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Wednesday, April 06, 2011

गज़ल: मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे



किसी जगह के लिए इंतख़ाब रहने दे
मैं एक सवाल हूँ मेरा जवाब रहने दे।


मैं जानता हूँ तू लिबास पसंद है लेकिन
मैं बेनक़ाब सही, बेनक़ाब रहने दे।


मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।


तमाम उम्र गुनहगार जिया हूँ या रब
मेरे हक़ में मगर एक सवाब रहने दे।


तमाम शहर मेरे ख़्वाब तले सोया है
मत बेदार कर, तू ज़ेर-ए-ख़्वाब रहने दे।



रचनाकार: वसीम अकरम (नवंबर माह के यूनिकवि)

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14 कविताप्रेमियों का कहना है :

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो का कहना है कि -

मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।
तमाम शहर मेरे ख़्वाब तले सोया है
मत बेदार कर, तू ज़ेर-ए-ख़्वाब रहने दे।


kya khoob.... bahut barhiya......

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

खूबसूरत ग़ज़ल, बधाई

आलोक उपाध्याय का कहना है कि -

मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।

Shandaar .....
Shandaar .....
Bahut hi Shandaar ..... sher ...


Badhayi ho .....

Alok Upadhyay "Nazar"

rachana का कहना है कि -

मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।
BAHUT KHUB

ACHCHHI GAZAL KE LIYE BADHAI
RACHANA

विवेक 'अंजान' का कहना है कि -

तमाम उम्र गुनहगार जिया हूँ या रब
मेरे हक़ में मगर एक सवाब रहने दे।
माफ करना वसीम भाई मेरी नज़रों में गुनाह और सवाब में गुनाह 'बड़ा' होता है. आपने गुनाहों का देवता नहीं पढ़ी क्या.
बधाई हर अल्फाज़ के लिए.....हर शेर के लिए....हर गुनाह के लिए......हर सवाब के लिए.....और अंत में एक सुन्दर गज़ल के लिए.

ana का कहना है कि -

bahut khub...........bahut sundar

अभिषेक पाटनी का कहना है कि -

मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।


bahut khoob...umda.....behtareen...lajawab...

suvarna का कहना है कि -

sabhee sher bahut achchhe hain. badhaiyan

Navin C. Chaturvedi का कहना है कि -

ख़यालों का बेहतरीन शब्दांकन
रचनाकर को बधाई

ashish का कहना है कि -

मैं बाग़ी नहीं पर उसके समझने के लिए
मेरी आंखों मे जरा इंक़लाब रहने दे।
तमाम शहर मेरे ख़्वाब तले सोया है
मत बेदार कर, तू ज़ेर-ए-ख़्वाब रहने दे।


bahut hi behtareen

vipul का कहना है कि -

bahut shaandaar.. mazaa aa gaya,,

DHARMENDRA MANNU का कहना है कि -

umda ghazal sabhi sher behtareen... badhaai...

vandana का कहना है कि -

मैं जानता हूँ तू लिबास पसंद है लेकिन
मैं बेनक़ाब सही, बेनक़ाब रहने दे।

bahut badhiya gazal

Hindi Sahitya का कहना है कि -

badhiya gazal hai

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