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Monday, January 28, 2008

आएगा लौट कर वो


समझो तलाशे इत्र है मछली बाज़ार में
मिलती नहीं जहाँ में वफ़ा यार प्यार में

दरिया के संग बह के समंदर में गिरेगा
परबत चढ़ेगा गर तू बहा उलटी धार में

उस जायके को सारी उम्र ढ़ूंढ़ते रहे
वो जायका जो था कभी माँ के अचार में

उसने है बड़े प्यार से दोनों को बनाया
तुमने ही डाला यार फर्क गुल में खार में

कालिख सी पोतती हैं नगर भर की चिमनियाँ
चेहरों पे अब न रंग बचा इस दयार में

बरसों बिताये हमने यही सोच सोच "नीरज"
आएगा लौट कर वो यकीनन बहार में

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

मीत का कहना है कि -

सर जी अकीदत क़ुबूल हो. और भी हैं, लेकिन इस शेर पे कुर्बान :
बरसों बिताये हमने यही सोच सोच "नीरज"
आएगा लौट कर वो यकीनन बहार में
कैसे करते हैं ऐसा कमाल आप ?

seema gupta का कहना है कि -

समझो तलाशे इत्र है मछली बाज़ार में
मिलती नहीं जहाँ में वफ़ा यार प्यार में
" बहुत खूब शेर बन पडे हैं , अच्छी लगी आपकी रचना"
Regards

mehek का कहना है कि -

उसने है बड़े प्यार से दोनों को बनाया
तुमने ही डाला यार फर्क गुल में खार में
bahut khub,halaki sare sher bahut sundar bane hai ye bahut pasand aaya.badhai..

Alpana Verma का कहना है कि -
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Alpana Verma का कहना है कि -

ग़ज़ल में ख्याल अच्छे हैं.

रंजू का कहना है कि -

दरिया के संग बह के समंदर में गिरेगा
परबत चढ़ेगा गर तू बहा उलटी धार में

बहुत अच्छा लिखा है आपने नीरज जी !!

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

नीरज जी,

बहुत ही उम्दा शेर हैं, सुन्दर रचना
बहुत बहुत बधाई

sahil का कहना है कि -

गोस्वामी जी, एक एक शेर लाजवाब, मजा आ गया.
आलोक सिंह "साहिल"

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

नीरज जी
बहुत ही खूबसूरत ख्यालों को पिरो कर आपने यह रचना लिखी है.. मुझे बेहद पसन्द आई

बधाई

Gita pandit का कहना है कि -

उम्दा शेर...
उम्दा गज़ल..

बहुत बहुत बधाई

Ranjana का कहना है कि -

bahut sundar sir!!!!!!!!!!

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