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प्रतियोगिता में भाग लें और समारोह में सम्मानित होने का मौका पायें


मई 2009 में हमने उद्‍घोषणा की थी कि हम यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 मूल्य की पुस्तकें देंगे। शिवना प्रकाशन के कर्ता-धर्ता पंकज सुबीर की मदद से अब यह तय हुआ है कि जनवरी 2010 के अंत में मई 2009 से दिसम्बर 2009 के यूनिकवियों को हिन्द-युग्म के वार्षिक समारोह में सम्मानित किया जाय। आज हम यह उद्‍घोषणा लेकर हाज़िर हैं कि हिन्द-युग्म के आने वाले वार्षिकोत्सव में यूनिकवियों को रु 1000 मूल्य की पुस्तकें, प्रशस्ति-पत्र इत्यादि किसी वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार के हाथों दिये जायेंगे।

उल्लेखनीय है कि हिन्द-युग्म वर्ष 2008 के वार्षिकोत्सव में 4 पाठकों को सम्मानित कर चुका है। इस वर्ष से यूनिकवियों (हर महीने की यूनिकवि प्रतियोगिता के प्रथम स्थान का विजेता) को भी समारोह में ही सम्मानित किया जायेगा।

हम समझते हैं कि हमारी यह उद्‍घोषणा नव कवियों और पाठकों में ऊर्जा भरेगी। अभी तक यदि आप इसके प्रतिभागी बनने से चूके हैं तो कोई बात नहीं, जब जागे तब सबेरा। आज से यह मौका अपने हाथ से जाने न दें। सितम्बर माह की इस प्रतियोगिता में बतौर कवि और बतौर पाठक अवश्य भाग लें।

सितम्बर 2009 का यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता 18 सितम्बर 2009 की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) 1 सितम्बर 2009 से 31 सितम्बर 2009 के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-


१) यूनिकवि को शिवना प्रकाशन की ओर से रु 1000 की मूल्य तक की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को श्याम सखा की ओर से रु 200 मूल्य की पुस्तकें तथा प्रशस्ति-पत्र।

३) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को तथा दूसरे से चौथे स्थान के पाठकों को श्याम सखा की ओर से रु 200 मूल्य की पुस्तकें।

कवि-लेखक प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय लेखकों की प्रविष्टियों को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

हिन्द-युग्म ने किया अपने पहले वार्षिकोत्सव का सफल आयोजन


हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग पर पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण, काव्यपाठ के साथ लोगों ने गीत-संगीत का आनंद उठाया

अतिथिगणः प्रो॰ भूदेव शर्मा, राजेन्द्र यादव(मुख्य-अतिथि) और डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह

रविवार 28 दिसम्बर 2008 को दोपहर 2 बजे से संध्या 6:30 बजे तक धर्मवीर संगोष्ठी कक्ष, हिन्दी भवन में हिन्द-युग्म का वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरूआत निखिल आनंद गिरि के औपचारिक उद्बोधन से हुई। निखिल ने कार्यक्रम के संचालन के लिए हिन्द-युग्म के वरिष्ठ सदस्य और हरियाणा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम' से आग्रह किया।

संचालकः डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम'


शुरूआत में अतिथियों का गुलदस्ता भेंट करके हिन्द-युग्म के सदस्यों ने स्वागत किया। स्वागत करने वालों में शिवानी सिंह, सुनीता चोटिया, नीलम मिश्रा, रूपम चोपड़ा और तपन शर्मा के नाम प्रमुख हैं। इसके बाद हिन्द-युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण की मदद से हिन्द-युग्म की अब तक की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस प्रस्तुतिकरण को वहाँ उपस्थित १५० से अधिक दर्शकों ने टकटकी लगाकर देखा। प्रस्तुतिकरण के बैकग्राउंड में हिन्द-युग्म का थीम-गीत बढ़े चलो का बजना इसमें चार चाँद लगा रहा था। पॉवर प्वाइंट में देश-विदेश से हिन्द-युग्म को मिले शुभकामना और बधाई संदेश भी दिखाये गये।
अमित दहिया बादशाह

