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Thursday, July 23, 2009

काश यूँ भी हो


शीर्ष 10 कविताओं से आगे बढ़ते हैं। 11वें स्थान की कविता बहुत छोटी सी कविता है, जिसे जजों ने बहुत पसंद किया। इसके रचनाकार अनिरूद्ध शर्मा मध्यप्रदेश के एक कस्बे बागली के रहने वाले हैं। इंदौर से एमसीए की पढ़ाई करने के बाद पिछले 4 सालों से पुणे में बतौर सॉफ्टवेर इंजिनियर कार्यरत हैं। इनके परिवार में साहित्य का कोई माहौल नहीं था लेकिन बचपन में चम्पक पढ़ते-पढ़ते पढने का ऐसा शौक लगा कि वो जुनून बन गया। फिर इन्होंने सभी तरह की किताबें पढीं- उपन्यास, कहानियां, जीवनी, दर्शन, कविता, गज़लें आदि। पढ़ते-पढ़ते कब इनके अन्दर का कवि जाग गया इन्हें पता ही नहीं चला। शायरों में ग़ालिब इनके लिए पूजनीय हैं और आज के वक़्त में गुलज़ार। हालांकि 100 से ज्यादा गज़लें मैंने लिखी हुई हैं, लेकिन अब तक किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिये थे। इन्होंने पहली बार प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टी भेजी थ। कविता के अलावा हिंद युग्म के लिए लेख भी लिखते हैं जिन्हें बैठक पर पढ़ा जा सकता है।

रचना- काश

कई बार यूँ भी हुआ है कि
बेतरतीब से लफ्जों को समेट कर
तुम्हारे पहलू में रख दिया है मैंने
और पाई है
एक मुक़म्मल नज़्म
काश यूँ भी हो कि
एक बार
खुद को समेटकर
रख दूँ तुम्हारे पहलू में...


प्रथम चरण मिला स्थान- चौथा


द्वितीय चरण मिला स्थान- ग्यारहवाँ

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15 कविताप्रेमियों का कहना है :

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

kam shabd me bade sundar bhav..
mohak kavita.
badhayi!!!

Disha का कहना है कि -

भाव दर्शाती हुई सुन्दर रचना है.

Nirmla Kapila का कहना है कि -

अनिरुध जी ने तो गागर मे सागर भर दिया है बहुत सुन्दरता से भावनाओं को शब्द दिये है जो खुद ब खुद ज़िन्दगी की सुन्दरता को ब्यान कर रहे हैं कई बार पढ कर इस की गहराई को जाना मुझे तो ये कविता बहुत बहुत अच्छी लगी अनिरुध जी को आशीर्वाद आपका आभार्

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत बहुत बहुत खूबसूरत नज़्म. जज़्बात बहुत अच्छे हैं. काश यह नज़्म मैंने लिखी होती.

कई बार यूँ भी हुआ है कि
बेतरतीब से लफ्जों को समेट कर
तुम्हारे पहलू में रख दिया है मैंने
और पाई है
एक मुक़म्मल नज़्म
काश यूँ भी हो कि
एक बार
खुद को समेटकर
रख दूँ तुम्हारे पहलू में...

mohammad ahsan का कहना है कि -

waah, kya romance hai!!
alfaaz ka umda est'emal aur badi kifaayat shuari se.

AlbelaKhatri.com का कहना है कि -

mukammal kavita
umda kavita
kavita me saundrya aur shringaar k santulan ko satat pravaahmaan karti is kavita k liye
badhaai !

Manju Gupta का कहना है कि -

छोटी ,सुंदर रचना के लिए बधाई .

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ.
कमाल लिखा है ..!!!

manu का कहना है कि -

हाय रे.........
जीयो...
क्या बोल गए यार........!!!!!!!!!

Divya Prakash का कहना है कि -

बेहद खूबसूरत ....
पहली नज़र में बिलकुल गुलज़ार की नज़्म लगी थी मुझे ...
बहुत अच्छा लिखा है आपने ...बधाई
सादर
दिव्य प्रकाश दुबे

mahesh का कहना है कि -

A poem comes from Heart....this is that....

Excellent hai bhai...

sada का कहना है कि -

बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

kuns का कहना है कि -

Bahut Khoob Anirudh Bhai aap toh chupe rustam nikle :) Congrats...Kundan David.

sunil का कहना है कि -

Hi aniruddh ji,
Mujhe pataa nahi thaa ki aap itne talented hai...bus maine aapki awwaz suni thi... aap gatee bhi badhiyaa hai.....

Anirudh = combo pack of talent(Singer+Composer+Lyricist+Actor)

bhai kuch reh gayaa ho to maffi chahta aho mai....
Really happy to have u as my freind...

...........Best of luck for ur future.............

Party banti hai aab to sarkar...

संपादक का कहना है कि -

वाह....उसके पहलू से निकलकर एक और मुकम्मल नज़्म....आप भी निकल ही आइए पहलू से....बड़े मुकम्मल हो जाएंगे.....

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