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Wednesday, April 01, 2009

आज का अखबार


आज सुबह का अख़बार देख मैं जरा सकपकाई
चार पांच खबरें पढ़ डाली,
और माथे पर एक शिकन नहीं आई

जैसे-जैसे उन्हें पढ़ती जा रही थी,
दिल की धड़कन बढती जा रही थी
सब और है शांति, कहीं नहीं झगडे,
आज पुलिस ने कोई चोर नहीं पकडे,
न कहीं धमाका, न हत्या, न रेप
लड़कियों के लिए अब सिटी हुई सेफ़

नेताजी के मुहं से भी निकली सच्चाई
नहीं किये वादे, उपलब्धियां गिनाईं
न कोई आरोप, न कोई जातिवाद,
उनके भाषण में थी आज 'प्रगती की बात'

फ़िल्मी खबरों का भी बदला हुआ था भेष,
लिखा था 'मनोरंजन के साथ होगा सामाजिक सन्देश'
बॉलीवूड एक है, नहीं है कोई ब्रेक-अप
आमिर-शाहरुख का भी हो गया है पेच-अप (patch-up)

और ये खबर तो सबसे जरूरी हो गयी,
सरकारी टेबलों की सारी फाइलें पूरी हो गयी
आज बाबू ने नहीं ली रिश्वत,
और काम भी कर दिया बिना किसी खटपट

आर्थिक मंदी का भी खत्म हुआ दौर,
शेयर मार्केट में हुई नयी भोर
खाली हाथों को फिर मिल गया काम
बाजारों में लौटी रौनक, स्थिर हुए दाम

मेरी चिंता तो बढती जा रही थी,
अचानक इतनी तब्दिली कहाँ से आ रही थी.
यूँ लगा जैसे दुनिया बदल गयी है,
हर बिगड़ी स्थिती संभल गयी है

लेकिन जैसे ही अख़बार के निचले हिस्से पर नज़र दौडाई
वहां ये पंक्तियाँ लिखी हुई पाईं,
"ऊपर लिखी सारी खबरें, झूठ हैं, फजूल हैं,
गुस्ताखी माफ़ हो आज अप्रैल फूल है "

ममता पंडित

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6 कविताप्रेमियों का कहना है :

shanno का कहना है कि -

क्या खबर सुनाई! ममता जी,

आखिर तक पढ़ गयीं अख़बार आप
फिर वह खबरें पढ़कर हमें सुनाई
अंत में पकडा गया सफ़ेद झूँठ कि
किसी भी चीज पर खरोंच न आई.

बन जाते हैं लोग फूल आसानी से
किसी तरह की झांसे-बाजी में फंसके
आपको और भी सब को मुबारक हो
आज april fool's day .

दिगम्बर नासवा का कहना है कि -

यानी की आप ने भी अप्रैल फूल बनाया सब को यह बात बता कर

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

ममता जी खबरें तो और भी थीं
मसलन
युग्म के यूनिकवि और पल्लवन में
केवल छन्दस रचनाओं की प्रविती आयी
और उन्हें ही मिले पुरस्कार.
यह भी कि
बच्चे के जन्मदिन पर गाये गये
अजन्मा बच्चों के लिए
लिखे गये शोकगीत.
और कलमों की
दिशाहीन हो रही है यात्रा
क्योंकि उनहोंने ली है शपथ
नहीं लगायेंगे अक्षरों पर मात्रा.
बिना जाने मात्रा खायेंगे दवाई
और कुछ बिगडा तो
डाक्टर की सहमत आयी.
फेंककर सुगन्धित सुन्दर फूल.
अंजुरी में लेकर शूल
दे रहे हैं बिना बात तूल
क्योंकि आ गया है अप्रैल फूल.

संगीता पुरी का कहना है कि -

अप्रैल फूल के बहाने ही सही ... कुछ अच्‍छी खबरें तो पढने को मिली।

Harihar का कहना है कि -

नेताजी के मुहं से भी निकली सच्चाई
नहीं किये वादे, उपलब्धियां गिनाईं
न कोई आरोप, न कोई जातिवाद,
उनके भाषण में थी आज 'प्रगती की बात'

वाह ममताजी! दिल बहलाने के लिये
गा़लिब ख़्याल अच्छा है - अप्रेल-फूल के बहाने

संत शर्मा का कहना है कि -

Achcha hai :)

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