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Wednesday, April 30, 2008

अपनी 'पहली कविता' जमा कीजिए


पिछले १४ महीनों से हिन्द-युग्म ने अलग-अलग विषयों पर काव्य-कार्यशाला 'काव्य-पल्लवन' का आयोजन कर रहा है। काव्य-पल्लवन के प्रत्येक अंक को सफल कहा जा सकता है, कुछ पाठकों ने तो यहाँ तक कहा कि इसका हर अंक संग्रहणीय है।

हिन्द-युग्म सदैव नये रचनाकारों को प्रोत्साहित करता रहा है। इसीलिए यूनिकवि प्रतियोगिता के माध्यम से १० नये रचनाकारों को प्रत्येक माह पुरस्कृत करता है। समय-समय पर मासिक और साप्ताहिक समीक्षा का स्तम्भ चलाता है। 'अतिथि कवि' और 'सम्मानित कवि' स्तम्भ में नामचीन कवियों की कविताएँ प्रकाशित कर नव-अंकुरों को मार्गदर्शन देता रहता है।

काव्य-पल्लवन की नई कड़ी की शुरूआत हम बिलकुल अनूठे तरीके से करने जा रहे हैं। इस बार हमने तय किया है कि काव्य-पल्लवन में प्रत्येक कवि की 'पहली कविता' प्रकाशित करेंगे। जिससे नये रचनाकार स्थापित कवियों की भी पहली कविता पढ़ सकें, उन्हें बल मिले कि वो ठीक डगर पर हैं, बढ़िया से बढ़िया रचनाकर्म वे भी कर सकते हैं, सोच का दायरा बढ़ा सकते हैं।

चूँकि इस काव्य-पल्लवन में सैकड़ों कविताएँ प्राप्त होने की उम्मीद है, अतः हम काव्य-पल्लवन का यह विशेष अंक कई भागों में प्रकाशित करेंगे। प्रत्येक गुरुवार को नये-पुराने, चर्चित-अचर्चित कवियों की 'पहली कविता' हिन्द-युग्म पर प्रकाशित की जायेगी।

रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी 'पहली कविता' भेजते वक़्त पूरी ईमानदारी बरतें, इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनायें बल्कि यह सोचें कि इससे बहुत से नये रचनाकारों का प्रोत्साहन होगा।

विशेष-
१) अपनी 'पहली कविता' kavyapallavan@gmail.com पर भेजें।
२) यदि आप यूनिकोड (हिन्दी) में टाइप नहीं कर पा रहे हों तो रोमन में टंकित करके या स्कैन करके भी भेज सकते हैं।
३) कई रचनाकार शुरू-शुरू में में किसी फिल्मी गीत की पैरोडी या किसी चर्चित कविता की पैरोडी लिख बैठते हैं। 'पहली कविता' उसे ही मानें जिसे आप अपनी पहली मौलिक रचना कह सकते हों।

४) कविताओं का अप्रकाशित होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है।

५) कवि यदि ज़रूरी समझें तो क्यों लिखा?, कैसे लिखा? कहाँ लिखा? आदि ज़रूर लिख भेजें।

६) यदि आप अपनी पहली रचना संजोकर नहीं रख पाये हैं तो उपलब्ध रचनाओं में से प्राथमिक रचना लिख भेजें, लेकिन भूमिका में इस सच्चाई का उल्लेख अवश्य करें।

७) यह आयोजन तक तक चलता रहेगा जब तक कि हमें कवियों से कविताएँ मिलती रहेंगी, इसलिए अंतिम तिथि निर्धारित नहीं है।

चित्रकार अपने चित्र भी भेजें ताकि हम इस विशेष अंक में उन्हें लगा सकें।

इस विशेषांक में छः अलग-अलग भागों में 115 कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।






पुराने विशेषांक

अंक-१
अंक-२
अंक-३
अंक-४
अंक-५
अंक-६
अंक-७
अंक-८
अंक-९
अंक-१०
अंक-११
अंक-१२
अंक-१३
अंक-१४

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

29 कविताप्रेमियों का कहना है :

anuradha srivastav का कहना है कि -

रोचक और सराहनीय प्रयास। वाकई मजेदार है।

sumit का कहना है कि -

ये बहुत ही अच्छा कदम है
मेरी पहली रचना आरकुट पर प्राकाशित है उसे आपके पास जल्द ही भेजूगा
सुमित भारद्वाज

तपन शर्मा का कहना है कि -

बहुत सही कदम है... ये बतायें कि पहली कविता लिखे हुए कितना समय हो चुका होना चाहिए.मतलब अगर किसी ने कविता ३ साल या ५ साल या बहुत पहले लिखी हो क्या वो भी भेज सकता है?