कार्यक्रम में इस बात का ख्याल रखा गया था कि विविधता रहे ताकि दर्शक कम से कम बोर हों। इसके बाद काव्य-पाठ का सिलसिला आरम्भ हुआ। हिन्द-युग्म के मेंटर और दिल्ली पोएट्री संस्था के संस्थापक अमित दहिया बादशाह ने पहले कवि के तौर पर काव्य-पाठ का शुभारम्भ किया। 'मिट्टी' और 'चिड़िया' कविता ने लोगों का दिल जीत लिया।
फिर यूनिकवि पावस नीर ने अपनी वह कविता सुनाई जिस कविता ने उन्हें यूनिकवि का खिताब दिया था। शोभा महेन्द्रू ने २६ नवम्बर २००८ को मुम्बई में हुई आंतक घटना की निंदा अपने एक गीत के माध्यम से की और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

इसके बाद मंच पर आसीन पहले अतिथि प्रदीप शर्मा जो मीडिया से ३०-३२ वर्षों से जुड़े हैं, अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कमेंटेटर हैं और वर्तमान में DU-FM के प्रोग्रेम ऑफिसर हैं, को दो शब्द कहने के लिए बुलाया गया। जिसमें उन्होंने हिन्द-युग्म और वहाँ उपस्थित सभी दर्शकों को यह सलाह दी कि हिन्दी या उर्दू या कोई भी भाषा के शब्दों का सही इस्तेमाल और सही उच्चारण होना चाहिए। यह भी कहा कि हिन्द-युग्म के इस प्रयास में मुझसे जितना और जिस प्रकार से बन पड़ेगा, मैं मदद करूँगा।

दूसरा संभाषण डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह (सदस्य कपार्ट, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, डायरेक्टर-एडमिनिस्ट्रेशनः BBS मैनेजमेंट और फॉर्मेसी संस्थान, ग्रेटर नोएडा, उ॰प्र॰) का हुआ। उन्होंने यह बताया कि हिन्द-युग्म को वो दिल्ली में रहकर नहीं बल्कि मुम्बई में जाकर जान सके। यह भी कहा कि उनका ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली ऐसी संस्थाओं को आर्थिक सहयोग देता है जो ग्रामीण क्षेत्रों में कम्प्यूटीकरण के पक्षधर हैं। हिन्द-युग्म ऐसे गैरसरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करे तो वे आर्थिक सहयोग देने की पहल कर सकते हैं।
उपस्थित दर्शक

तत्पश्चात हिन्द-युग्म के नियंत्रक शैलेश भारतवासी ने 'हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग' पर पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण दिया और यह बताया कि कोई भी अधिकतम १० मिनट में हिन्दी टाइपिंग सीख सकता है और ब्लॉग बना सकता है। इन्होंने अपना डेढ़-वर्षीय यूनिप्रशिक्षण का अनुभव बाँटा। बहुत से पाठकों ने सवाल किया, लेकिन समय की कमी के कारण उनका समाधान ईमेल या फोन द्वारा करने की बात कहकर कार्यक्रम के अगले आकर्षण की ओर बढ़ने की सलाह संचालक ने दी। वार्षिकोत्सव के आयोजन का यह सबसे बड़ा आकर्षण था। १५० से भी अधिक संख्या में उपस्थित दर्शकों की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोग ब्लॉगिंग सीखना चाहते हैं और अपनी भाषा में लिखना-पढ़ना चाहते हैं।
हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग पर पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण


इसके बाद हिन्द-युग्म पाठक सम्मान २००८ से ४ पाठकों को सम्मानित करने का क्रम आया। जिसमें आलोक सिंह 'साहिल', सुमित भारद्वाज, दीपाली मिश्रा और पूजा अनिल को यह सम्मान दिया जाना था। यह पुरस्कार प्रयास ट्रस्ट, रोहतक द्वारा दिया गया, जिसके तहत स्मृति चिह्न, पुस्तकों का बंडल और पुस्तकों का बंडल भेंट किये गये। दीपाली मिश्रा की ओर से यह सम्मान इनके चाचा विजय प्रकाश मिश्रा और पूजा अनिल की ओर से यह सम्मान हिन्द-युग्म की सदस्या नीलम मिश्रा ने ग्रहण किया।
हिन्द-युग्म पाठक सम्मान ग्रहण करते सुमित भारद्वाज


