसरा विषय लेना, ज्यादा प्रासंगिक लगा।

यह विषय किसी 'HC' नाम के पाठक का है, जिन्होंने परिचय हमें नहीं दिया है। इनके अतिरिक्त हमें डॉ॰ शीला सिंह, संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी, निखिल आनंद गिरि, स्मार्ट इंडियन, सीमा सचदेव, शशिकांत, अरविन्द, मृदुल कीर्ति, ब्रह्मनाथ तिवारी 'अंजान' , सुरेन्दर अभिन्न, प्रदीप मनौरिया, शैफाली शर्मा, नीरा राजपाल, प्रेम सहजवाला ने हमें अपने-अपने विषय भेजे। सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

काव्य-पल्लवन के विषय में अधिक जानकारी और पुराने अंक पढ़ने के लिए निम्न लिंक देखें-

पुराने विशेषांक

काव्य-पल्लवन क्या है?
अंक-१
अंक-२
अंक-३
अंक-४
अंक-५
अंक-६
अंक-७
अंक-८
अंक-९
अंक-१०
अंक-११
अंक-१२
अंक-१३
अंक-१४
अंक-१५ (पहली कविता विशेषांक)
अंक-१६ (महँगाई)

अगस्त महीने के काव्य-पल्लवन का विषय क्या होना चाहिए


हिन्द-युग्म अगस्त माह के काव्य पल्लवन के लिए विषय आमंत्रित करता है। आपकी नज़र ऐसा कौन सा विषय है जिसपर कवियों का ध्यान नहीं गया और आप उनका ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं? विषयों को सोचने के विविध काव्यात्मक आयामों से रूबरू होना चाहते हैं? यदि आप चाहते हैं कि आपके दिये गये विषय पर काव्यात्मक विमर्श हो तो अपने विषय kavyapallavan@gmail.com पर रविवार १० अगस्त २००८ तक भेज दीजिए। चुने गये विषय की सूचना सोमवार ११ अगस्त को दे दी जायेगी। ध्यान रहे विषय १-४ शब्दों का हो।

अब हम काव्य-पल्लवन के साथ नया ऑफर जोड़ रहे हैं। जुलाई माह के काव्य-पल्लवन पर एक पाठक की टिप्पणी से प्रेरित होकर हम यह ऑफर पाठकों के समक्ष रख रहे हैं।

यदि कोई व्यक्ति अपने किसी परिजन, राष्ट्र, समाज या मित्र इत्यादि को काव्य-पल्लवन का कोई या कई विशेष अंक समर्पित करना चाहे तो अपने चुने गये संपादक द्वारा संपादित कर तथा प्रकाशित करके कर सकता है। विशेषांक पुस्तक या पुस्तिका रूप में प्रकाशित होगा। हम अपने पाठकों और वरिष्ठ साहित्यकारों तक आपका यह प्रयास पहुँचायेंगे। इसके लिए सहयोग के तौर पर आपको लागत-मूल्य/खर्च वहन करना होगा। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें- hindyugm@gmail.com पर।

काव्य-पल्लवन के विषय में अधिक जानकारी और पुराने अंक पढ़ने के लिए निम्न लिंक देखें-

पुराने विशेषांक

काव्य-पल्लवन क्या है?
अंक-१
अंक-२
अंक-३
अंक-४
अंक-५
अंक-६
अंक-७
अंक-८
अंक-९
अंक-१०
अंक-११
अंक-१२
अंक-१३
अंक-१४
अंक-१५ (पहली कविता विशेषांक)
अंक-१६ (महँगाई)

हिन्दी में लिखो और जीतो- 20वीं कड़ी


हिन्द-युग्म की यूनिकवि प्रतियोगिता में पिछली बार ५२ प्रतिभागियों ने भाग लिया। हम उम्मीद करते हैं कि अगस्त २००८ में यह संख्या और बढ़ेगी। हम यूनिकवि प्रतियोगिता के लिए मौलिक तथा अप्रकाशित कविताएँ आमंत्रित करते हैं, और पाठकों से भी आव्हान करते हैं कि आयें और कविताओं पर समीक्षात्मक टिप्पणियाँ और पुस्तकें, प्रशस्ति-पत्र के साथ-साथ नगद इनाम ले जायें।