नियंत्रक । Admin का कहना है कि -

तपन जी,

पहली कविता तो कोई कभी भी लिख सकता है। उदाहरण के लिए हिन्द-युग्म के सम्मानित कवि उदय प्रकाश ने शायद अपनी पहली कविता आज से २० साल से भी अधिक समय पहले लिखी होगी। अमूमन कवि अपनी पहली कविता प्रकाशित नहीं करवाते या नहीं हो पाती, इसलिए हमने यह कदम उठाया है। आपने जब भी लिखी हो अपनी पहली कविता उसे आप भेज दीजिए।

Seema Sachdev का कहना है कि -

यह प्रयास टू बहुत ही सराहनीय है ,मैंने अपनी पहली कविता लगभग नौ या दस साल की उम्र मे लिखी मतलब बीस साल पहले लेकिन बहुत सारी कवितायें जिन्हें संजो कर नही रखा गम हो गई |जो मेरे मेरी पहली कविता उपलब्ध है वाही भेज दूँगी .......सीमा सचदेव

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

"कविता" के चक्कर में हम... पता है क्या हुआ.. हम ना.. फेल ही हो गये 10थ क्लास में

ओ हो तुसी वी ना.. कविता लिखना बाबा.. वैसा कोई चक्कर वक्कर नही था जी..

कविता क्या गाने लिखने का शौक चढ़ा था फिल्मी टाइप के.. वैसे वो डायरी ना खो गयी या फिर रद्दी मे चाट वाला ले गया पर कुछ कुछ याद है मुझे उनकी लाइंस अब एक दम तो पक्का नहीं कि एक-दम पहली कौन सी ठीक पर वो सभी पहली ही थीं तो उनमें से ही भेजुँगा जी बस इन्नी सी चीटिंग कर रहा हूँ ओके...

tanha kavi का कहना है कि -

मैने जब कविता लिखनी शुरू की थी तो "कुत्ता", "बिल्ली", "चप्पल", "जूता" पर लिखा करता था। अब मुझे भी याद नहीं कि उनमें से मेरी पहली कविता कौन थी.......क्या करूँ ? :(

-विश्व दीपक ’तन्हा’

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

yess.. Something new and interseting. Ye idea jisaka bhee hai lovely hai.


Avaneesh Tiwari

pooja anil का कहना है कि -

बहुत ही अनूठा और बेहद रूचिकर विषय है , बस एक मुश्किल है......, हम रहते हैं स्पेन में और कविताएँ छूट गई हैं हिन्दुस्तान में , अब कहाँ से पहली कविता लाइ जाए???, फ़िर भी कोशिश जरूर करुँगी, अपनी पहली कविता को ढूँढने की और काव्य पल्लवन में भाग लेने की .

बिन मांगे एक सुझाव देना चाहती हूँ- अक्सर पहली कविता के साथ कवि की कोई ना कोई भावना जुड़ी होती है , अगर कविता के साथ जुड़ी यादें भी संक्षिप्त में, वैकल्पिक तौर पर, कविता के साथ प्रकाशित की जाएँ तो उसे पढ़ने का उत्साह दुगुना हो जायेगा .

^^पूजा अनिल

sahil का कहना है कि -

बहुत ही रोचक पहल है ये.
आलोक सिंह "साहिल"

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

आइडिया जबरदस्त है...

रेनू जैन का कहना है कि -

बहुत ही रोचक ख़याल है.... सब की कवितायें पढ़ने में आनंद आएगा. और ये ख़याल की कविता के साथ जुडी स्मृति भी प्रकाशित की जाए, और भी रोचक है. मैंने भी अपनी पहली कविता करीब १५ वर्ष पहले लिखी थी...

mahashakti का कहना है कि -

बहुत अच्‍छा प्रयास है,

मै भी भेजने की कोशिश करूँगा, करीब 12 मई के बाद, वैसे अन्तिम तिथि नही बताया गयाहै/