इसके बाद हिन्द-युग्म के बहुचर्चित युवाकवि गौरव सोलंकी का काव्यपाठ हुआ। जो बहुत पसंद किया गया। इन्होंने 'हेमंत करकरे नाम का आदमी मर गया था' 'तुम्हारा प्रायश्चित' आदि कविताओं का पाठ किया। तालियों की गड़गड़ाहटें कवितापाठ के प्रभाव का प्रमाण प्रस्तुत कर रही थीं।

कार्यक्रम में आगे अपने संभाषण में हिन्द-युग्म के अगले अतिथि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ प्रो॰ भूदेव शर्मा ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही इंटरनेट को बहुत महत्व दिया है। अमेरिका में रहने वाला हर अप्रवासी भारतीय इंटरनेट से जुड़ा है और इंटरनेट पर हिन्दी में ही पढ़ना-लिखना चाहता है। इसमें बहुत संभावनाएँ हैं। प्रो॰ भूदेव शर्मा 90 के दशक में अमेरिका और उसके आस-पास हिन्दी साहित्य का प्रचार-प्रसार करने में अग्रणी रहे हैं।

आगे के काव्यपाठ में रूपम चोपड़ा ने 'मौसम बदल रहा है' और 'आज फिर वही बात है' का पाठ किया। जिसके बाद संचालक श्याम ने सखा श्याम ने यह कहा कि आज के युवा कवि नये मुहावरे गढ़ रहे हैं। मनुज मेहता ने अपने प्रभावी आवाज़ में 'मेरा कमरा' इत्यादि कविताओं का पाठकर समा बाँध दिया।
नाज़िम नक़वी

इसके बाद नं आया अपनी प्रभावी आवाज़ के लिए मशहूर यूनिकवि निखिल आनंद गिरि का, जिन्होंने १० मिनिट तक श्रोताओं को बाँधे रखा। अंतिम कवि के रूप हिन्द-युग्म के तीसरे अतिथि कवि और वर्तमान में हिन्द-युग्म पर बेहद सक्रिय नाज़िम नक़वी को बुलाया गया जिन्होंने अपनी ग़ज़ल अदायगी से लोगों का दिल जीत लिया।

इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और देश के वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र यादव की बारी आई।
राजेन्द्र यादव ने कहा कि चूँकि इंटरनेट की दुनिया इतनी विस्तृत हो गई है, कम्प्यूटर जन-जन तक अपनी पहुँच बना चुका है इसलिए क्या पता नर्क यानी दोज़ख की भाषा भी यही हो, माध्यम भी यही हो। वो भी इतनी ही आधुनिक हो जाये। इसलिए मैं अपने अंतिम दिनों में यह जुबान सीख लेना चाहता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि हिन्द-युग्म ने आज हिन्दी की इंटरनेटीय उपस्थिति बताकर मेरे सामने एक नई दुनिया खोल दी है। इस कार्यक्रम से पहले उन्हें ब्लॉगिंग के बारे में सुना तो था लेकिन यह दुनिया इतनी विशाल है, उन्हें इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था।

राजेन्द्र यादव ने यह भी कहा कि हिन्दी प्रेमियों को विचारों से भी आधुनिक होना पड़ेगा। हमें खड़ी बोली से पहले के साहित्य को आल्मारियों में बंद कर देना चाहिए। वैचारिक और सामाजिक विकास की स्पर्धा के इस दौर में हमें बहुत आगे जाना है, अतः रास्ते का बोझ जितना हल्का हो उतना ही बढ़िया। उन्होंने एटामिक ऊर्जा की वक़ालत करने वाले ऐसे लोगों की भर्त्सना की जो माथे पर टीका लगाने और मंदिर के बाहर नारियल तोड़ने का पाखंड करते हैं।

राजेन्द्र यादव ने कहा कि वर्तमान की हिन्दी ज़ुबान जिसे ५० करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं या समझते हैं और जो विश्व की दूसरी बड़ी भाषा है, उसका साहित्य भी वहीं से माना जाना चाहिए जहाँ से हिन्दी भाषा का रूप खड़ी बोली हुई है। हिन्दी सिखाने के लिए कबीर-तुलसी के साहित्य की जगह आधुनिक साहित्य उपयोग में लाया जान चाहिए।