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ अगस्त २००८ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ अगस्त २००८ से ३१ अगस्त २००८ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) एक से चौथे स्थान के पाठकों को मसि-कागद और संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी की ओर से पुस्तकें।

४) पहले से दसवें स्थान के कवियों को कवि संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी का काव्य-संग्रह 'समर्पण' की एक-एक प्रति, एवम् त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'मसि-कागद' की ओर से पुस्तकें।

५) यूनिकवि, दूसरे स्थान के कवि तथा यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'यलो पिरामिड' (जो कि दीमागी स्थिरता, मनोबल बढ़ाता है और साहित्य सृजन व पढ़ाई में ध्यान लगाने में मददगार है) भेंट की जायेगी।

६)यूनिकवि और यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी से ध्यान (मेडिटेशन) पर किसी भी एक पैकेज़ की सम्पूर्ण ऑनलाइन शिक्षा पाने का अधिकार होगा। (लक पैकेज़ को छोड़कर)

७) इस बार जो भी पाठक माह भर में कम से कम १० टिप्पणियाँ करेंगे, उन्हें मसि-कागद का नया अंक भेंट किया जायेगा।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

आप भाग लेंगे तो हमारे प्रयास को बल मिलेगा, तो आइए और हमारा प्रोत्साहन कीजिए।

यूनिकवि विजय शंकर चतुर्वेदी की रुदन को मिला अंजान यूनिपाठक


१९वीं यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के परिणाम लेकर हम उपस्थित हैं। हमें इस बात का संतोष है कि हमारे जजों ने अब तक जिस-जिस को भी यूनिकवि चुना है, उन्होंने उत्कृष्ट कविताएँ अंतरजाल के काव्यप-प्रेमियों को नवाज़ी हैं। उसी आशा और विश्वास के साथ, हम एक और यूनिकवि को इस बार आपकी नज़र कर रहे हैं, जिन्होंने इससे पहले हिन्द-युग्म पर 'बीड़ी सुलगाते पिता' और 'गुरुजन' कविताएँ प्रकाशित की है। १९वीं प्रतियोगिता के लिए यूनिकवि का निर्णय दो चरणों में ७ निर्णयकर्ताओं द्वारा किया गया। पहले चरण में ५ जज नियुक्त किये गये, जिनके द्वारा दिये १० में से अंकों के औसत के आधार पर ५२ में से २३ कविताओं को दूसरे दौर में भेजा गया। दूसरे चरण के २ जजों द्वारा दिये गये अंकों और पिछले चरण के औसत अंक के औसत के आधार पर विजय शंकर चतुर्वेदी की ३ छोटी-छोटी कविताओं (क्षणीकाओं) को यूनिकविता चुना गया।

विजय शंकर चतुर्वेदी
Vijay Shankar Chaturvedi15 जून, 1970 को मध्य प्रदेश के सतना जिले की नागौद तहसील के आमा गाँव में जन्मे विजय शंकर चतुर्वेदी की कविताएँ पहल, वसुधा, वागर्थ, वर्तमान साहित्य, पंकज बिष्ट के संपादन में निकले 'आजकल' युवा कविता विशेषांक, स्वर्गीय सफदर हाशमी की संस्था 'सहमत' की साप्रादयिकता विरोधी कविता-पुस्तक तथा जनसत्ता, दिल्ली में प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रिंट मीडिया में काम करने की बात करें तो, विजय ४ वर्ष तक जनसत्ता, मुम्बई के उप-संपादक रह चुके हैं।
अखबारी लेखन- लोग हाशिये पर (सबरंग पत्रिका), गलियारा और घूमते-फिरते (संझा जनसत्ता) स्तम्भ. कई कवर स्टोरियां और अनगिनत फीचर आलेख।

टीवी लेखन- 'प्लस चैनल' में चार वर्ष बतौर लेखक रहे। डीडी, स्टार, ज़ी और सोनी टीवी आदि चैनलों के लिए पटकथा लेखन।

पुरस्कृत कविता- रुदन

रुदन-1

सयाने कह गये हैं
रोने से घटता है मान
गिड़गिड़ाना कहलाता है हाथियों का रोना
फिर भी चंद लोग रो-रो कर काट देते हैं जिंदगी
दोस्तों, खुशी में भी अक्सर निकल जाते हैं आंसू
जैसे कि बहुत दिनों बाद मिली
तो फूट-फूट कर रोने लगी बहन.