नियंत्रक । Admin का कहना है कि -

सीमा जी,

ज्यादातर लेखकों के साथ ऐसा होता है कि वो अपनी पुरानी रचनाएँ संजोकर नहीं रखते हैं। लेकिन हमारा यह आयोजन इस बात का एहसास दिलायेगा कि संजोकर रखनी चाहिए थी। खैर जिनकी पहली रचना उपलब्ध नहीं हो वो उपलब्ध रचनाओं में से प्रथम रचना भेजें। लेकिन ईमानदारी ज़रूर बरतें।


भूपेन्द्र राघव जी,

आपसे भी हम यही कहना चाहेंगे।

तन्हा जी,

आपके पास कविताओं की जितनी डायरियाँ उपलब्ध हैं, उनमें से सबसे पुरानी कविता तलाशिए, कामयाबी ज़रूर मिलेगी।

पूजा अनिल जी,

आजकल तो इंटरनेट और फ़ोन का जमाना है। अपने परिवार के उन लोगों से संपर्क कीजिए जो भारत में हैं, जिन्हें आपकी डायरी की ख़बर हो, उनसे कहिए कि हमें 'वो' वाली कविता स्कैन करके भेज दो, या फोन पर लिखवा दो।

आपने बिन माँगे बहुत बढ़िया सलाह दी है। हम सूचना देते वक़्त यह लिखना भूल गये। सच में, कविताओं से ज्यादा रोचक उनकी भूमिकाएँ होंगी। कवि यदि ज़रूरी समझें तो क्यों लिखा?, कैसे लिखा? कहाँ लिखा? आदि ज़रूर लिख भेजें।

रेनू जी,

आपका सुझाव अनुसरणीय है।

महाशक्ति जी,

आखिरी तिथि इसलिए नहीं निश्चित की गई क्योंकि लेखकों की प्रतिभागिता यदि अगले महीने भी बनी रही तो हम इसे अगले महीने में भी ज़ारी रख सकते हैं।

anitakumar का कहना है कि -

सराहनीय आयोजन्॥बम्बई भाषा में कहें तो धासूँ आइडिया है जी।

Aditya Pratap का कहना है कि -

pahli kavita toh bahut aavashayak hai ek kavi ke liye akhir jitne bhi kavi aur shayaro ka janam hua hai ek na ek din kuch likhne ki kosis ki hogi tab na yeh alag bat hai ki woh katni achhi aur satik rahi

Rajinder Singh का कहना है कि -

Yeh ek bahut hi srahniya kadam hai aur main iske liye aapka dhanyabaad karta hun. Main bhi apni pehli kavita bhejana chahtaa hun---kaise bhejoon? Dhanyabaad.

Rajinder Singh का कहना है कि -

मैं अपनी कविता नही भेज पा रह हूं आपके दिए हुए 'ई-मेल'के पते पर. क़्या आप अभी स्वीकार नही कर रहे है? मैं अपनी कविता यही पे पेस्ट कर रहा हूं. अगर अच्छी लगे तो, इसे प्रकाशित कर देना. मै ब्लोगर .कोम पे भी लिखता हूं. मेरा लिंक हैः-blogger.com------Blog name 'thought machine' and link is:-
http://rajee7949.blogspot.com/

मेरी हिन्दी कि रचनाएं सुलेखाब्लोगस . कोम पे भी लिखी गई है. उसका लिंक हैः-
(http://rajee.sulekha.com/dashboard.htm.)
मुझे आप मेरे ई-मेल प्ते पर सूचना देना. मेरा पता हैः-rajee7949@gmail.com
भवदीय आपका,
राजिन्द्र कुशवाहा
meri kavita ek gazal ke roop mey hai jo maine 9/11 ghatna ke baad likhi thi.Meri yeh kavita English font ke saath hai. Yeh ek gazal hai. Niche likhi hai:-


खुदकुशी करनी है गर तो खुदकुशी कर लिजीए,
इल्तज़ा इतनी है लेकिन ज़हर सब को न दीजीए.

KHUDKUSHI KARNI HAI GAR TOH KHUDKUSHI KAR LIJIYE,
ILTAZA ITNI HAI 'LEKIN', ZEHAR SABKO NA DIJIYE.

जिन्दगी कितनी हसीन, यह तुम समझ पायो नही,
आग नफरत की लगी है आपके दिल मे कहीं;
रोक लो नफरत की आंधी, कुछ रहम तो कीजीए--
प्यार की बरसात से यह आग बुझने दीजीए.

