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Wednesday, February 09, 2011

मानसिकता का आरक्षण



प्रतियोगिता की तेरहवीं कविता चारू मिश्रा 'चंचल' की है। लखीमपुर (उ प्र) की रहने वाली चारु ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की है। इन दिनों स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता मे व्यस्त हैं। 'परिंदे', 'वाक', 'परिकथा' और 'गुफ्तगू' आदि पत्रिकाओं में कई कवितायेँ प्रकाशित हो चुकी है।  हिंद-युग्म पर यह उनकी पहली रचना है।

कविता: मानसिकता का आरक्षण 

मुस्कराता है वह
और हम भी
खिलखिलाते है
उसके साथ-साथ
तब
जब
उसकी हरकतें करती है
हमारा मनोरंजन।
 बावजूद इसके
आज तक
हमने कभी भी
न तो उसे अपने हाथों से छुआ
और न ही कभी उसे
अपनी मानसिकता में ''अरक्षित'' घरौंदे में जगह दी !

इसलिए
हमेशा ही वह
आता है
जाता है
लेकिन बस
चौखट तक
बहुत कुछ-
सीख चुका है वह
शायद
अब तक

तभी तो
आगे कदम बढ़ाने से डरता है
और हमेशा ही कनखियों से
दरवाजे पर खड़ा खड़ा
टुकुर-टुकुर निहारता है
उन रंगीन दुनियावी लफ्जों को
जो अक्सर ही उछलते है
उसके  सामने
पूरे कमरे में।

तब
जब
हम पढ़ रहे होते है
अपने टीचर से
किताबी पहाडा
तब वह
पढ़ रहा होता है
जिंदगी की असली पढ़ाई !
(सुना है नवनियुक्त झाड़ू वाले का छोकरा है वह)


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5 कविताप्रेमियों का कहना है :

प्रवीण पाण्डेय का कहना है कि -

जीवन जीना ही उसका पहाड़ा है और वही उसका उत्तर भी।

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो का कहना है कि -

bahut barhiya.... shubhkaamnaayen...

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

सुंदर रचना, बधाई

रंजना का कहना है कि -

जीवंत चित्र उकेरा आपने...

बहुत प्रभावशाली..

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर का कहना है कि -

एक निवेदन---------------------

मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है।

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