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Monday, May 02, 2011

गाँवों का रोना दिल्ली को गाना लगता है


प्रतियोगिता की दूसरी रचना एक गज़ल है जिसके रचनाकार धमेंद्र कुमार सिंह ’सज्जन’ पिछले कई माहों से यूनिप्रतियोगिता के नियमित हिस्सा रहे हैं। इनकी रचनाएं हर बार ऊँचे पायदानों पर रही हैं और इनकी पिछली रचना फ़रवरी माह मे भी पांचवें स्थान पर आयी थी। एक सुलझे हुए कवि होने के संग ही एक सजग पाठक का दायित्व निभाते हुए धर्मेंद्र जी की कविताओं के केंद्र मे सामाजिक और आर्थिक विसंगतियाँ के सवाल रहते हैं।

पुरस्कृत रचना: गज़ल


चिड़िया की जाँ लेने में इक दाना लगता है
पालन कर के देखो एक जमाना लगता है ॥१॥

अंधों की सरकार बनी तो उनका राजा भी
आँखों वाला होकर सबको काना लगता है ॥२॥

जय-जय के नारों ने अब तक कर्म किये ऐसे
हर जयकारा अब ईश्वर पर ताना लगता है ॥३॥

कुछ भी पूछो, इक सा बतलाते सब नाम-पता
तेरा कूचा मुझको पागलखाना लगता है ॥४॥

दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥५॥

कल तक झोपड़ियों के दीप बुझाने का मुजरिम
सत्ता पाने पर, अब वो परवाना लगता है ॥६॥

टूटेंगें विश्वास, कली से मत पूछो कैसा
यौवन देवों को देकर मुरझाना लगता है ॥७॥

जाँच समितियों से करवाकर कुछ ना पाओगे
उसके घर में शाम-सबेरे थाना लगता है॥८॥
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पुरस्कार: हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें।

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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

Shamit Kumar Tomar का कहना है कि -

बेहतरीन कविता है | कुछ लाइने वाकई अच्छी हैं | बाकी बेहतर की जा सकती थी |

Disha का कहना है कि -

bahut khoob............

रंजना का कहना है कि -

दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥५॥



लाजवाब....बहुत बहुत बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल...हरेक शेर मन में उतर गया...

बेहतरीन रचना....वाह !!!!

WISH UR NEXT CAR का कहना है कि -

आपने बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है ...

कविता की प्रतियोगिता कब और कहा होती है ....
लेखन की ...
मुझे बताये ..... धन्यवाद

WISH UR NEXT CAR का कहना है कि -

आपने बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है..

कविता की प्रतियोगिता कब और कहा होती है ....
लेखन की ...
मुझे बताये ..... धन्यवाद

Safarchand का कहना है कि -

बहुत अच्छे ..बहुत दिन बाद एक सार्थक कविता पढ़ने को मिली...जे हाँ.."पग घुघुरु बांध मीरा नाची..." जैसे काव्य पर फूहड परोडी बनाना , उसे पसंद करना भी इसी मानसिकता का परिचायक है...हमारा रूना उन्हें गाना लगता है...वाह बन्धु बधाई !!

Rachana का कहना है कि -

चिड़िया की जाँ लेने में इक दाना लगता है
पालन कर के देखो एक जमाना लगता है
lajavab
दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥
kya baat kahi
sabhi sher ati uttam hai
aapko bahut bahut badhai
saader
rachana

RAKESH JAJVALYA राकेश जाज्वल्य का कहना है कि -

अंधों की सरकार बनी तो उनका राजा भी
आँखों वाला होकर सबको काना लगता है ॥२॥

दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥५॥

बेहतरीन ग़ज़ल.........बधाई !!

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

शमित जी, दिशा जी, रंजना जी, रचना जी, राकेश जी एवं सतीश जी रचना पसंद करने के लिए आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद

atul का कहना है कि -

दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥५॥
कल तक झोपड़ियों के दीप बुझाने का मुजरिम
सत्ता पाने पर, अब वो परवाना लगता है ॥६॥
टूटेंगें विश्वास, कली से मत पूछो कैसा
यौवन देवों को देकर मुरझाना लगता है ॥७॥
जाँच समितियों से करवाकर कुछ ना पाओगे
उसके घर में शाम-सबेरे थाना लगता है॥८॥ Darmendra JI BAHUT KHUB.SAMAJ KI VARTMAN VESANGATI PAR KRARI CHOT HAI.AISE HE LEKHAN KI JARURAT HAI.

vivekrajasthani का कहना है कि -

बेहतरीन कविता
दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥
वाह !!!!

vandana का कहना है कि -

चिड़िया की जाँ लेने में इक दाना लगता है
पालन कर के देखो एक जमाना लगता है ॥१॥

bahut badhiya

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

विवेक राजस्थानी जी और वंदना जी रचना को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Chintan Arora का कहना है कि -

bohot bohot badiya

Chintan Arora का कहना है कि -

bohot bohot badiya

Chintan Arora का कहना है कि -

bohot bohot badiya

Linda Rose का कहना है कि -

Thanks for sharing the information. It is very useful for my future. keep sharing
Run 3

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