राजेन्द्र जी ने महिलाओं और दलितों के हर क्षेत्र में आगे आने पर बल दिया।

इसके बाद सेट्रंल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय सहायक महाप्रबंधक श्रीधर मिश्र को कार्यक्रम में दो शब्द कहने के लिए बुलाया गया। यह कार्यक्रम उन्हीं के सहयोग और मार्गदर्शन में अमली जामा पहन पाया था। श्रीधर मिश्र ने कहा कि वे राजेन्द्र यादव के विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते और वे पुराने चीजों को भी साथ ले चलने के पक्षधर हैं।

अंत में हिन्द-युग्म की सदस्या नीलम मिश्रा ने देश-विदेश से किसी भी माध्यम से हिन्द-युग्म से जुड़े हिन्दी-प्रेमियों का धन्यवाद किया।

इस कार्यक्रम में हरिभूमि अखबार के दिल्ली प्रमुख अरविन्द सिंह, MCD के अधिकारी सुरेश यादव, सेंद्रल बैंक ऑफ इंडिया के हिन्दी अधिकारी ईश्वर चन्द्र भारद्वाज, आकाशवाणी के मोबिन अहमद खाँ, भड़ास4मीडिया के रिपोर्टर अशोक कुमार, प्रसिद्ध ब्लॉगर मसिजीवी, चोखेरबाली ब्लॉग की मुख्य-मॉडरेटर सुजाता तेवतिया, ब्लॉगवाणी के मैथिली शरण गुप्त व सिरिल गुप्त, सफर-प्रमुख राकेश कुमार सिंह, छंदशास्त्री दरवेश भारती, ब्लॉगर राजीव तनेजा, नवभारत टाइम्स के यूसुफ किरयानी, पंडित प्रेम बरेलवी, लेडी श्रीराम कॉलेज में हिन्दी की प्रोसेफर डॉ॰ प्रीति प्रकाश प्रजापति, महकते-पल फोरम प्रमुख सखी सिंह, आनंदम-प्रमुख जगदीश रावतानी, युवा कवि भूपेन्द्र कुमार, साक्षात भसीन, नमिता राकेश, अमर-उजाला में सह-संपादक रामकृष्ण डोगरे, पंजाब केसरी में सह-संपादक सुनील डोगरा ज़ालिम, पत्रकार उमाशंकर शुक्ल, कार्टूनिस्ट मनु-बेतख्खल्लुस, वर्तमान यूनिकवि दीपक मिश्रा ने भी हिन्द-युग्म परिवार को अपना आशीर्वाद दिया।

कार्यक्रम में आगंतुकों के स्वागत के लिए हिन्द-युग्म की ओर से अभिषेक पाटनी, भूपेन्द्र राघव, रविन्दर टमकोरिया, नसीम अहमद, दीप जगदीप, प्रेमचंद सहजवाला इत्यादि उपस्थित थे।

पाठकों से आग्रह है कि इस कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव, मार्गदर्शन और सलाह हमें भेजें जिसे हम हिन्द-युग्म के बैठक मंच पर प्रकाशित करेंगे। इसे हमें आगे के कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। हमारा ईमेल पता है-hindyugm@gmail.com


अन्य झलकियाँ
अतिथिगणः प्रदीप शर्मा, प्रो॰ भूदेव शर्मा, राजेन्द्र यादव(मुख्य-अतिथि) और डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह


दर्शकदीर्घा


प्रो॰ भूदेव शर्मा और राजेन्द्र यादव


दीपाली मिश्रा की ओर से हिन्द-युग्म पाठक सम्मान
ग्रहण करते इनके चाचा विजय प्रकाश मिश्रा


हिन्द-युग्म पाठक सम्मान ग्रहण करते आलोक सिंह 'साहिल'


पूजा अनिल की ओर से हिन्द-युग्म पाठक सम्मान
ग्रहण करती नीलम मिश्रा


हिन्द-युग्म के छायाचित्रकार मनुज मेहता बहुत से चित्र खींचे हैं, अन्य झलकियाँ हम पुनः उपस्थित होंगे।

शेष तस्वीरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें...


