फटाफट (25 नई पोस्ट):

Friday, January 28, 2011

आज दुनियाँ में क्या नहीं होता



धर्मेंद्र कुमार सिंह पिछले कुछ महीनों से ही हिंद-युग्म पर जुड़े हैं। मगर एक सक्षम कवि और गंभीर पाठक के तौर पर अपनी सार्थक और निरंतर उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इनकी पिछली रचना नवंबर माह मे शीर्ष दस मे रही थी। दिसंबर माह मे भी इनकी प्रस्त्तुत गज़ल ने सातवाँ स्थान प्राप्त किया है।


पुरस्कृत रचना: गज़ल

प्यार तुझसे हुआ नहीं होता
तो मैं इंसान सा नहीं होता

तेरी यादों की गोंद ना होती
टूटकर मैं जुड़ा नहीं होता

मंदिरों में अगर ख़ुदा मिलता
एक भी मयक़दा नहीं होता

काट दी जाती हैं झुकी डालें
पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता

ताज को छू के मौलवी तू कह
पत्थरों में ख़ुदा नहीं होता

झूठ ने फेंका है अणु बम जब से
पाँव पर सच खड़ा नहीं होता

शाम की लालिमा में ना फँसता
तो दिवाकर डुबा नहीं होता

लूट लेते हैं फूल को काँटे
आज दुनियाँ में क्या नहीं होता
_________________________________________________________
पुरस्कार -   विचार और संस्कृति की चर्चित पत्रिका समयांतर की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

11 कविताप्रेमियों का कहना है :

स्वप्निल कुमार 'आतिश' का कहना है कि -

acchi rachna ke liye badhai aapko..


काट दी जाती हैं झुकी डालें
पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता

ye sher bahut pasand aayaa...

इस्मत ज़ैदी का कहना है कि -

काट दी जाती हैं झुकी डालें
पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता

बहुत ख़ूब !हासिल ए ग़ज़ल शेर है ये

Navin C. Chaturvedi का कहना है कि -

धर्मेन्द्र भाई आप हर बार ही प्रभावित करते हैं, इस बार आपके 'ताज' और 'पेड़' वाले शे'र कलेजा चीर के निकालने वाले अल्फ़ाज़ हैं धर्मेन्द्र भाई| जय हो|

rachana का कहना है कि -

ताज को छू के मौलवी तू कह
पत्थरों में ख़ुदा नहीं होता
ye sher to hamesha yad rahega
aap ki puri gazal hi lajavab hai.
saader
rachana

प्रवीण पाण्डेय का कहना है कि -

विशेष कविता।

शारदा अरोरा का कहना है कि -

धर्मेंद्र सिंह जी बहुत अच्छा कहा
काट दी जाती हैं झुकी डालें
पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता
बेतरतीब बढ़ जाता ..फ़ैल जाता तो कद यूँ बड़ा नहीं होता ...

sada का कहना है कि -

काट दी जाती हैं झुकी डालें
पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता

वाह ...बहुत ही गहन भावों का समावेश इस रचना में ।

रंजना का कहना है कि -

सुन्दर शेर लाजवाब ग़ज़ल....

ranjana का कहना है कि -

उम्दा...सरल, सहज और अर्थपूर्ण...:)

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

ग़ज़ल / शे’र पसंद करने के लिए आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद

punita singh का कहना है कि -

dere se pdee aapkee kavitaa.par prashnsaa men deree nahee kr sakatee.bahut khub likhaa hai aapane-maniro men milataa khudaa agar ek bhee maykadaa naheen hotaa hai'gaagar men saagar bharatee hai ye aapkee kavitaa .badhaai sveekaaren.

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)