रुदन-2

वैसे भी यहां रोना मना है
पर बताओ तो सही कौन रोता नहीं है?
साहब मारता है लेकिन रोने नहीं देता
कुछ लोग अभिनय भी कर लेते हैं रोने का
लेकिन मैं जब-जब करता हूं उसकी शादी का जिक्र
तो रोने लगती है बेटी...

रुदन-3

आसान नहीं है रोना
फिर भी खुलकर रो लेता है आसमान
नदियां तो रोती ही रहती हैं
पहाड़ तक रोता है अपनी किस्मत पर
लेकिन बड़ी मुश्किलें हैं मेरे रोने में
कभी मन ही मन भी रोता हूं
तो रोने लगती है मां...



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ५॰७५, ४॰५, ६॰५, ६॰३५, ७॰७५
औसत अंक- ६॰१७
स्थान- तीसरा


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰५, ८, ६॰१७(पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ७॰२२१३
स्थान- प्रथम


पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु १०० तक की पुस्तकें।

चूँकि यूनिकवि ने अगस्त माह के अन्य तीन सोमवारों को भी अपनी कविता प्रकाशित करने का वचन दिया है, अतः शर्तानुसार रु १०० प्रत्येक कविता के हिसाब से रु ३०० का नग़द इनाम दिया जायेगा।

यूनिकवि विजय शंकर चतुर्वेदी को तत्वमीमांसक डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'येलो पिरामिड' भेंट की जायेगी तथा यूनिकवि को डॉ॰ गरिमा तिवारी से मेडिटेशन पर एक पैकेज का ऑनलाइन प्रशिक्षण पाने का अधिकार होगा (लक पैकेज़ छोड़कर)।

इस बार हम शीर्ष १६ कविताओं का प्रकाशन करेंगे ताकि पाठकों की निर्णायक दृष्टि भी सभी स्तरीय कविताओं पर पड़ सके। शीर्ष १६ के अन्य १५ कवि हैं-

अनुराधा शर्मा
अवनीश तिवारी
रूपम चोपड़ा (RC)
विनय के॰ जोशी
दिव्या श्रीवास्तव
देवेन्द्र कुमार मिश्रा
रचना श्रीवास्तव
डॉ. सी. जय शंकर बाबु
गिरिजेश्वर प्रसाद
शैफाली शर्मा
शकुन श्री
उत्त्कर्ष चतुर्वेदी
रश्मि सिंह
विवेक रंजन श्रीवास्तव"विनम्र"
लक्ष्मी ढौंडियाल

उपर्युक्त लिखित नामों में से शीर्ष ९ कवियों को मसि-कागद की ओर से कुछ चुनिंदा पुस्तकें दी जायेंगी। साथ ही साथ संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी अपना काव्य संग्रह 'बता देंगे जमाने को' भेंट करेंगे।

उपर्युक्त कवियों से निवेदन है कि जुलाई माह की अपनी कविता-प्रविष्टि को न तो अन्यत्र कहीं प्रकाशित करें ना प्रकाशनार्थ भेजें क्योंकि हम इस माह के अंत तक एक-एक करके प्रकाशित करेंगे।