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छि: यादव जी, आप कैसे साहित्‍यकार हैं जी!!!
क्या यादव जी के चुरट सुलगाने को भी जायज कहेंगे आप?
बाप दादाओं की तस्वीरों को निकाल कर फेंक दो
साहित्यकार राजेन्द्र यादव का कार्टून
Taking a Call from Hell

28 दिसम्बर 2008 को हिन्द-युग्म मनाएगा वार्षिकोत्सव (मुख्य अतिथि- राजेन्द्र यादव)


हिन्द-युग्म के साथ सीखिए ब्लॉग बनाना और हिन्दी में टाइप करना।
मिलिए ख्याति प्राप्त साहित्यकारों से, सुनिए काव्य पाठ
॰॰॰॰ और भी बहुत कुछ



भाषा प्रेमियो,

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विवरण देखने के लिए ऊपर के चित्र पर क्लिक करें
जैसाकि हमने २७ अक्टूबर २००८ को उद्घोषणा की थी कि इस साल के अंत में हम चार पाठकों को 'हिन्द-युग्म पाठक सम्मान २००८' से सम्मानित करेंगे। यद्यपि यह सम्मान तो पिछले साल से ही दिया जा रहा है, लेकिन इस बार हमने तय किया था कि इस सम्मान को एक समारोह में चोटी के साहित्यकारों के हाथों दिलवायेंगे।

तो मित्रो, हम उपस्थित उन चार पाठकों के नाम लेकर जिन्हें आने वाले २८ दिसम्बर के कार्यक्रम 'हिन्द-युग्म वार्षिकोत्सव २००८' में गणमान्य साहित्यकारों के हाथों यह पुरस्कार दिया जाना है। साथ में बहुत सी गतिविधियाँ और होंगी जिसकी रूपरेखा लेकर हम उपस्थित हुये हैं।

वर्ष २००८ में जिन चार पाठकों ने हिन्द-युग्म को सबसे अधिक पढ़ा, वे हैं-

आलोक सिंह 'साहिल'
दीपाली मिश्रा
पूजा अनिल, और
सुमित भारद्वाज

इन चारों पाठकों के हस्ताक्षर हिन्द-युग्म के सभी मंचों की अधिकाधिक प्रविष्टियों पर उपलब्ध हैं। उपर्युक्त चार पाठकों को २८ दिसम्बर २००८ को धर्मवीर संगोष्ठी कक्ष ( तृतीय तल, हिन्दी भवन, आई टी ओ, दिल्ली) में प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न और पाँच-पाँच पुस्तकों का बंडल दिया जायेगा।

((स्मृति चिह्न और पुस्तकों का बंडल प्रयास-ट्रस्ट की ओर से दिया जायेगा)

जिन गणमान्य लोगों के सानिध्य में यह कार्यक्रम होगा, उनके नाम हैं-

मुख्य अतिथि- राजेन्द्र यादव (प्रख्यात साहित्यकार तथा 'हंस' के संपादक)

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विवरण देखने के लिए ऊपर के चित्र पर क्लिक करें
अतिथिगण-
1. प्रोफेसर भूदेव शर्मा [90 के दशक में अमेरिका और उसके आस-पास हिन्दी साहित्य का प्रचार-प्रसार करने में अग्रणी, विश्वविवेक के पूर्व संपादक, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ (क्लार्क अटलांटा विश्वविद्यालय, अटलांटा में गणित के पूर्व प्राध्यापक), World Assn. for Vedic Studies (WAVES) के संस्थापक तथा भूतपूर्व अध्यक्ष, हिन्दू-यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका (ऑरलाण्डो) के पूर्व कुलपति, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी संस्था 'हिन्दी-निधि' के संस्थापक और वर्तमान में जे॰पी॰ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नोएडा में गणित के प्रोफेसर]

2. डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह [सदस्य कपार्ट, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, डायरेक्टर-एडमिनिस्ट्रेशनः BBS मैनेजमेंट और फॉर्मेसी संस्थान, ग्रेटर नोएडा, उ॰प्र॰]

