फटाफट (25 नई पोस्ट):

कृपया निम्नलिखित लिंक देखें- Please see the following links

हिन्दी कविता की नवल किरणें


माह के प्रथम सोमवार को हिन्द-युग्म एक पर्व की तरह मनाता रहा है। इन दिनों छठ पर्व की धूम है। छठ में सूर्य की उपासना की जाती है। इस सोमवार हम भी हिन्दी कविता के कवि-सूर्य और पाठक-सूर्य से आपका परिचय करा रहे हैं। मतलब अक्टूबर माह की यूनिकवि और यूनिपाठक प्रतियोगिता के परिणाम को प्रकाशित कर रहे हैं। यूनिकवि के लिए इस बार हमें कुल ३३ कविताएँ प्राप्त हुई थीं, जिसमें से जजों ने विजय कुमार सप्पत्ती की कविता 'सिलवटों की सिहरन' को यूनिकविता चुना।

यूनिकवि- विजय कुमार सप्पत्ती

मूलतः नागपुर के रहने वाले विजय कुमार सप्पत्ती वर्तमान में MIC इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड, हैदराबाद में वरिष्ठ महाप्रबंधक (मार्केटिंग) हैं। इन्हें कविता-लेखन और फोटोग्राफी से प्यार है। कविता लेखन में नये हैं। अब तक २५० से अधिक कविता लिख चुके हैं जो मुख्यतः प्रेम और संबंधों पर है।

पुरस्कृत कविता- सिलवटों की सिहरन

अक्सर तेरा साया
एक अनजानी धुंध से चुपचाप चला आता है
और मेरी मन की चादर में सिलवटें बना जाता है …..

मेरे हाथ, मेरे दिल की तरह
कांपते हैं, जब मैं
उन सिलवटों को अपने भीतर समेटती हूँ …..

तेरा साया मुस्कराता है और मुझे उस जगह छू जाता है
जहाँ तुमने कई बरस पहले मुझे छुआ था ,
मैं सिहर-सिहर जाती हूँ, कोई अजनबी बनकर तुम आते हो
और मेरी खामोशी को आग लगा जाते हो …

तेरे जिस्म का एहसास मेरे चादरों में धीमे-धीमे उतरता है
मैं चादरें तो धो लेती हूँ पर मन को कैसे धो लूँ
कई जनम जी लेती हूँ तुझे भुलाने में,
पर तेरी मुस्कराहट,
जाने कैसे बहती चली आती है ,
न जाने, मुझ पर कैसी बेहोशी सी बिछा जाती है …..

कोई पीर पैगम्बर मुझे तेरा पता बता दे ,
कोई माझी, तेरे किनारे मुझे ले जाए ,
कोई देवता तुझे फिर मेरी मोहब्बत बना दे.......
या तो तू यहाँ आजा ,
या मुझे वहां बुला ले......

मैंने अपने घर के दरवाजे खुले रख छोड़े है ........


प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰२५, ४, ४॰५, ६॰७५
औसत अंक- ५॰६२५
स्थान- नौवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७, ७॰५, ५॰६२५ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ६॰७१
स्थान- पहला




पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु १०० तक की पुस्तकें।

चूँकि यूनिकवि ने नवम्बर माह के अन्य तीन सोमवारों को भी अपनी कविता प्रकाशित करने का वचन दिया है, अतः शर्तानुसार रु १०० प्रत्येक कविता के हिसाब से रु ३०० का नग़द इनाम दिया जायेगा।

हिन्द-युग्म प्रत्येक माह कम से कम १० कवियों को उपहार-स्वरूप पुस्तकें देकर इनका प्रोत्साहन करता आया है। इस बार हम जिन अन्य नौ कवियों को अनुभूति-अभिव्यक्ति की प्रधान सम्पादिका पूर्णिमा वर्मन का काव्य-संग्रह 'वक़्त के साथ’ की एक-एक प्रति भेंट करेंगे, वे हैं

मनीष मिश्रा
पूजा अनिल
सुजीत कुमार सुमन
रोहित
दिव्य प्रकाश
संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
स्मिता मिश्रा
तपन शर्मा
सुनील कुमार ’सोनू’

उपर्युक्त सभी कवियों की कविताएँ १-१ करके हिन्द-युग्म पर प्रकाशित होंगी। इन सभी कवियों से निवेदन है कृपया अपनी कविता ३० नवम्बर से पहले अन्यत्र प्रकाशित न करें/ करवायें

