देखते-देखते हिन्द-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता का आयोजन होते २ वर्ष बीत गये। दिसम्बर २००८ की प्रतियोगिता इस आयोजन की २४वीं कड़ी थी। इसकी सफलता का जश्न हिन्द-युग्म ने २८ दिसम्बर २००८ को हिन्दी भवन, नई दिल्ली में मनाया। आज हम उसी २४वीं कड़ी का परिणाम लेकर उपस्थित हैं।
पिछले माह की यूनिकवि प्रतियोगिता में कुल ४१ प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। पहले चरण के ३ निर्णायकों के दिये गये अंकों के आधार पर चुनी गईं २५ कविताओं को दूसरे चरण के २ निर्णायकों भेजी गईं। यानी ५ जजों मापदंडों ने छनकर रचना श्रीवास्तव की क्षणिकाएँ प्रथम स्थान बनाने में सफल रहीं।
यूनिकवयित्री रचना श्रीवास्तव सितम्बर २००८ की यूनिपाठिका भी रह चुकी हैं। ये अच्छी लेखिका ही नहीं अपितु अच्छी पाठिका भी हैं। डैलास (अमेरिका) में रह रहीं रचना का जन्म लखनऊ (उ॰प्र॰) में हुआ। रचना को लिखने की प्रेरणा बाबा स्वर्गीय रामचरित्र पाण्डेय और माता श्रीमती विद्यावती पाण्डेय और पिता श्री रमाकांत पाण्डेय से मिली। भारत और डैलस (अमेरिका) की बहुत सी कवि गोष्ठियों में भाग लिया, और डैलास में मंच संचालन भी किया। अभिनय में अनेक पुरस्कार और स्वर्ण पदक मिला, वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरुस्कार, लोक संगीत और न्रृत्य में पुरुस्कार, रेडियो फन एशिया, रेडियो सलाम नमस्ते (डैलस), रेडियो मनोरंजन (फ्लोरिडा), रेडियो संगीत (हियूस्टन) में कविता पाठ। कृत्या, साहित्य कुञ्ज, अभिव्यक्ति, सृजन गाथा, लेखिनी, रचनाकर, हिंद-युग्म, हिन्दी नेस्ट, गवाक्ष, हिन्दी पुष्प, स्वर्ग विभा, हिन्दी-मीडिया इत्यादि में लेख, कहानियाँ, कवितायें, बच्चों की कहानियाँ और कवितायें प्रकाशित।पुरस्कृत कविता- क्षणिकाएँ
दीवार
नफरत के बीज
कुछ यूँ पनपे
हवा भी बीच से गुजरी
तो दीवार बन गई
लड़कियां
वो कोख है
कोसी जाती है
श्रापी जाती है
फिर गिरा दी जाती हैं
भूख
अमीरों के चोचले
गरीबों की मुसीबत
बेसहारा माँ के लिए
पुनः बिकने का दर्द
मुंबई
स्वप्न नगरी
खून की होली
ग्रेनेड की दीवाली
अपनों की शहादत
आतंकियों की विश्राम स्थली
नेता
लाज जाए
पर गद्दी न जाए
देश लुटे
घर अपना बचाए
कपड़े बदल मिडिया में आए
आसुँओं में वोट ढूंढें
कफन में मुह छुपाये
लड़कियां
देह से मापी जाती है
गोरी पतली लम्बी
सुंदर
शिक्षा, रूह की रज़ा
कोई नही पूछता
लड़कियां
नई किताब की मानिंद
पढ़ा सहलाया
अलमारी में ठूंस दिया
फिर न झाड़ा, पोंछा
न धूप दिखाया
अस्तित्व की चीख
धीरे-धीरे
दीमक चाटता गया
प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४, ५॰५, ६॰८५
औसत अंक- ५॰४५
स्थान- छठवाँ
द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४, ८, ५॰४५ (पिछले चरण का औसत
औसत अंक- ५॰८१६६७
स्थान- प्रथम
पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु १०० तक की पुस्तकें।
यूनिकवयित्री की कुछ कविताएँ जनवरी माह के अन्य तीन सोमवारों को भी प्रकाशित होंगी, अतः शर्तानुसार रु १०० प्रत्येक कविता के हिसाब से रु ३०० का नग़द इनाम दिया जायेगा।
हिन्द-युग्म प्रत्येक माह कम से कम १० कवियों को उपहार-स्वरूप पुस्तकें देकर इनका प्रोत्साहन करता आया है। इस बार हम जिन अन्य ९ कवियों को कवि गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' द्वारा संपादित हाडौती के जनवादी कवियों की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह 'जन जन नाद' की एक-एक प्रति भेंट करेंगे, वे हैं
प्रकाश बादल
डा. राम भारतीय
संजय सेन सागर
अनिल जींगर
आकांक्षा पारे
सुनील कुमार सिंह "तेरा दीवाना"
आशिका " तनहा
शारदा अरोरा
सन्तोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
इन सभी कवियों से निवेदन है कृपया अपनी कविता ३१ जनवरी २००९ से पहले अन्यत्र प्रकाशित न करें/ करवायें।
अब पाठकों की बात करते हैं। पिछले महीने जिस पाठक ने हिन्द-युग्म को सबसे अधिक प्रभावित किया, वे हैं मनु बेतख्खल्लुस। मनु बे-तख्खल्लुस के टिप्पणियों की ख़ास बात यह रही कि इन्होंने शे'रों के माध्यम से प्रसंशा या आलोचना की।
यूनिपाठक- मनु बे-तख्खल्लुस
जन्म :२ मार्च १९६७ , दिल्ली मेंमाता पिता :श्रीमती ब्रहमा देवी एवं श्री जगत नारायण ( बहुत सरल स्वभाव के )
शिक्षा :राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से घबड़ाकर स्कूल बीच में ही छोड़ दिया था..
