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Monday, April 12, 2010

हरी दूब सा एक रिश्ता


भावना सक्सेना की दो कविताएँ हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हो चुकी है। आज हम इन्हीं की एक नई रचना प्रकाशित कर रहे हैं, जिसने मार्च माह की प्रतियोगिता में पाँचवाँ स्थान बनाया है।

पुरस्कृत कविता

हाथ से फोड़े
अमरूद के स्वाद-सा
जुबाँ पर
संदूक के कोने में
छिपी चवन्नी-सा भी है,
डिबिया में बंद
जुगनू-सा चमकता
जेब में कंचे-सा
खनकता भी है।
पहली फुहार पे उठी
सौंधी महक-सा
तृप्त बालक की आँख-सा
दमकता भी है
सघन नीम-सा
ठंडाता जेठ में
माघ में बरोसे-सा
गरमाता भी है
बंद मुट्ठी-सा
करीब है दिल के
छुटपन की शरारत-सा
मगर, खटकता भी है
कहें क्या
क्या नाम दें
क्या पुकारें इसको
ये जो रिश्ता
उग आया
हरी दूब-सा है।


पुरस्कार- विचार और संस्कृति की मासिक पत्रिका 'समयांतर' की ओर से पुस्तक/पुस्तकें।

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

M VERMA का कहना है कि -

ये जो रिश्ता
उग आया
हरी दूब-सा है।

हरी दूब-सा रिश्ता उर्वर जमीन पर ही उगता है

सुमन'मीत' का कहना है कि -

कई पहलू समेटे रिश्ते का आंकलन

Mrs. Asha Joglekar का कहना है कि -

इस हरी दूब से रिश्ते का कितना मीठा वर्णन ।

manu का कहना है कि -

अमरुद..
चवन्नी ..कंचे...जुगनू..
क्या बात है...

शानदार...

manu का कहना है कि -

अमरुद..
चवन्नी ..कंचे...जुगनू..
क्या बात है...

शानदार...

विमल कुमार हेडा का कहना है कि -

रिश्ते के सुन्दर वर्णन के लिए बहुत बहुत, बधाई एवं धन्यवाद
विमल कुमार हेडा

pukhraaj का कहना है कि -

ye kaisa rishta hai jo chamakta bhi hai khanakta bhi hai , jo damakta bhi hai aur khatakta bhi hai ... anokha hai ye rishta magar tazgi liye hai ye rishta , doob ki komal , taazi ghaas sa ...

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

हरी दूब सा रिश्ता ...भावना जी बहुत सुंदर भाव...रचना बढ़िया लगी...बधाई

bhawna का कहना है कि -

सभी को बहुत बहुत धन्यवाद।

rachana का कहना है कि -

कहें क्या
क्या नाम दें
क्या पुकारें इसको
ये जो रिश्ता
उग आया
हरी दूब-सा है।
sunder ati sunder
rachana

Anonymous का कहना है कि -

kya massomiyat, kya taazgi.......WAH!

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