उपर्युक्त कवियों से निवेदन है कि अक्तूबर माह की अपनी कविता-प्रविष्टि को न तो अन्यत्र कहीं प्रकाशित करें ना प्रकाशनार्थ भेजें क्योंकि हम इस माह के अंत तक एक-एक करके प्रकाशित करेंगे।

इस बार बहुत से नये पाठकों ने अक्टूबर माह के उतर्राद्ध में हिन्द-युग्म पर दस्तक दी है। जिनमें अर्श, मुहम्मद अहसन, मुफ़लिस के नाम प्रमुख हैं। हमेशा की तरह दीपाली मिश्रा ने हिन्द-युग्म को खूब पढ़ा है। दीपाली अगस्त माह की यूनिपाठिका के पुरस्कार से सम्मानित भी की गई है। लेकिन इस बार हम हिन्द-युग्म को कम लेकिन संजीदा तौर पर पढ़ने वाली लक्ष्मी ढौंडियाल को यूनिपाठिका बना रहे हैं। जिनकी २-३ कविताएँ हमारे यहाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। वो अपना चित्र वगैरह हमें देने से मना करती रही हैं, इसलिए हम उनका पूरा परिचय यहाँ नहीं प्रकाशित कर पा रहे हैं।

यूनिपाठिका- लक्ष्मी ढौंडियाल

कवयित्री लक्ष्मी ढौंडियाल मूलतः गढ़वाल से हैं और हिन्दी में एम॰ए॰ किया है। वर्तमान में दिल्ली में किसी गैर सरकारी संगठन में स्टैनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं।

पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु २०० तक की पुस्तकें।

दूसरे से चौथे स्थान के पाठक के रूप में हमने क्रमशः नीति सागर, संजीव सलिल और मानविंदर भिंबर को चुना है, जिन्हें हम हिन्द-युग्म की ओर से कुछ पुस्तकें भेंट करेंगे।

हम निम्नलिखित कवियों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया और यह निवेदन करते हैं कि नवम्बर २००८ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भी अवश्य भाग लें।

यश दीप
ज़ूबी मंसूर
दीपा मिट्टीमनी
संगीता त्रिपाठी
अरूण मित्तल
रचना श्रीवास्तव
संगीता त्रिपाठी
राशिद अली
राजी कुशवाहा
अभिलाषा शर्मा
अनुपम अग्रवाल
हरकीरत कलसी
निशांत भट्ट
अलोका
दीपाली मिश्रा
प्रदीप मनोरिया
सौरभ
राजीव सारस्वत
गोपाल कृष्ण भट्ट ’आकुल’
पारूल शानू
लक्ष्मी ढौंडियाल
नीति सागर
महेश कुमार वर्मा
जितेंद्र तिवारी

हिन्दी कविता का नया पराग (परिणाम)


आज क्रांतिकारी ग़ज़लगो, हिन्दी ग़ज़ल के अग्रदूत दुष्यंत कुमार जिन्होंने ग़ज़ल को नई व्यंजना दी, तेवरों को मान दिया, व्याकरणों का अतिक्रमण करके भी जनग्राह्यता बनाये रखी, का जन्मदिवस है और कितना सुखद संयोग है कि हमने जिन्हें अगस्त माह का यूनिकवि चुना है, उन्होंने भी ग़ज़ल जैसी रचना लिख भेजी थी, जिसे हमारे निर्णायक मंडली ने प्रथम चुना है।

यूनिकवि प्रतियोगिता का आयोजन विगत् २० महीनों से हिन्दी कविता-लेखन, उसका पठन और इंटरनेट पर हिन्दी की अपनी लिपि में लिखने को प्रोत्साहित करने हेतु हो रहा है। २०वें आयोजन में ४६ कवियों ने भाग लिया। दो चरणों में निर्णय कराया गया, प्रथम चरण के ५ जजों द्वारा दिये गये अंकों के औसत के आधार पर २५ कविताओं को अंतिम दौर के जजमेंट के लिए भेजा गया, जहाँ शेष २ जजों के दिये गये अंकों और पिछले चरण के औसत के औसत के आधार पर पराग अग्रवाल की ग़ज़ल को यूनिकविता चुना गया।

पराग अग्रवाल
Parag Agrawalपेशे से आर्किटेक्ट पराग अग्रवाल इन दिनों दिल्ली में धन उगाह रहे हैं, मूलरूप से धार (म॰ प्र॰) के रहने वाले हैं। ग़ज़ल लिखना-पढ़ना पसंद करते हैं।

पुरस्कृत कविता- ग़ज़ल

मेरी रातों के परिंदे बेशजर हो गए ................
नींदें बंज़र हो गयीं ख्वाब समंदर हो गए ......................

