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Saturday, March 01, 2008

हिन्दी लिखो चाहे पढ़ो, ईनाम पाओ, सम्मान पाओ


विश्व पुस्तक मेला २००८ में अपनी भागीदारी के बाद हिन्द-युग्म उम्मीद करता है कि मार्च माह की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की संख्या बढ़ेगी। हिन्द-युग्म की कोशिश रही है कि नये लोगों को एक मंच मिल सके, इसीलिए प्रतियोगिता जैसा आयोजन हम प्रत्येक माह करते हैं।

बहुत खुशी की बात है कि अधिकतर प्रतिभागी हमारी इस प्रतियोगिता के परिणामों को सकारात्मक रूप से लेते हैं और बारम्बार प्रयास करने में विश्वास रखते हैं।

हम हमेशा से आपसे एक ही आग्रह करते हैं कि हिन्द-युग्म को एक हिन्दी आंदोलन मानकर जिस प्रकार से भी हो सकता है, इसका हिस्सा बनें।

इसी निवेदन के साथ हम हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के नये अंक के लिए कविताओं की प्रविष्टियाँ आमंत्रित करते हैं। नये पाठकों को बता दें कि 'हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता' का आयोजन प्रत्येक माह होता है। कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कवियों को अपनी मौलिक तथा अप्रकाशित रचनाएँ महीने की १५ वीं तारीख तक भेजनी होती है, तथा पाठकों को पहले दिन से महीने के आखिरी दिन तक यहाँ प्रकाशित सभी प्रविष्टियों पर टिप्पणियाँ करनी होती है।

यूनिकवि बनने के लिए-

१) अपनी कोई मौलिक तथा अप्रकाशित कविता १५ मार्च २००८ की मध्यरात्रि तक hindyugm@gmail.com पर भेजें।

(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो आप हमारे निःशुल्क यूनिप्रशिक्षण का लाभ ले सकते हैं।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सिखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

४) एक माह में एक कवि केवल एक ही प्रविष्टि भेजे।

यूनिपाठक बनने के लिए

चूँकि हमारा सारा प्रयास इंटरनेट पर हिन्दी लिखने-पढ़ने को बढ़ावा देना है, इसलिए पाठकों से हम यूनिकोड ( हिन्दी टायपिंग) में टंकित टिप्पणियों की अपेक्षा रखते हैं। टायपिंग संबंधी सभी मदद यहाँ हैं।

१) १ मार्च २००८ से ३१ मार्च २००८ के बीच की हिन्द-युग्म पर प्रकाशित अधिकाधिक प्रविष्टियों पर हिन्दी में टिप्पणी (कमेंट) करें।

२) टिप्पणियों से पठनीयता परिलक्षित हो।

३) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

४) हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।

कवियों और पाठकों को निम्न प्रकार से पुरस्कृत और सम्मानित किया जायेगा-

१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के पाठकों को प्रो॰ सी॰बी॰ श्रीवास्तव 'विदग्ध' की ओर से उनकी काव्य-पुस्तक की स्वहस्ताक्षरित प्रति।

४) दूसरे से दसवें स्थान के कवियों को ज्योतिषाचार्य उपेन्द्र 'दत्त' का काव्य-संग्रह 'एक लेखनी के सात रंग' की एक-एक प्रति।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

आप भाग लेंगे तो हमारे प्रयास को बल मिलेगा, तो आइए और हमारा प्रोत्साहन कीजिए।

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2 कविताप्रेमियों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

बहुत बढ़िया,हम भी उम्मीद करते हैं की इस बार इस आयोजन का रूप व्यापक होगा,
आलोक सिंह "साहिल"

देवेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि -

हँस लो गा लो,
खुशी मना लो ।
मानस तन मुशकिल से मिलता,
छढ़ -छढ़ मूल्य चुकालो ।।

मनोभावनाओ का मंथन ,
जीवन सागर हलचल ।
समस्याये सी सौगाते है,
हिन्द-युग्म सा अमृत जल ।।
मिल जुल इ स को पा लो ।
हँस लो ----------------

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