ZINDAGI KITNI HASSEN YEH TUM SAMAJH PAYO NAHIN-
AAG NAFRAT KI LAGI HAI AAPKE DIL MEIN KAHIN,
ROK LO NAFRAT KI AANDHI, KUCHH REHAM TOH KIJIYE;
'PIYAR' KI BARSAAT SE YEH AAG BUJHNE DIJIYE.

खुदकुशी करनी है गर तो खुदकुशी कर लिजीए,
KHUDKUSHI KARNI HAI GAR-------

क़िसकी यह ज़मीन है और किसका आसमान है?
इन सवालों का जवाब खुद से ही परेशान है;
फिर भी इनको अपना कह के, ज़हर यह न पीजीए.
मौत के व्यापार यह कहर तो न किजीए.

KISKI YEH ZAMEEN HAI AUR KISKA AASMAAN HAI?
IN SAWAALON KA JAWAB KHUD SE HI PRESHAN HAI,
FIR BHI INKO APNA KEH KE, ZEHAR YEH NA PIJIYE;
MAUT KE VYAPAAR KA YEH KEHAR TOH NA KIJIYE.

खुदकुशी करनी है गर तो खुदकुशी कर लिजीए,
KHUDKUSHI KARNI HAI GAR--------

किसका मज़हव अच्छा है, किसकी है यह कौम बडी?
सदीयों से पुरूखों ने भी इस मौज़ू पे है ज़न्ग लडी;
इन्सान तो सब एक है, आप नाम कुछ भी दीजीए;
बांट लो खेमों में "राजी", ज़ान तो न लीजीए.

KISKA MAZHAV ACHHA HAI AUR KISKI HAI YEH KAUM BADI?
SADIYON SE PURUKHON NE BHI IS MOJU PE HAI JUNG LADI;
INSAAN TOH SAB EK HAI AAP NAAM KUCHH BHI DIJIYE—
BAANT LO KHEMON MEIN "RAJEE", JAAN TOH NA LIJIYE.

खुदकुशी करनी है गर तो खुदकुशी कर लिजीए,
इल्तज़ा इतनी है लेकिन ज़हर सब को न दीजीए.

'KHUDKUSHI' KARNI HAI GAR TOH KHUDKUSHI KAR LIJIYE--
ILTAZA ITNI HAI LEKIN ZEHAR SAB KO NA DIJIYE.

Bohat Bohat dhanyabaad. Rajee Kushwaha.

Seema Sachdev का कहना है कि -

राजिंदर सिंह राजी खुशावाहा जी ,तो आप हमारे बुलावे पर यहाँ आ ही गए ,बहुत अच्छा लगा आपको यहाँ देखकर और आपकी पहली कविता देखकर और अच्छा लगेगा | मैंने आपकी बहुत सारी कवितायें पढी है ,इसीलिए आपको हिन्दयुग्म पर आने के लिए अनुरोध किया था | अब आपकी कविता भी अवश्य यहाँ दिखेगी |मैंने हमारे दोस्त यश छबडा जी को भी यहाँ आने का निम्त्रण दिया और वो भी यहाँ आयेंगे .....सीमा सचदेव

तपन शर्मा का कहना है कि -

सीमा जी, आप बहुत अच्छा काम कर रही हैं जो नए नए कवियों से हमारी मुलाकात करवा रहीं हैं। कुशवाहा जी व यश जी का साथ बराबर मिलता रहे तो बहुत अच्छा रहेगा।

मीनाक्षी का कहना है कि -

इस नए प्रयास की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. पूजा अनिल जी का सुझाव तो बहुत बढिया है. कहानियाँ और लेख बचपन से लिखते आए थे लेकिन पहली कविता के जन्म की कहानी भुलाए नहीं भूलती. क्या हम भी भाग ले सकते हैं?

Popular India का कहना है कि -

बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं. इसके लिए धन्यवाद. इससे नए लिखने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा.

Gul का कहना है कि -

Bahut hi achchhi pahal...hamne apni pahli kavita jab hum 1st year padaa karte the tab likhi thi jo Nav-bharat jabalpur Dainik Samachar-patra me prakashit ho chuki hai...kya hum ise bhej sakte hai?

DHIRENDRA का कहना है कि -

This is the same i wanted to do.
Really a great task.
I'll also post my poems soon.
Really it will be an honour.
Soon i'll be one of most active members of this web site.

Congrats! n All the Best

Piyush Deep का कहना है कि -

कवियों की प्रथम रचना प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
अपनी पहली काव्य रचना जल्दी ही भेजूंगा
पीयूष दीप राजन

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