इससे पहले कि हम यूनिपाठक की बात करें, हम एक विशेष पाठक की बात करना चाहेंगे। शैलेश जमलोकि जो कि हिन्द-युग्म को पिछले ९-१० महीनों से लगातार पढ़ रहे हैं। लगातार बहुत शिद्दत से टिप्पणियाँ कर रहे हैं। एक-एक कविता को शायद ये कम से कम १५ मिनट का समय देते हैं। खुद को समीक्षक तो नहीं मानते लेकिन कविता की समीक्षा करने का भरसक प्रयत्न करते हैं। हम पिछले ९ महीनों से इन्हें कभी यूनिपाठक नहीं बना पाये क्योंकि शैलेश टिप्पणियाँ जब देते हैं तो खूब देते हैं और जब नहीं तो नहीं। जबकि यूनिपाठक बनने के लिए स्थाई पठन आवश्यक है। परंतु आज हम इन्हें अपना विशेष सम्मान देना चाह रहे हैं। और हमें बहुत खुशी है कि इन्होंने उस सम्मान को ग्रहण के लिए अपनी हामी भी भरी है। हिन्द-युग्म पाठक सम्मान उस पाठक को दिया जाता है जो हिन्द-युग्म को अधिकाधिक पढ़ता है। वर्ष २००७ में यह सम्मान हम आलोक सिंह 'साहिल' को दे चुके हैं।

शैलेश जमलोकि

शैलेश जमलोकि का जन्म देवभूमि उत्तराखंड के केदारनाथ भूभाग में हुआ है। और इनका पूरा बचपन प्रकृति के सानिध्य में बीता। इनके माता-पिता (दोनों) व्यवसाय से अध्यापक हैं। अतः उनके मार्ग दर्शन में शिक्षा मिली और फिर इन्हें अपने करियर बनाए के लिए घर से बाहर अभियांत्रिकी में स्नातक करने जाना पड़ा। अभी वर्तमान में बंगलूरु में कार्यरत हैं। इनके माँ और पिता अध्यापक होने के नाते घर में याद कविताएँ गा कर सुनाते। रोज़ रामायण पाठ होता.. और इस तरह इनके धीरे-धीरे पढ़ने का शौक हुआ..हिंदी के अतिरिक्त इन्हें संस्कृत और पंजाबी भी पढ़ना-लिखना भी अच्छा लगता है,.. परन्तु गढ़वाली गाने इन्हें बेहद पसंद है.. लिखने का शौक तो अभी इतना नहीं है.. मगर कभी-कभी कोशिश कर लेते हैं।

पुरस्कार और सम्मान- रु ५०० का नक़द पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र।

पाठकों की बात करें तो इस बार दो पाठकों स्मार्ट इंडियन और ब्रह्मनाथ त्रिपाठी ने लगभग बराबर टिप्पणियाँ की। समान रूप से सक्रिय रहे, इसलिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल है कि यूनिपाठक कौन है। दोनों ने हर मंच पर टिप्पणियाँ की। कुछ कविताओं पर पहले आईं टिप्पणियों के आधार पर हम ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान' को यूनिपाठक चुन रहे हैं।

ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान'

नाम -ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान'
जन्म- १८ नवम्बर १९८९
जन्मस्थान- परियावां प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
वर्तमान निवास स्थान- नोएडा
स्थायी निवास स्थान-परियावां प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
पिता- राम कृष्ण त्रिपाठी (एक कवि सम्वाद्कार और समाजसेवक है)
माँ - विमला त्रिपाठी (एक गृहणी)
सात भाई बहनो में सबसे छोटे हैं
कविताओ की लिखने की कला पिताजी से विरासत में मिली। इस समय ग्रेटर नोएडा के एक कॉलेज़ से B.Tech की पढ़ाई कर रहे हैं, तथा Gr.Noida के इंजीनियरिंग कालेजों में जो नए कवि लिखते हैं उन्हें प्रोत्साहित करके
ग्रेटर नोएडा में कविता के विकास के लिए काम कर रहे हैं। नए कवियों को एकत्रित करके उन्हें कवि सम्मेलनों के मंच पर लाने के लिए प्रयासरत हैं।
शौक- किताबें पढ़ना, हिन्दी गाने और ग़ज़ल सुनना
फ़ोन -०१२० ४२४०९७०
मो.न. ९८१०६५७१७८
पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु २०० तक की पुस्तकें।

यूनिपाठक ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान' को तत्वमीमांसक डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'येलो पिरामिड' भेंट की जायेगी तथा यूनिपाठक को डॉ॰ गरिमा तिवारी से मेडिटेशन पर एक पैकेज का ऑनलाइन प्रशिक्षण पाने का अधिकार होगा (लक पैकेज़ छोड़कर)।

