यूनिकवि प्रतियोगिता की चौथी कविता सुजीत कुमार सुमन की है। कवि सुजीत पहले भी प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं और प्रकाशित भी हो चुके हैं।
पुरस्कृत कविता- कहने भी नहीं देगा
है सच कि वो मुझे चुप रहने भी नहीं देगा
चाहूं जो बोलना सच कहने भी नहीं देगा।
तमाम पाबंदियां लगा देगा वो मेरे मुस्कराने पर
अश्कों को इन आंखों से बहने भी नहीं देगा।
मेरी हर बात समझेगा वो नादानी है बच्चे की
हठ जो करेगा बच्चा तो खिलौने भी नहीं देगा।
समझेगा मेरे दिल को पत्थर का बना यूं तो
पर पत्थर से कोई गंगा निकलने भी नहीं देगा।
बिछाएगा वो कांटे ही हर सिम्त राहों में
दर्द से मुझको वो आह भरने भी नहीं देगा।
सुमन इस शहर की हवा ही कुछ ऐसी है
जो जीने तो नहीं देगा पर मरने भी नही देगा।
प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ८॰७५, ३, ६॰५, ६॰२५
औसत अंक- ६॰१२५
स्थान- तीसरा
द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४, ७, ६॰१२५ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ५॰७१
स्थान- चौथा
पुरस्कार- कवयित्री पूर्णिमा वर्मन की काव्य-पुस्तक 'वक़्त के साथ' की एक प्रति।




प्रस्तुत है प्रतियोगिता की ११ वीं कविता जिसके रचनाकार सुजीत कुमार सुमन का जन्म 1 मार्च 1979 को बिहार राज्य के दरभंगा में मध्यमवर्गीय कायस्थ परिवार में हुआ। बचपन पिता के कठोर अनुशासन और ममतामयी मां के स्नेहिल छांव में गुजरा। पारिवारिक माहौल ने सदैव किताबों के करीब रखा। अति आत्म-केन्द्रित स्वभाव ने शब्दों में ढलने को प्रेरित किया। हृदय की संवेदनशीलता ने हर घटना को करीब से छुआ, शब्दों ने अभिव्यक्ति दी और होता रहा कविता का निर्माण। कुछ कविताएं अनुभूति जालपत्रिका सहित अन्य पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर के प्रधान कार्यालय जयपुर में सहायक प्रबन्धक के पद पर कार्यरत। लिखने के अलावे इन्टरनेट पर उपलब्ध पत्रिकाएं तथा अन्य पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने में समय व्यतीत करते हैं।

