फटाफट (25 नई पोस्ट):

Monday, January 28, 2008

तीसरी संगीतबद्ध ग़ज़ल (हिन्द-युग्म का दसवाँ संगीतबद्ध गीत)


हिन्द-युग्म की पूरी टीम नई-नई आवाज़ों, नये-नये संगीतकारों को इस मंच से जोड़ने में लगी गुई है। हमने अब तक ९ नई आवाज़ों और ७ संगीतकारों को संगीतबद्धों गीतों के माध्यम से तराश भी लिया है। पिछले तीन महीने में हिन्द-युग्म के संगीत-क्षेत्र में हुए प्रयास गीतों के रूप में दृष्टिगोचर होते रहे हैं। अब तक आपलोगों ने ९ संगीतबद्धों को सुना। आपने सराहा भी और मार्गदर्शन भी दिया। हमें इस बात की खुशी है कि हम हर बार पिछली बार से बेहतर पेशकश ला पा रहे हैं। पिछले सप्ताह आपने आभा मिश्रा की आवाज़ में उन्हीं के द्वारा संगीतबद्ध निखिल आनंद गिरि की ग़ज़ल 'इन दिनों' को सुना। इस बार फिर आभा मिश्रा की ही आवाज़ और उन्हीं के द्वारा स्वरबद्ध निखिल आनंद गिरि की लिखी ग़ज़ल ' सुबह जीता हूँ' को हम आपकी नज़र कर रहे हैं।

हमें आपकी प्रतिक्रियाओं का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा, ताकि हम अपने प्रयासों को सही दिशा दे सकें।

(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)





यदि आप इस गीत को उपर्युक्त प्लेयर से नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)

VBR MP3


64Kbps MP3


Ogg Vorbis




ग़ज़ल के शे'र-



युग्म के अब तक के स्वरबद्ध गीत आप यहाँ सुन सकते हैं -
सुबह की ताज़गी
वो नर्म सी...
ये ज़रूरी नही
तू है दिल के पास
एक झलक
बात ये क्या है जो
मुझे दर्द दे
सम्मोहन
इन दिनों

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

12 कविताप्रेमियों का कहना है :

tanha kavi का कहना है कि -

इस सुमधुर गज़ल के लिए निखिल भाई एवं आभा जी को बहुत-बहुत बधाई ।

-विश्व दीपक 'तन्हा'

रंजू का कहना है कि -

अच्छी लगी यह १० वी गजल भी :)

आलोक शंकर का कहना है कि -

Alaap me bahut sudhar kiya jaa sakta tha, high pitch par singer ki aawaj limit hoti si lagti hai, ek do bar retake kar ke isko sudhar sakte the.
aabha ji ki aawaz bahut achchi hai.
Dhun bhi suitable hai.
good work

Anupama Chauhan का कहना है कि -

awaaz bahut dumdaar hai...gazal ko sundar bana diya....jab aap aalap lagaate ho to use jaldi khatam kar dete ho...kisi bhi shabd ko sahi dhang se sur dene ke liye use kheechna padta hai....taaki ek lines se doosri line me jaane ka antar na pata pade...bas is pause par thoda kaam kariye......warna aapki awaaz bahut bahut pyaari hai.

Alpana Verma का कहना है कि -

अच्छी ग़ज़ल है .
आभा जी आप की आवाज मधुर है
मगर मुझे इस से पहली वाली ग़ज़ल में
आप की गायकी ज्यादा अच्छी लगी.

sahil का कहना है कि -

निखिल भाई और आभा जी इस मीठी प्रस्तुति के लिए बधाई कबूल करें.
आलोक सिंह "साहिल"

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बढिया प्रयास.. आवाज और बोल मय धुन के पसन्द आये..

और भी अच्छा हो सकता है.. सुधार की गुंजाइश तो अंत तक रहती है..

shobha का कहना है कि -

सराहनीय प्रयास है । आवाज़ मधुर और मंत्र-मुग्ध करने वाली है । बधाई

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का कहना है कि -

बहुत सुन्दर ....आभा

निखिल ....

बहुत बहुत स्नेह और शुभाशीष

Anonymous का कहना है कि -

bahut hi madhur aawaz hai. abhaji aapki awaz sarahniya hai. nikhil ji apki gazal bhi utni hi sarahniya hai.

melwin का कहना है कि -

abha ji aapki awaz bahut hi madhur hai. aapki awaz mein dono hi ghazal pyari lagti hai.nikhil ji gane ke bol bhi bahut aache hai

riya का कहना है कि -

awaz mein ek jadoo hai main hamesha is gane ko sunti hu. mujhe ye ghazal pahle wali se zyada aachi lagi. dhun bhi bahut hi aachi hai.

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)