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Tuesday, November 11, 2008

पत्थर से कोई गंगा निकलने भी नहीं देगा


यूनिकवि प्रतियोगिता की चौथी कविता सुजीत कुमार सुमन की है। कवि सुजीत पहले भी प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं और प्रकाशित भी हो चुके हैं।

पुरस्कृत कविता- कहने भी नहीं देगा

है सच कि वो मुझे चुप रहने भी नहीं देगा
चाहूं जो बोलना सच कहने भी नहीं देगा।

तमाम पाबंदियां लगा देगा वो मेरे मुस्कराने पर
अश्कों को इन आंखों से बहने भी नहीं देगा।

मेरी हर बात समझेगा वो नादानी है बच्चे की
हठ जो करेगा बच्चा तो खिलौने भी नहीं देगा।

समझेगा मेरे दिल को पत्थर का बना यूं तो
पर पत्थर से कोई गंगा निकलने भी नहीं देगा।

बिछाएगा वो कांटे ही हर सिम्त राहों में
दर्द से मुझको वो आह भरने भी नहीं देगा।

सुमन इस शहर की हवा ही कुछ ऐसी है
जो जीने तो नहीं देगा पर मरने भी नही देगा।



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ८॰७५, ३, ६॰५, ६॰२५
औसत अंक- ६॰१२५
स्थान- तीसरा


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४, ७, ६॰१२५ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ५॰७१
स्थान- चौथा


पुरस्कार- कवयित्री पूर्णिमा वर्मन की काव्य-पुस्तक 'वक़्त के साथ' की एक प्रति।

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

शेरों में थोड़ा और वज़न होता तो मज़ा आता....

शोभा का कहना है कि -

मेरी हर बात समझेगा वो नादानी है बच्चे की
हठ जो करेगा बच्चा तो खिलौने भी नहीं देगा।

समझेगा मेरे दिल को पत्थर का बना यूं तो
पर पत्थर से कोई गंगा निकलने भी नहीं देगा।
वाह बहुत सुन्दर।

तपन शर्मा का कहना है कि -

हर शे’र एक सा नहीं था...गज़ल दमदार नहीं बन पाई सुजीत जी...
केवल एक ही में मजा आया..

तमाम पाबंदियां लगा देगा वो मेरे मुस्कराने पर
अश्कों को इन आंखों से बहने भी नहीं देगा।

neeti sagar का कहना है कि -

रचना अच्छी लगी! तमाम पाबंदियां लगा देगा मेरे मुस्कराने पर. अश्कों को इन आंखों से बहने भी नही देगा! बहुत अच्छी लगी!बहुत-२ बधाई!

RC का कहना है कि -

Awesome!
Bahut achcha prayaas.

God bless
RC

rachana का कहना है कि -

मेरी हर बात समझेगा वो नादानी है बच्चे की
हठ जो करेगा बच्चा तो खिलौने भी नहीं देगा।

समझेगा मेरे दिल को पत्थर का बना यूं तो
पर पत्थर से कोई गंगा निकलने भी नहीं देगा।
मुझे ये दोनों तो नहुत ही अच्छे लगे सच है कुछ असी ही है दुनिया
सादर
रचना

"अर्श" का कहना है कि -

तमाम पाबंदियां लगा देगा वो मेरे मुस्कराने पर
अश्कों को इन आंखों से बहने भी नहीं देगा।

बहोत ही बढ़िया ग़ज़ल ,बहोत खूब ...ढेरो बधाई आपको...

Seema Sachdev का कहना है कि -

सुमन जी आपकी कविता की हर पंक्ति का भाव अपना ही लगा | बहुत-बहुत बधाई ....सीमा सचदेव

दीपाली का कहना है कि -

मेरी हर बात समझेगा वो नादानी है बच्चे की
हठ जो करेगा बच्चा तो खिलौने भी नहीं देगा।

यु तो हर शेर अच्छा है पर मुझे भी जुड़े हुए नही लगे..

दिगम्बर नासवा का कहना है कि -

लाजवाब शेर, ग़ज़ल पड़ कर मजा अ गया

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