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Friday, September 18, 2009

मेरे प्रियतम पास हैं मेरे


हर घर उल्लास बहुत है
ये गम का उपहास बहुत है

उस पर भी यकीन है पूरा
खुद पर भी विश्वास बहुत है

यूँ आँखों से कहा लबों ने
दिल में अब भी प्यास बहुत है

मेरे प्रियतम पास हैं मेरे
हर लम्हा अब ख़ास बहुत है

मिलना जुलना चाहे ना हो
अपनों का अहसास बहुत है

इस कड़वाहट भरे दौर में
ढूंढो अभी मिठास बहुत है

पंख ज़रा फैलाओ "अद्भुत"
उड़ने को आकाश बहुत है

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

वाणी गीत का कहना है कि -

मेरे प्रियतम पास हैं मेरे
हर लम्हा अब ख़ास बहुत है
खास लम्हे हमेशा खास ही बने रहे
अच्छी रचना ...शुभकामनायें ..!!

neelam का कहना है कि -

पंख ज़रा फैलाओ "अद्भुत"
उड़ने को आकाश बहुत है

बेहतरीन

Devendra का कहना है कि -

इस कड़वाहट भरे दौर में
ढूंढो अभी मिठास बहुत है

पंख जरा फैलाओ अद्भुत
उड़ने को आकाश बहुत है।
-वाह! क्या बात है।

Anonymous का कहना है कि -

मिलना जुलना चाहे ना हो
अपनों का अहसास बहुत है

अच्छी पंक्तियों के लिए बहुत बहुत बधाई, धन्यवाद

विमल कुमार हेडा

Manju Gupta का कहना है कि -

विरह में दग्ध नायिका का सकारात्मक पक्ष अद्भुत परिकल्पना के साथ दर्शाया है . बधाई .

Sumita का कहना है कि -

आत्मविश्वास से लबरेज रचना के लिए बहुत_बहुत बधाई...

Anonymous का कहना है कि -

manju .. lagta hai aap badi hi sheeghrata me rahti hain..plzzz ye samjhe ki comment dena utna jaroori nahi hai jitna sakaratmak comment dena jinse lekhak ya kavi laahanvit ho ..

shanno का कहना है कि -

बेहतरीन ग़ज़ल के लिये बधाई!

तपन शर्मा का कहना है कि -

हर घर उल्लास बहुत है
ये गम का उपहास बहुत है...

स कड़वाहट भरे दौर में
ढूंढो अभी मिठास बहुत है

पंख जरा फैलाओ अद्भुत
उड़ने को आकाश बहुत है।

ये तीन शे’र खास पसंद आये...

SUNIL DOGRA जालि‍म का कहना है कि -

पंख जरा फैलाओ अद्भुत
उड़ने को आकाश बहुत है

सचमुच कुछ तो दम शेयरों में है.. हाँ ऊँची उड़ान अभी बाकी है!

Anonymous का कहना है कि -

पंख जरा फैलाओ
उडने को आकाश बहुत है।
अरुण जी काफी गहराई मेँ डुबने के बाद ही ऐसी पंक्तियाँ अंर्तमन से निकलती है। इन पंक्तियोँ के लिए काफी शुभकामनाएँ।

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