मैंने इनसे कहा था के जागते रहना ............
ख्वाब सो के उठे तो चद्दर हो गए ...............

वक़्त ने अपने चेहरे से मुखातिब कराया उन्हें .....
अपनी नज़र से उतरे तो हमनज़र हो गए ..............

यूं अंजाम हुआ उनकी हसरत-ए-परवाज़ का ..........
आईने घर से निकले तो दर-बदर हो गए .............

आरजू-ए-हरम पूरी तो हो गयी लेकिन ................
मेरी हवाओं के दायरे मुख्तसर हो गए ............



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ३, ४॰५, ७॰५, ६॰४५, ७
औसत अंक- ५॰६९
स्थान- आठवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰५, ९, ६॰६९ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ७॰३९६६
स्थान- प्रथम


पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु १०० तक की पुस्तकें।

चूँकि यूनिकवि ने सितम्बर माह के अन्य तीन सोमवारों को भी अपनी कविता प्रकाशित करने का वचन दिया है, अतः शर्तानुसार रु १०० प्रत्येक कविता के हिसाब से रु ३०० का नग़द इनाम दिया जायेगा।

यूनिकवि पराग अग्रवाल को तत्वमीमांसक डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'येलो पिरामिड' भेंट की जायेगी तथा यूनिकवि को डॉ॰ गरिमा तिवारी से मेडिटेशन पर एक पैकेज का ऑनलाइन प्रशिक्षण पाने का अधिकार होगा (लक पैकेज़ छोड़कर)।

इस बार हम शीर्ष १५ कविताओं का प्रकाशन करेंगे ताकि पाठकों की निर्णायक दृष्टि भी सभी स्तरीय कविताओं पर पड़ सके। शीर्ष १५ के अन्य १४ कवि हैं-

वीनस केसरी
सुरेन्द्र कुमार अभिन्न
कनुप्रिया
दिव्य प्रकाश दुबे
मयंक सक्सेना
रूपम चोपड़ा (RC)
केतन कनौजिया
पंकज उपाध्याय
सुधीर सक्सेना 'सुधि'
सुजीत कुमार सुमन
देवेन्द्र कुमार मिश्रा
पुष्कर चौबे
रचना श्रीवास्तव
लक्ष्मी ढौंडियाल

उपर्युक्त लिखित नामों में से शीर्ष ९ कवियों को मसि-कागद की ओर से कुछ चुनिंदा पुस्तकें दी जायेंगी। साथ ही साथ संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी अपना काव्य संग्रह 'समर्पण' भेंट करेंगे।

उपर्युक्त कवियों से निवेदन है कि अगस्त माह की अपनी कविता-प्रविष्टि को न तो अन्यत्र कहीं प्रकाशित करें ना प्रकाशनार्थ भेजें क्योंकि हम इस माह के अंत तक एक-एक करके प्रकाशित करेंगे।

इसबार पाठकों में उस तरह की ऊर्जा नहीं दिखी जो जुलाई महीने में देखने को मिलती है। वैसे कुछ लोग कहते भी हैं कि अगस्त महीना विचारों के बदलने का समय होता है। शायद तभी कुछ नये पाठक टिप्पणी करने का विचार बना रहे होंगे वहीं कुछ पाठक न करने का। लेकिन हम तो यही निवेदन करेंगे कि नये पढ़ने और टिपियाने का मन बनायें और पुराने भी कमेंट करते रहे।

अगस्त माह के पाठकों में से वीनस केसरी और दीपाली मिश्रा ने लगभग बराबर ही पढ़ा। दीपाली के टिप्पणियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही। वीनस अगस्त के दूसरे सप्ताह से टिप्पणियाँ करते दिखे, हालाँकि वो हिन्द-युग्म को पिछले ७ महीनों से पढ़ रहे हैं। शुभ संकेत है कि वो अब पाठक और कवि दोनों रूपों में कूद पड़े हैं।

दीपाली मिश्रा

इस माह के यूनिपाठक पुरस्कार के लिए हमने चुना है पाठिका दीपाली मिश्रा को। दीपाली मिश्रा, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली हैं और वर्तमान समय में अपना परास्नातक भूगोल विषय में कर रही हैं। इन्हें साहित्य पढ़ना और संगीत सुनना बेहद पसंद है जोकि हिन्द-युग्म के द्वारा अब और बढ़ गया है। इन्होंने अपनी पहली कविता नौवीं कक्षा में लिखी थी-"हमको आगे बढ़ाना होगा" जोकि इनके छोटे भाई की कविताओं से प्रेरित थी. आगे चलकर ये प्रशाशनिक सेवा में जाना चाहती हैं।

पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु २०० तक की पुस्तकें।

यूनिपाठिका दीपाली मिश्रा को तत्वमीमांसक डॉ॰ गरिमा तिवारी की ओर से 'येलो पिरामिड' भेंट की जायेगी तथा यूनिपाठिक को डॉ॰ गरिमा तिवारी से मेडिटेशन पर एक पैकेज का ऑनलाइन प्रशिक्षण पाने का अधिकार होगा (लक पैकेज़ छोड़कर)।

निस्संदेह दूसरे स्थान के पाठक के रूप में हम चुनेंगे वीनस केसरी को, जिनकी टिप्पणियों से यह साफ झलकता है कि इन्हें साहित्य की गहरी समझ है, और जिस ऊर्जा से ये हमें पढ़ रहे हैं, हमें आशा है कि आगे भी पढ़ते रहेंगे। इन्हें हम मसि-कागद की ओर से कुछ पुस्तकें भेंट करेंगे।

हमें बहुत पढ़ने वालों में स्मार्ट इंडियन भी शामिल हैं, जो अब हिन्द-युग्म का हिस्सा भी हैं। रचना श्रीवास्तव हमें पढ़ तो रही हैं, परंतु टिप्पणियाँ रोमन में ही करती हैं, हम उनसे आग्रह करेंगे कि वो देवनागरी में टिप्पणी देना शुरू करें।

तीसरे और चौथे स्थान के पाठक के रूप में हमने रखा है नीलम मिश्रा और सुमित भारद्वाज को, जिन्हें मसि-कागद की ओर से कुछ पुस्तकें भेंट की जायेंगी।

ऊपर्युक्त सभी पाठकों को मसि-कागद पत्रिका का ताज़ा अंक भी दिया जायेगा।

हम निम्नलिखित कवियों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया और यह निवेदन करते हैं कि सितम्बर २००८ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भी अवश्य भाग लें।

चंद्रकांत सिंह
संजय सेन सागर
संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
गौतम राजरिशी
तपन शर्मा
पीयूष पण्डया
सविता दत्ता
निशा त्रिपाठी
संदेश दीक्षित
कमलप्रीत सिंह
दीपाली मिश्रा
अनुराग शर्मा
प्रदीप मानोरिया
अरुण अद्भुत
सीमा स्‍मृति
विवेक रंजन श्रीवास्तव"विनम्र"
सतीश वाघमरे
ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान'
विपिन जैन
सुमित भारद्वाज
रश्मि सिंह
भारती यादव
मनीष जैन
नीलम मिश्रा
सुमन कुमार सिंह
डॉ॰ गरिमा तिवारी
पुनीत सिन्हा
संदीप कुमार
सी॰ आर॰ राजश्री
नीलिमा
सनत जैन

डॉ० श्याम सखा श्याम को लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति का सर्वोच्च पुरस्कार


हिन्द-युग्म के वाहक और वरिष्ठ साहित्कार डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम' को पं.लखमी चंद पुरुस्कार

चंडीगढ़-19 अगस्त 2008
डॉ० श्याम सखा 'श्याम' को मुख्यमन्त्री (हरियाणा) चौ.भूपेन्द्र सिहं द्वारा हरियाणा निवास चंडीगढ़ में प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप सम्मान पत्र, स्मृतिचिह्न, अंगवस्त्र एवं रु 50,000 का चेक भेंट करते हुए तथा डॉ० श्याम की बहुमुखी प्रतिभा का जिक्र करते हुए मुख्यमन्त्री ने कहा कि डॉ० श्याम न केवल एक कुशल चिकित्सक, बहुआयामी, बहुभाषाविद् साहित्यकार हैं अपितु सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान अनुकरणीय है। चिकित्सारत्न सम्मान प्राप्त डॉ० श्याम हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी व हरयाणवी भाषा में साहित्य रचना कर रहे हैं। अब तक उनकी 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ३ उपन्यास, ३ कथा संग्रह, ६ कविता संग्रह,१ दोहा सतसई, १ गज़ल संग्रह आदि। वे हरयाणा के रोहतक नगर में निजी नर्सिंग होम चला रहे है।

पूरा हिन्द-युग्म परिवार उन्हें बधाइयाँ देता है।