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बनमानुस...


एक दुनिया है समझदार लोगों की,
होशियार लोगों की,
खूब होशियार.....
वो एक दिन शिकार पर आए
और हमें जानवर समझ लिया...
पहले उन्होंने हमें मारा,
खूब मारा,
फिर ज़बान पर कोयला रख दिया,
खूब गरम...
एक बीवी थी जिसके पास शरीर था,
उन्होंने शरीर को नोंचा,
खूब नोचा...
जब तक हांफकर ढेर नहीं हो गए,
हमारे घर के दालानों में....

हमारी बीवियों ने मारे शरम के,
नज़र तक नहीं मिलाई हमसे
उल्टा उन्हीं के मुंह पर छींटे दिए,
कि वो होश में आएं
और अपने-अपने घर जाएं...
ताकि पक सके रोटियां
खूब रोटियां...

वो होश में आए तो,
जो जी चाहा किया...
हमे फिर मारा,
उन्हें फिर नोंचा...
हमारी रोटियां उछाल दी ऊंचे आकाश में....
खूब ऊंचा....
वो हंसते रहे हमारी मजबूरी पर,
खूब हंसे...


भूख से बिलबिला उठे हम....
जलता कोयला निकल गया मुंह से...
जंगल चीख उठा हमारी हूक से....
पहाड़ कांप उठे हमारी सिहरन से....
नदियों में आ गया उफान,
खूब उफान....

उनके हाथ में हमारी रोटियां थीं,
उनकी गोद में हमारी मजबूर बीवियां थीं...
उनकी हंसी में हमारी चीख थी, भूख थी....
हमने पास में पड़ा डंडा उठाया
और उन्हें हकार दिया,
अपने दालानों से....
वो नहीं माने,
तो मार दिया.....

जंगल से बाहर की दुनिया
यही समझती रही,
हम आदमखोर हैं, बनमानुस...
जंगली कहीं के....
वाह रे समझदार...
वाह री सरकार.....

निखिल आनंद गिरि

चित्र और काव्य : फिर एक साथ


जैसा कि आप लोग जानते हैं कि हिन्दयुग्म ने काव्यपल्लवन में पिछले अंक से एक नई शुरुआत की है, जिसके माध्यम से चित्र पर कविता रचने का कार्य सम्पादित किया जा रहा है। आप लोगों का स्नेह व सहयोग मिला जिसकी वजह से हम इस बार भी चित्र के आधार पर ही काव्य-पल्लवन आयोजित कर रहे हैं। इस बार भी चित्र मनुज मेहता के द्वारा ही खींचा गया है। आपको करना केवल इतना है कि इस चित्र को ध्यान में रखते हुए अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना हमें kavyapallavan@gmail.com पर २२ दिसम्बर २००८ तक भेज देना है।

Kavyapallavan

हिन्द-युग्म का हमेशा से ही यही उद्देश्य रहा है कि पाठक हमारे हर प्रयास में अधिक से अधिक भागीदार बने। इसीलिये हम चाहते हैं कि नये वर्ष के पहले काव्य-पल्लवन के लिये आप चित्र भेजें। आप लोगों में से भेजे गये चित्रों में से ही किसी एक पर जनवरी माह का काव्यपल्लवन आयोजित किया जायेगा। कृपया ध्यान रहे कि आपकी तस्वीर अथवा स्केच कहीं भी प्रकाशित न हुए हों। आप अपने चित्र ३० दिसम्बर २००८ तक kavyapallavan@gmail.com पर भेजें।

आपको हमारा यह प्रयास कैसा लग रहा है, कृपया टिप्पणी अवश्य करें। आपके टिप्पणी व विचार ही हममें हौंसला पैदा करते हैं।