फटाफट (25 नई पोस्ट):

कृपया निम्नलिखित लिंक देखें- Please see the following links

साढे साती


मुझे डर था बस इसी बात का,
कि ये हश्र न हो मुलाकात का।

तूने मन को मार के क्या पाया,
बुझा ध्रुवतारा तेरी रात का।

हँसी अब जो काटती है तुझको,
है ये असर नेक ख्यालात का।

वो जो किस्मत बाँटते हैं उनके,
शनि घर में है साढे सात का।

जिसे कमतर आँकते थे सारे,
वो था अंतर शह और मात का।

-विश्व दीपक