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आतंक



सामने खड़ी अनुज की मौत !
वह भी कुछ कायर लोगों के हाथों
जो मांस नोचना जानते हैं
मानवता उन्हे कैसे समझाई जाय !
मेरा भाई ! नाज़ है उस पर !
स्वप्न और दूरद्रष्टि
उसके प्रोजेक्ट की लाल पीली रेखा बन कर
घूमते हैं उसके सिर में
बहुत प्यारा है वह
उसका सिर भी न !
किसी लेपटोप की भाँति
जिसमें ऐसी ऐसी नाड़ियां हैं
जिनकी छाया मात्र है
उस होटल ताज की सुन्दरता
जहाँ भाई, मेरा भाई ठहरा है
मिलने की गुदगुदी है इस मन की झोपड़ी में ।

फोन करता है वह मुझे
तो यह क्या? धम !धम ! गोलियों की आवाजें?
हाय ! बचाओ कोई उसे ! बचाओ !!
होटल मेनेजर की चेतावनी
उसके इंटरकोम से
पड़ रही मेरे भी कानों में
“कुछ प्रेतात्मायें घुस आई हैं होटल में
बिना भाड़ा दिये
मचल रही हैं तुम्हे मरघट ले जाने
बिना कसूर !
सुरक्षा की व्यवस्था गुड़गोबर !
अगला आदेश मिलने तक कछुये की तरह
अपनी इंद्रियों को ढंक लो कवर में
कमरे में लॉक कर लो अपने आपको
बाहर गीदड़ हो गये हैं आदमखोर
रक्तपान के लिये
झूम रहे चहुँओर” ।

बरामदे में शायद
राक्षस निगल रहे हड्डियों के टुकड़े
क्रुर पंजों से फैंक रहे हैं धधकती आग
क्षितिज पर फैली श्यामलता
न जाने यह कैसा बवंडर होगा
छटपटाती होगी उसकी नन्ही सी जान
निकल भागने के लिये
चंगुल से
लो खून से सन गई उसकी लाल रेखायें
और भयग्रस्त हुई पीली रेखायें
क्या सम्भाले? लेपटाप? दो कोड़ी का
पाकिट या महत्वपूर्ण कागज़ ?
जब कि दाग रहे वे परलोक के पासपोर्ट
और लाशें जमीन पर !
मेरा भाई ! कहाँ दफन करूँ इन आँसुओं को
चक्रव्यूह में फँसा अभिमन्यू
कैसे छुड़ाऊँ ?
चिंघाड़ रहा हूँ दर्द से
कहने को हिम्मत दे रहा उसे
पर खुद ही डरा हुआ
ढांढस क्या दूं ?
खुद ही मरा हुआ
छुप कर आजा ! इन्टरनेट के तारों में
रातभर फोन करता हूँ
बार बार
दिल में धकधक..
वहाँ पर वह मौजूद है
या…..

(26/11/०8 को हुई एक घटना पर आधारित )

-हरिहर झा


कदम मिलाकर चलना होगा...




दौड़ता हिन्द, दौड़ता हिन्दयुग्म (रूपम चौपड़ा)- तस्वीर सौजन्य टाइम्स ऑफ इंडिया-08-12-2008
कदम मिलाकर चलना होगा
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भाग्य राष्ट्र का अपने दम पर
हमको आज बदलना होगा..
कदम मिलाकर चलना होगा..
कदम मिलाकर चलना होगा..

और नहीं बन्दूक चलेगी
गैरों के कन्धे पर रखकर
परिवर्तन के हेतु स्वमं ही
उठकर हमको चलना होगा...
भाग्य राष्ट्र का अपने दम पर
हमको आज बदलना होगा..
कदम मिलाकर चलना होगा..

कंटक हो राहों में कितने
लेकिन संग संग कदम बढ़ाकर
फौलादी कर आज इरादे
पैरों तले कुचलना होगा..
भाग्य राष्ट्र का अपने दम पर
हमको आज बदलना होगा..
कदम मिलाकर चलना होगा..

हमें गिराने की साजिश में
शातिर कितने लगे हुए हैं
कदम कदम पर चाल समझकर
लेकर ढ़ाल सम्भलना होगा
भाग्य राष्ट्र का अपने दम पर
हमको आज बदलना होगा..
कदम मिलाकर चलना होगा..

08-12-08

शंखनाद...


उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....
घर में आ हमको ललकारा
बूढ़े बच्चे सबको मारा
कब तक ये सब सहन करेंगे
कब तक बैठे बैठ मरेंगे
आखिर कुछ तो करना होगा
ले बन्दूक उतरना होगा
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....

मुम्बई बन गयी जलियाँवाला
लोथ लोथ से घर भर डाला
नाम पाक नापाक इरादे
अब तक तोड़े कितने वादे
अनुनय से अब काम ना होगा
बिना उठे आराम ना होगा
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....

घुस ना पाये कोई शातिर
स्वाभिमान स्व-राष्ट्र के खातिर
व्यवसाय या रण का खेत हो
सठे साठ्यम समाचरेत हो
चैन अमन फिर लाना होगा
हर आतंक मिटाना होगा
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....

पानी नही रगों मे अपनी
बैठ के माला अब नहीं जपनी
मात भारती की औलादो
अपना खून आज खौलादो
आखों में अब आग उतारो
पकड़ पकड़ कर इनकों मारो
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....

अगर रहें जो यूँ ही शांत हम
खो देंगें एक एक प्रांत हम
आज हमारी ही जमीन में
सांप घुसे हैं आस्तीन में
और ना आगे इंतजार हो
फन पर इनके तीक्ष्ण वार हो
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....

पक्का कर लो आज इरादा
वक्त नहीं अब देना ज्यादा
सपथ उठाओं आओ मिलकर
अपनी रक्षा अपने बल पर
कहीं चोट अब नहीं खायेंगे
ईंट से पत्थर टकारायेंगे
उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....
उठो देश के वीर जवानो उठो... उठो....
सही वक्त है अब पहिचानो उठो... उठो....


04-12-2008