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Friday, November 28, 2008

'आतंकवाद' पर ऑनलाइन परिचर्चा में भाग लें


वर्ष २००८ का लगभग सारा समय आतंकवाद के साये में बीता है। ऐसा लगता है कि भारत में यदि कोई बात आम है तो वो है कहीं बम फटना, कहीं गोली चलना तो कहीं दंगे फैलना। इस नई सदी में पूरी दुनिया ने आतंकवाद का भयावह चेहरा देखा है। कौन है इसका जिम्मेदार? हम, सरकार या हमारा तंत्र? कब थमेगा आदमी से आदमी का यह हिंसक संग्राम?

इसी विषय पर यानी आतंकवाद पर इस रविवार ३० नवम्बर २००८ को हम एक ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि वैश्विक पहुँच वाले इस टूल (इंटरनेट) का इस्तेमाल हम वैचारिक मंथन कर सकें और किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकें। परिचर्चा रविवार ३० नवम्बर २००८ को भारतीय समयानुसार सुबह १० बजे से १२ तक स्काइपी पर आयोजित होगी। स्काइपी का इस्तेमाल बहुत आसान है। स्काइपी का इस्तेमाल कैसे करें?-पर संपूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है। स्काइपी पर अपना खाता बनाकर हिन्द-युग्म की स्काइपी आईडी hindyugm को खुद से जोड़ें।

परिचर्चा में ज़रूर भाग लें। कृपया नीचे के फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरकर अपना पंजीकरण करा लें।



परिचर्चा-संचालकः डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम'
तकनीकी-सहयोगः तपन शर्मा

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2 कविताप्रेमियों का कहना है :

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर का कहना है कि -

" शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं........बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।"

समीर जी की इस टिपण्णी में मेरा सुर भी शामिल!!!!!!!
प्राइमरी का मास्टर

We hate Pakistan का कहना है कि -

जिहाद के नाम पर ये फैलाता है जूनून

मासूमों का खून बहाकर पाक को सुकून


आप भी, अपना आक्रोश व्यक्त करे


http://wehatepakistan.blogspot.com/

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