3. अनामिका [केदार सम्मान 2007 से सम्मानित स्त्रीवादी लेखिका, समकालीन चार शीर्ष कवयित्रियों में शुमार]

4. अभिषेक कश्यप [प्रसिद्ध युवा कहानीकार, नया-ज्ञानोदय के पूर्व सह संपादक और एक राजनैतिक-पत्रिका राज-सरोकार के मुख्य सह-संपादक]

5. पंकज सुबीर [युवा कथाकार, ग़ज़ल शिक्षक]

कार्यक्रम के संचालकः डॉ॰ श्याम सखा श्याम (हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार तथा साहित्यिक-त्रैमासिक ‘मसि-कागद’ के संपादक)।

पाठकों को सम्मानित करने के अतिरिक्त एक विशेष आयोजन 'सरल हिन्दी (यूनिकोड) टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग' का पॉवर पॅवाइंट प्रीजेंटेशन भी होगा, जिसे प्रस्तुत करेंगे हिन्द-युग्म के संपादक-नियंत्रक शैलेश भारतवासी।

इसके अतिरिक्त आप हिन्द-युग्म के निम्नलिखित कवियों के काव्य-पाठ का रस भी ले सकेंगे।

कवि- नाज़िम नक़वी, गौरव सोलंकी, शोभा महेन्द्रू, पावस नीर, रूपम चोपड़ा, निखिल आनंद गिरि, मनुज मेहता


हिन्द-युग्म इससे पहले भी बहुत से सेमिनारों में, विश्वविद्यालय की कक्षाओं में, सम्मेलनों में लोगों को यूनिकोड टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग का प्रशिक्षण दे चुका है। हर महीने लगभग सैकड़ों लोगों को शैलेश टेलीफोन पर ही इस तरह का परामर्श देते रहते हैं।

तो यदि आपको टाइपिंग में समस्या आती हो, ब्लॉग बनाने को इच्छुक है तो इस आयोजन के हिस्सेदार ज़रूर बनें। चूँकि सभागार में सीटें सीमित हैं, इसलिए इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपना पंजीकरण ज़रूर करा लें। ताकि आपके लिए हम हर तरह का इंतज़ाम कर सकें।

दर्शकों के लिए एक और अच्छी ख़बर है। जो दर्शक पंजीकरण के साथ उस कार्यक्रम में उपलब्ध होंगे, उन्हें दरवेश भारती (ग़ज़ल के छंदशास्त्री) की ओर से 'ग़ज़ल के बहाने (पुष्प-१)' पुस्तिका निःशुल्क दी जायेगी। इस पुस्तिका में ग़ज़ल के छंद-विधान का आरम्भिक ज्ञान है। पंजीकृत हो चुके पाठकों को इस पुस्तिका की आने वाली सभी कड़िया मुफ्त में डाक द्वारा भेजी जायेगी।


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तो फिर आप क्या सोच रहे हैं? आपके पास सुनहरा अवसर है- जाने-माने कलमकारों से मिलने का, हिन्द-युग्म पर जिन्हें पढ़ते हैं उनसे रूबरू होने का, उनका काव्य-पाठ सुनने का, 'हिन्दी टाइपिंग कैसे करें?', 'ब्लॉग कैसे बनायें; इत्यादि पर परामर्श लेने का, ग़ज़ल का छंद-विधान की पुस्तिका जीवनभर मुफ़्त पाने का। तो चूकिए मत। नीचे का फॉर्म भर दीजिए। और हाँ! याद रखिए कि आपको रविवार २८ दिसम्बर २००८ को दोपहर २ बजे से शाम ६ बजे तक हिन्द-युग्म के साथ होना है। स्थान होगा- पहुँचने में सुगम, जाना-माना हिन्दी भवन। आइए आपका स्वागत करने को युग्म-परिवार बेताब है।

कार्यक्रम के उपरांत जलपान (रिफ्रेशमेंट) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

ऊपर ले मानचित्र से 'हिन्दी-भवन पहुँचने का रास्ता' न स्पष्ट हो रहा हो, तो यहाँ क्लिक करें।

