फटाफट (25 नई पोस्ट):

कृपया निम्नलिखित लिंक देखें- Please see the following links

सूरज को सज़ा दोगे?


यूनिकवि प्रतियोगिता के फरवरी माह की तीसरी कविता की ओर बढ़ते हैं। इस स्थान की कविता के रचयिता विवेक आसरी की एक कविता हमने पिछले महीने भी प्रकाशित की थी।

पुरस्कृत कविता- सूरज को सज़ा दोगे?

अंधेरा रात के बलात्कार में बिजी है
और सुबह की उम्मीद
बेड के पास पड़ी
सिसक रही है
ख्वाबों के पांव तले की ज़मीन
धीरे-धीरे खिसक रही है
रूह खौल रही है
गुजरते वक्त की तेज होती आंच पर।
किसका बस है !!!
कभी-कभी लगता है
उम्मीद एक फालतू शब्द है
हर रात के बाद दिन होगा
इस तसल्ली से मुझे चिढ़ होती है
मुझसे किसने पूछा था
सुबह और शाम बनाते वक़्त।
न मेरी सहमति ली गई
रात को अंधेरे में छिपाते वक़्त।
तो रोशनी के लिए
मैं क्यों सहर तलक इंतज़ार करूं?
गर रोशनी से पहले
मौत आ गई… उम्मीद को
तो क्या सूरज को सज़ा दोगे?


प्रथम चरण मिला स्थान- पंद्रहवाँ


द्वितीय चरण मिला स्थान- तीसरा


पुरस्कार- कवयित्री निर्मला कपिला के कविता-संग्रह 'सुबह से पहले' की एक प्रति

रहे न तुम वही मिडल क्लास आदमी


छठवें स्थान के कवि विवेक आसरी पिछले पांच साल से दिल्ली में पत्रकारिता में हैं और पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर इनकी कविता को स्थान मिल रहा है। पढ़े और बतायें कि कैसी है?

पुरस्कृत कविता- मिडल क्लास

चलो लिस्ट बनाते हैं
घर के सामान की?
नहीं, जिंदगी के सामान की
अच्छी जॉब
एक घर (3 बेडरूम वाला)
एक कार (बड़े वाली)
एक छोटे वाली भी
शेयर मार्किट में इन्वेस्टमेंट
कुछ जूलरी
एक डायमंड नेकलस (जो ऐड में दिखाते हैं)
विदेश में छुट्टियां (यूरोप प्रेफर्ड, नेपाल नहीं)
दो बच्चे (एक लड़की)
उनकी कॉन्वेंट एजुकेशन
विदेश में डिग्री
फिर उनकी शादी।
उफ्फ !!!
जिंदगी की कोई थोक मार्किट नहीं है क्या !!!
क्यों?
कुछ डिस्काउंट मिल जाता...
रहे न तुम...
वही मिडल क्लास आदमी।।


प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ४, ५, ६॰३५
औसत अंक- ५॰११६७
स्थान- पंद्रहवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰३, ५, ५॰११६७ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ५॰८०५५
स्थान- चौथा


अंतिम चरण के जजमेंट में मिला अंक-
स्थान- छठवाँ
टिप्पणी- कविता अत्यंत औसत दर्जे की है। जब कविता करते हैं तो कविता की संरचना का, उसकी लय-संगति का और उसके कथ्य यानी अंतर्वस्तु के उसके शिल्प यानी कविता के रूप से तादात्म्य अर्थात एकीभाव करने का भी यत्न और श्रम होता है कविता में। अपने इन उद्देश्यों में कविता जितनी सफल होती है,उसी अनुपात में वह सफलता का सोपान चढ़ती है।


पुरस्कार- ग़ज़लगो द्विजेन्द्र द्विज का ग़ज़ल-संग्रह 'जन गण मन' की एक स्वहस्ताक्षरित प्रति।