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Sunday, April 01, 2007

शर्त सिर्फ़ एकः हिन्दी में लिखो (प्रतियोगिता)


'हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता' की शुरूआत हुए अभी तीन ही महीने हुए हैं। यह चौथा महीना है। फिर भी यह कहा जा सकता है कि अपने उद्देश्य की ओर यदि आप १ प्रतिशत भी बढ़ते हैं तो आपका उत्साह सौ गुना हो जाता है। बहुत खुशी की बात है कि हमें अच्छे पाठक मिल रहे हैं। आलोक शंकर और गौरव सोलंकी जैसे आधुनिक दिनकर और आधुनिक दुष्यंत कुमार मिल रहे हैं। एक महीने में रोज़ाना उसी उत्साह और उत्कंठा से एक-एक कविता को पढ़ना और उसकी समालोचना करना कोई आसान काम नहीं है, मगर तमाम पाठकों ने इसे आसान सिद्ध कर दिया है।


हमारा उत्साह उस समय दुगुना हो गया जब सृजनगाथा के प्रधान सम्पादक श्री जयप्रकाश मानस ने हिन्द-युग्म के यूनिकवियों और यूनिपाठकों को अपनी तरफ़ से पुस्तकें भेंट करने की बात की। अभी तक अर्थ का आभाव हमारे हाथ बाँधे हुआ था, परन्तु अब हम रु १२०० तक के पुरस्कारों के अतिरिक्त सृजनगाथा की ओर से पुस्तकें भी दे सकते हैं।


हमारी एक पाठिका विशाखा जी (जो कि अहमदाबाद से हैं और मूलतः गुजराती लेखिका हैं) ने एक विशेष बात की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट कराया कि हमें डायरी में बंद सपनों को हिन्द-युग्म (अंतरजाल) पर लाना होगा। उनका कहना बिल्कुल ठीक था क्योंकि बहुत से ऐसे लोग अंतरजाल पर भटक रहे हैं जो कि बहुत अच्छा लिखते तो हैं, परन्तु दुनिया के सामने अपना हुनर दिखाने में शरमा रहे हैं।


फिलहाल तो हम अपनी बात रख लें, उनको खींच लाने का कार्य तो हिन्द-युग्म टीम अप्रत्यक्षरूपेण करती ही रहेगी।

यूनिकवियों के लिए-


  • हमें अपनी एक अप्रकाशित कविता (जो गीत, ग़ज़ल, नज़्म, लयबद्ध/अलयबद्ध कुछ भी हो सकती है) hindyugm@gmail.com पर १५ अप्रैल, २००७ तक भेजें।

महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।



  • कविता यूनिकोड में टंकित हो। यदि आप हिन्दी में टाइप करना नहीं जानते तो कृपया यहाँ देखें। फिर भी परेशानी हो तो हमारे विशेषज्ञ श्री गिरिराज जोशी से grjoshee@gmail.com पर सम्पर्क करें।

  • १६ से ३० अप्रैल तक हमारी निर्णायक मंडली यूनिकवि/यूनिकवयित्री का निर्णय लेगी और परिणाम ७ मई, २००७ को हिन्द-युग्म के मुख्य-पृष्ठ पर प्रकाशित कर दिया जायेगा।

  • विजेता कवि को पुरस्कृत कविता के लिए रु ३००, रु १०० तक की कविताओं की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जायेगा।

  • जैसाकि हमारी शर्तों में यहाँ लिखा है कि यदि विजेता कवि उस माह की तीन अन्य सोमवारों को भी अपनी कविता प्रकाशित करने को तैयार होता है तो रु १०० प्रति सोमवार के हिसाब से रु ३०० और दियें जायेंगे।



यूनिपाठकों के लिए-



चूँकि हमारा सारा प्रयोजन इंटरनेट पर देवनागरी-प्रयोग के प्रोत्साहन के लिए है, इसलिए पाठकों से हम देवनागरी में कविता की समालोचना की अपेक्षा रखते हैं। जो पाठक-



  • अप्रैल माह के अधिकाधिक पोस्टों पर देवनागरी में टिप्पणियाँ किये रहेंगे।

  • जिनकी टिप्पणिओं से पठनियता की वास्तविकता झलकेगी।

इसके लिए यह आवश्यक होगा कि एक पाठक टिप्पणियाँ प्रकाशित करते समय हमेशा एक ही नाम का प्रयोग करे। बेनाम (Anonymouse) टिप्पणियाँ प्रतियोगिता की दौड़ से बाहर रहेंगी।


विजेता पाठक को-



  • रु ३०० का नकद इनाम,

  • रु २०० तक की पुस्तकें, और

  • एक प्रशस्ति-पत्र दिया जायेगा।

आवश्यक-



  • उपर्युक्त पुरस्कारों के अतिरिक्त प्रायोजक मिलने पर अन्य उपहार भी प्रदान किये जा सकते हैं।

  • प्रतियोगिता में भाग लेने से पूर्व इसकी नियमों और शर्तों को यहाँ पढ़ लेना आवश्यक है।


हम आँख बिछाए बैठे हैं।



सूचना-


हिन्द-युग्म के कवि श्री राजीव रंजन प्रसाद की कविताएँ और उनपर लेख सृजनगाथा के अप्रैल, २००७ अंक में यहाँ प्रकाशित।


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