हमारी मदद करें___

1॰ इस कार्यक्रम की सूचना उन्हें ज़रूर दें, जिन्हें हिन्दी भाषा से अनुराग है, कला से अनुराग, देश से अनुराग है, साहित्य से अनुराग है।
2॰ यदि आप ब्लॉग करते हैं तो आप यह सूचना अपने ब्लॉग पर भी लगा सकते हैं। तरीका बहुत आसान है। इस पोस्ट के नीचे टिप्पणियों (कमेंट) के बाद देखें, लिखा मिलेगा- 'स्थाई कड़ियाँ'॰॰॰॰
उसके ठीक नीचे एक हाइपरलिंक है 'Creat a Link' से। बस उस पर क्लिक करें। एक नई खिड़की (विंडो) खुलेगी, उसमें आपको इसे ब्लॉग करने का विकल्प दिखेगा। एक से अधिक ब्लॉग हैं आपके पास तो ब्लॉग चुनने का विकल्प भी दिखेगा। अपने पसंदीदा ब्लॉग को चुनकर पब्लिश करने (प्रकाशित करने) का बटन दबा दें।
3. अपने ब्लॉग/वेबसाइट/ऑरकुट स्क्रैपबुक/माईस्पैस/फेसबुक में 'हिन्द-युग्म वार्षिकोत्सव २००८' का पोस्टर लगायें। नीचे से कोड कॉपी करें-



हिन्द-युग्म वार्षिक पाठक सम्मान


हिन्द-युग्म अभी तक यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के माध्यम से इंटरनेट से ही इनाम, सम्मान और उपहार देकर हिन्दी लिखने-पढ़ने को प्रोत्साहित करता रहा है। अब हम हिन्द-युग्म के ही वरिष्ठ सदस्य और हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम' की मदद से हिन्द-युग्म पाठक सम्मान एक समारोह में देने की योजना बना रहे हैं। जिसके तहत दिसम्बर २००८ के अंत में हिन्द-युग्मवर्ष २००८ के ४ पाठकों को सम्मानित करेगा (हम जनवरी २००८ से नवम्बर २००८ तका आँकड़ा लेंगे)। इस समारोह में सृजनगाथा द्वारा वर्ष 08 के प्रवासी सम्मान से विभूषित हिंदी सेवी आदित्य प्रकाश के भी उपस्थित होने की सम्भावना है। आदित्य प्रकाश पेशे से वैज्ञानिक हैं और डैलास (अमेरिका) के एफ॰ एम॰ रेडियो चैनल 'रेडियो सलाम नमस्ते' के साप्ताहिक कार्यक्रम 'कवितांजलि' के संयोजक हैं।

वर्ष २००९ के लिए डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम' की ही ओर से एक नक़द इनाम की स्वीकृति मिली है। हम अन्य प्रायोजकों की तलाश में हैं। हम चाहते हैं कि हिन्दी पढ़ने को भी प्रोत्साहन मिले, इसलिए हिन्द-युग्म अपने पाठकों से भी आग्रह करता है कि वे पाठकों को सम्मानित करने में हमारा आर्थिक सहयोग दें। संपर्क करें- hindyugm@gmail.com पर।

हिन्द-युग्म पाठक सम्मान के लिए नियम-

१) जिस पाठक ने वर्ष भर में अधिकाधिक टिप्पणी की हो।
२) टिप्पणी देवनागरी में किया हो।
३) टिप्पणनियों से पठनियता झलके। केवल बहुत खूब, बहुत बढ़िया, बेकार, फालतू इस तरह की टिप्पणियों से काम नहीं चलेगा। समीक्षात्मक टिप्पणियों को तवज़्ज़ो दी जायेगी।
४) हिन्द-युग्म के कम से कम ५ मंचों (जैसे कविता, कहानी, आवाज़, बाल-उद्यान, चित्रावली, ई-मदद, बैठक इत्यादि में से ५) पर एक न्यूनतम संख्या में टिप्पणी करना आवश्यक है। (यह न्यूनतम संख्या हिन्द-युग्म टीम निर्धारित करेगी)।
५) वह पाठक मासिक यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के प्रथम ४ पाठकों में भी आया हो।

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