निस्संदेह दूसरे स्थान के पाठक के रूप में हम चुनेंगे स्मार्ट इंडियन को, जिनकी टिप्पणियों से यह साफ झलकता है कि इन्हें साहित्य की गहरी समझ है, और जिस ऊर्जा से ये हमें पढ़ रहे हैं, हमें आशा है कि आगे भी पढ़ते रहेंगे। इन्हें हम मसि-कागद की ओर से कुछ पुस्तकें भेंट करेंगे।

इसके बार तीसरे और चौथे स्थान के लिए हम किसी भी पाठक को नहीं चुन पा रहे हैं क्योंकि किसी और ने स्थाई तौर पर टिप्पणी नहीं की। लेकिन हम आशा करते हैं कि जिस प्रकार रचना श्रीवास्तव, संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी ने हमें पढ़ना शुरू किया है, इस महीने से ये लगातार सक्रिय हो जायेंगे।

हम निम्नलिखित कवियों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया और यह निवेदन करते हैं कि अगस्त २००८ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भी अवश्य भाग लें।

निशा त्रिपाठी
राकेश कुमार सकराल
गुलशन सुखलाल
धर्म प्रकाश जैन
गीता पंडित (शमा)
केशव कुमार कर्ण
कमलप्रीत सिंह
पवन अरोरा
मनीष जैन
दीपाली मिश्रा
अजय कुमार सिंह
बेला मित्तल
अनिल जींगर
विपिन जैन
भारती यादव
संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
अर्पिता नायक
अरुण मित्तल अद्भुत
पुनीत मिश्रा
हेमज्योत्सना पराशर
अनुराग शर्मा
प्रकाश यादव 'निर्भीक'
अंजु गर्ग
तपन शर्मा
दीपक कुमार
देव (दिव्यांशु श्रीवास्तव)
जया शर्मा
सुनिल कुमार सोनू
ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान'
वीरेन्द्र आर्या
मन्जु महिमा
नीलम मिश्रा
अजीत पाण्डेय
सी॰ आर॰ राजश्री
अर्पित सिंह परिहार

'महँगाई' विषय पर कविताएँ आमंत्रित


हिन्द-युग्म जुलाई २००८ माह के काव्य-पल्लवन के लिए 'महँगाई' विषय पर कविताएँ आमंत्रित करता है। कवियों से निवेदन है कि विषय केन्द्रित अप्रकाशित कविता २८ जुलाई २००८ तक kavyapallavan@gmail.com पर भेजें।

केवल अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जायेंगी।

महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।


चित्रकार और फोटोग्राफर भी विषय केन्द्रित चित्र व फोटो भेजें।

जुलाई माह के काव्य-पल्लवन के लिए ५ जुलाई २००८ को पाठकों से विषय आमंत्रित किये गये। कुल १० पाठकों ने हमें बहुत बढ़िया-बढ़िया भेजे। यह तय कर पाना बहुत मुश्किल था कि किसे चुना जाय किसे नहीं। अंततः हमने विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र' द्वारा प्रेषित विषय 'महँगाई' को सबसे अधिक सामयिक और आम जनता की बात समझा और इसी विषय पर काव्य-पल्लवन कराने का निर्णय लिया।

विवेक रंजन के अतिरिक्त डॉ॰ शीला सिंह, विजय शंकर चतुर्वेदी, ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान', डॉ॰ मित्तल, दिवाकर मिश्र, शैलेश जमलोकि, आदित्य प्रताप सिंह, कमलप्रीत सिंह और मेनका कुमारी ने अपने-अपने विषय भेजे।

इन सभी प्रतिभागियों का हम धन्यवाद करते हैं।

नये पाठकों के लिए बता दें कि काव्य-पल्लवन सामूहिक कविता लेखन की कार्यशाला है जिसमें एक निश्चित विषयों पर कवियों से कविताएँ आमंत्रित की जाती है। यह आयोजन हर माह होता है। अधिक जानकारी के लिए निम्न कड़िया पढ़ें-

काव्य-पल्लवन क्या है?

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अंक-१५ (पहली कविता विशेषांक)