लेखन कार्य : ये इन्हें ठीक से याद नहीं है....पर सन २००२ में एक अज़ीज़ दोस्त ने शे'र कहते देख कर एक डायरी लाकर दी और आग्रह किया कि कभी भी कुछ कहें तो कृपया इसमे ज़रूर उतार लें.....अभी आधी भी नहीं भरी है ....शायद लिखने के लिए नहीं लिखते ...कहने के लिए लिखते हैं.....और कहा हमेशा थोड़े ही जाता है....आधी रात के बाद में जो भी आ जाए वो ही शायरी है........सीखने की कोशिश से भी परहेज
पहला प्रकाशन :एक बिल्कुल छोटी सी लघुकथा हिंद-युग्म पर...(इतनी छोटी जैसे हलवाई कढाई में तेल की गर्मी जांचने के लिए आटे की छोटी सी गोली डालता है , इस गोली का परिणाम सुखद रहा और तब से हिंद युग्म को अपने साथ ही ले लिया......हाँ ...ग़ज़ल बहुत मन मार के भेजी थी ....ने छपने के डर से नहीं ...बल्कि इसलिए के अपने ख्यालों में किसी को शामिल नहीं करना चाहता थे .....पर अब ऐसे भी लोग मिले हैं यहाँ पर के सब कुछ बाँट लेने को जी करता है ..में इस बदलाव के लिए युग्म का तहेदिल से आभारी...
रूचि: कभी मूड हुआ तो लिख लिया..या कुछ रेखाएं रंगों से उकेर लीं ...या कुछ सूफी साफी सा सुन लिया...पर बच्चों के लिए बैंगन का भुरता बनाने में मूड बिल्कुल नहीं देखते...दिल से जुट जाते हैं..
एक बड़ा सहारा : कुटुंब, रिश्तेदार और कुछ थोड़े से ही सही मित्रों का अपार प्रेम
और एक बिमारी भी : बेटी के द्बारा हंसाये जाने पर खुल कर तब तक ठहाके लगाना जब तक होंठों की हँसी आँखों से ना बहने लगे..........
एक मुश्किल काम : हिंद युग्म देखने के बाद अपने पन्द्रह घंटे के दिन को खीं.......च ...कर......उन्नीस बीस घंटे का किया है..
पुरस्कार और सम्मान- रु ३०० का नक़द पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र और रु २०० तक की पुस्तकें।
दूसरे से चौथे स्थान के पाठक के रूप में हमने क्रमशः एम॰ ए॰ शर्मा "सेहर" , रंजना सिंह और दिगम्बर नासवा को चुना है, जिन्हें कवि गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' द्वारा संपादित हाडौती के जनवादी कवियों की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह 'जन जन नाद' की एक-एक प्रति भेंट करेंगे।
हम निम्नलिखित कवियों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया और यह निवेदन करते हैं कि जनवरी २००९ की यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भी अवश्य भाग लें।
एम॰ ए॰ शर्मा 'सेहर'
कुमार लव
गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’
चतुरानन झा 'मनोज'
शामिख फ़राज़
अरूण मित्तल अद्भुत
केशव कुमार कर्ण
शाश्वत शेखर
हर्षवर्धन त्रिवेदी
दिगम्बर नासवा
मनु बेतख्खल्लुस
सुजीत कुमार सुमन
योगेश समदर्शी
एन॰ कन्नन
हरकीरत कलसी 'हकी़र'
नीति सागर
नितिन जैन
चंद्रमणि मिश्रा
तपन शर्मा
योगेश गाँधी
कमलप्रीत सिंह
क्रांति दीक्षित
राहुल कुमार पाण्डेय
अनिरुद्ध सिंह चौहान
सचिन जैन
सुमन कुमार सिंह
सुनील कुमार सोनू
शिवम शर्मा
विपुल श्रीवास्तव
रौशन कुमार
महेश कुमार वर्मा






