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Wednesday, July 25, 2007

अगस्त माह के काव्य-पल्लवन के लिए रचनाएँ आमंत्रित


हिन्द-युग्म अंतरजालीय कविता के विकास व उसकी समृद्धि हेतु 'काव्य-पल्लवन' नाम से सामूहिक कविता लेखन की कार्यशाला पिछले ५ महीने से आयोजित कर रहा है, जिसमें किसी दिये गये विषय पर सभी से कविता रूप में उनके विचार आमंत्रित किये जाते हैं (पूरी जानकारी यहाँ उपलब्ध है), जिन्हें पिरोकर माह के अंतिम गुरुवार को प्रकाशित कर दिया जाता है।

इस माह का काव्य-पल्लवन जो कि 'प्यास' विषय से आयोजित किया गया था, कल प्रकाशित कर दिया जायेगा।

इस बार कवियों को मात्र १४ दिनों का समय मिला था। हम चाहते हैं कि इंटरनेट पर हिन्दी -कविता से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति इस कार्यशाला में भाग ले और अंतरजालीय हिन्दी साहित्य को समृद्ध करे।

इसलिए अगस्त माह के काव्य-पल्लवन का विषय हम जल्दी प्रकाशित कर रहे हैं।

सोमवार, २३ जुलाई, २००७ को हमने पाठकों से काव्य-पल्लवन का विषय चुनने का निवेदन किया था। हमें तीन विषय प्राप्त हुए। तीनों विषय बहुत सुंदर और आवश्यक लगे, परंतु सर्वसुलभता को ध्यान में रखते हुए अगस्त माह के काव्य-पल्लवन का विषय 'संवेदना' को चुना गया है।

यह विषय हमें 'गौरव शुक्ला' से प्राप्त हुआ।

आपको करना मात्र इतना है कि इस विषय पर स्वरचित कविता को १३ अगस्त, २००७ तक mohinder56@gmail.com पर भेज देना है। रचना को मेल द्वारा भेजते समय मेल के विषय (Subject) में 'मेरी रचना काव्य-पल्लवन के लिए' लिखना न भूलें; जिससे मोहिन्दर जी को उस मेल के महत्व का भान हो सके।

याद रहे आपकी कविता विषय से न भटके। और यूनिकोड में टंकित हो। यूनिकोड-टंकण संबंधित मदद >यहाँ हैं।

हम कविताओं के साथ उसपर हमारे पेंटरों द्वारा बनी पेंटिंगें भी लगाने की कोशिश करेंगे। यदि आप में से कोई पेंटिंग बनाने में रुचि रखता हो, अंतरजालीय कविताओं को अपनी चित्राभिव्यक्ति से अलंकृत करना चाहता हो तो कृपया hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करे।

काव्य-पल्लवन का यह अंक ३० अगस्त, २००७ को प्रकाशित कर दिया जायेगा।

हमें आपकी रचनाओं का इंतज़ार रहेगा।

काव्य-पल्लवन के अब तक के अंक-

सड़क, आदमी और आसमान
परिवर्तन नाम है जीवन का
जीवन एक कैनवास
आधुनिक विकास और गाँव

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2 कविताप्रेमियों का कहना है :

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

यूनीकोड में लेखन को बढ़ावा देने के नज़रिये से आपका यह प्रयास सराहनीय है। बधाई।

vijayshankar का कहना है कि -

kavita to sahity kaa sabase uttam roop maana gaya hai. bhartendu ke samay ya unase pahle jo galp lekhan bhi hua, voh kavita men hua. kuchh-kuchh vaisa jaise aaj satyanaaraayan ki katha padhee jaatee hai. jo praamaanik hai. kya 'rachanatmak lekhan' karanaa koyee sikhaa sakata hai? to yah himaakat kyon?

suna hai 'kahaanee lekhan' ka koyee skool patiyaala men hai. lekin yah na samajhiye ki kavita inbuilt hotee hai. aapake bhole prayaas ko dhanyavaad.

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