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Saturday, April 17, 2010

देर तलक क्यूँ रोते हैं शजर


तुम
किसी पानी की लहर से आये
मेरा रोम रोम
अपने नूर से भिगो गए
मैं तन्हा, अब तलक
तेरी आमद को महसूस कर रही हूँ
जबकि तुम कब के जा चुके
दर्द बूँद बूँद कर के टूटता है
तो एहसास होता है
बारिश के जाने के बाद
देर तलक
क्यूँ रोते हैं शजर!!

कवयित्री- दीपाली आब

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7 कविताप्रेमियों का कहना है :

M VERMA का कहना है कि -

बारिश के जाने के बाद
देर तलक
क्यूँ रोते हैं शजर!!
खूबसूरत एहसास और भाव

विमल कुमार हेडा का कहना है कि -

दर्द बूँद बूँद कर के टूटता है
तो एहसास होता है
बारिश के जाने के बाद
देर तलक
क्यूँ रोते हैं शजर!!

गहरे और सुंदर भाव, दीपाली जी को बहुत बहुत बधाई धन्यवाद
विमल कुमार हेडा

sumita का कहना है कि -

शीर्षक को चिरितार्थ करती सुन्दर रचना के लिए दीपाली जी बहुत-बहुत बधाई!!!

Kapil का कहना है कि -

khoobsoorat :)

Guftugu का कहना है कि -

Kam shabdo me ek jaandaar kavita bahut acchi lagi.mubarakbaad.smita mishra

अपूर्व का कहना है कि -

बारिश के जाने के बाद
देर तलक
क्यूँ रोते हैं शजर!!

एक दिलकश और बहुत कुछ कहता सा बिम्ब..और तभी शायद शजर को स्नेह से छू लेने भर से आँसुओं की बरसात सी हो जाती है हमारे ऊपर..

Deepali Sangwan का कहना है कि -

@all
Aap sabhi ka tah e dil se shukriya

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