फटाफट (25 नई पोस्ट):

Tuesday, August 10, 2010

कमाता है हमेशा नेकियाँ कुछ इस तरह से वो


हिन्द-युग्म के पाठक योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' से परिचित हो चुके हैं। पिछले महीने इनकी एक कविता प्रकाशित हुई थी। जुलाई माह की प्रतियोगिता में इनकी एक कविता ने तीसरा स्थान बनाया है।

पुरस्कृत कविता- ग़ज़ल


बताता है हुनर हर शख़्स को वह दस्तकारी का
ज़रूरतमंद की इस शक्ल में इमदाद करता है

कमाता है हमेशा नेकियाँ कुछ इस तरह से वो
परिन्दों को कफ़स की क़ैद से आज़ाद करता है

कहा उसने कभी वो मतलबी हो ही नहीं सकता
मगर तकलीफ़ में ही क्यों ख़ुदा को याद करता है

कभी-भी कामयाबी ‘व्योम’ उसको मिल नहीं सकती
हक़ीकत जानकर भी वक़्त जो बरबाद करता है

पुरस्कार: विचार और संस्कृति की पत्रिका ’समयांतर’ की एक वर्ष की निःशुल्क सदस्यता।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

8 कविताप्रेमियों का कहना है :

sumit का कहना है कि -

gazal bahut he acchi lagi

निर्मला कपिला का कहना है कि -

गज़ल छोटी है मगर अच्छी लगी। व्योम जी को बधाई।

manu का कहना है कि -

kamaal kiyaa hia aa;ne...


bahut kamaaal..

uc shukla का कहना है कि -

Kaafi achchhi gazal hai!

M VERMA का कहना है कि -

गर तकलीफ़ में ही क्यों ख़ुदा को याद करता है
बहुत खूबसूरत

sada का कहना है कि -

कमाता है हमेशा नेकियाँ कुछ इस तरह से वो
परिन्दों को कफ़स की क़ैद से आज़ाद करता है ।

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

rachana का कहना है कि -

कमाता है हमेशा नेकियाँ कुछ इस तरह से वो
परिन्दों को कफ़स की क़ैद से आज़ाद करता है
baat kya khoob hai ye
sher bahut sunder hai
saader
rachana

ranjana का कहना है कि -

lines choti zaroor hai lekin bahut damdaar..:)

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)