फटाफट (25 नई पोस्ट):

Monday, June 08, 2009

घरौंदा


बड़ी जद्दोजहद के बाद
बनाया था एक घरौंदा
फिर कल्पना की उसके
घर बनने की
बनने लगा महल,
तब तक मौसम साफ था
न हवा, न बादल,
न कोई भविष्यवाणी
मौसम वालों की
पत्तियां भी दम साधे बैठी थी
अपनी-अपनी शाखों की पांखों में
तभी चली हवा
बदला मौसम
आई आंधी
महल धूल के रेशे बन
उड़ने लगा
मौसम के पंख लगा
आसमान में ।
बिखरने लगा हमारा वजूद
और हम ।
सुबह होने तक
शेष न था कुछ
न घर, न महल, न सपना
न कहीं कोई खंडहर ।
हमारे पंजे
धंसे थे रेत में
और आंखें किरकिरा रही थीं
तब तक हमें मालूम न था
कि बालू की नीव पर
रेत के घरौंदे सिर्फ बच्चों के खेल में
बनाए जाते हैं ।

यूनिकवि- दिबेन

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

14 कविताप्रेमियों का कहना है :

रश्मि प्रभा... का कहना है कि -

बहुत ही गूढ़ और सार्थक रचना, बहुत ही बढिया ........

Nirmla Kapila का कहना है कि -

बहुत ही सुन्दर और यथार्थ सत्य बहुत बहुत बधाई

Manju Gupta का कहना है कि -

रेत के घरौंदे सिर्फ बच्चों के खेल में
बनाए जाते हैं ।
Uparyukt panktiya haqeekat hai.
Kalpanao ne to gharonda bana diya lekin pratikoolta ne saath nahi diya!
bhavatmak kavita ke liye badhayi.

Manju Gupta.

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

दिबेन जी,

बहुत ही अच्छी भावों वाली कविता जो हिदायत भी देती है कि बिना ठोस नींव के निर्माण नही हो सकता या टिक नही सकता।

और इस प्रतीक के माध्यम से बहुत कुछ सिखाया जा सकता है या सीखा जा सकता है।

अच्छी और सार्थक रचना के लिये बधाईयाँ।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

डा.राष्ट्रप्रेमी का कहना है कि -

सुबह होने तक
शेष न था कुछ
न घर, न महल, न सपना
न कहीं कोई खंडहर ।
हमारे पंजे
धंसे थे रेत में
और आंखें किरकिरा रही थीं
तब तक हमें मालूम न था
कि बालू की नीव पर
रेत के घरौंदे सिर्फ बच्चों के खेल में
बनाए जाते हैं ।
ठीक ही है,स्वार्थ मे डूबकर कल्पनाओ मे रेत के घरोंदे ही तो बनाते रहते है हम

mohammad ahsan का कहना है कि -

ret, gharonda, aandhi, wajood ka bikharna........
darjano sal se saikadon kavitaaen inhi baasi vichaaron ke ird gird ghoomti hui.
-ahsan

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मोहम्मद अहसन से सहमत हुआ जा सकता है।

Shamikh Faraz का कहना है कि -

अनुपम रचना

और आंखें किरकिरा रही थीं
तब तक हमें मालूम न था
कि बालू की नीव पर
रेत के घरौंदे सिर्फ बच्चों के खेल में
बनाए जाते हैं ।

Ambarish Srivastava का कहना है कि -

हमारे पंजे
धंसे थे रेत में
और आंखें किरकिरा रही थीं
तब तक हमें मालूम न था
कि बालू की नीव पर
रेत के घरौंदे सिर्फ बच्चों के खेल में
बनाए जाते हैं ।

सच का सच्चा अहसास !
बधाई |

Yaro Gabriel का कहना है कि -

www0416cheap ray bans
ralph lauren polo
ray ban sunglasses
carolina jerseys
cheap basketball shoes
true religion outlet
moncler outlet
nike factory store
san antonio spurs
soccer shoes

haiyan wu का कहना है कि -

air force ones
yeezy boost 350
michael kors handbags
huarache shoes
calvin klein outlet
yeezy boost 350 v2
goyard handbags
reebok outlet
bape clothing
nike outlet store online shopping

haiyan wu का कहना है कि -

nike hyperdunk
ray ban
michael kors outlet
oakley sunglasses
oakley
bape hoodie
adidas nmd
air jordan 12
jordan shoes
adidas nmd r1

Stjsrty Xtjsrty का कहना है कि -

zzzzz2018.7.22
golden goose
ralph lauren outlet
canada goose jackets
christian louboutin shoes
dsquared2
ray ban eyeglasses
nike factory
vibram five fingers
pandora charms outlet
moncler jackets

haiyan wu का कहना है कि -

cheap mlb jerseys
nike basketball shoes
adidas iniki runner
birkin bag
off white
air max 270
caterpillar shoes
jordan 12
air jordan
goyard

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)