हिन्द-युग्म की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर गई है। जनवरी 2007 से प्रतिमाह अनवरत रूप से यह प्रतियोगिता आयोजित हो रही है। इस प्रतियोगिता से धीरे-धीरे साहित्य-जगत में एक प्रतिष्ठित स्थान बना लिया है। हिन्द-युग्म ने 19वाँ विश्व पुस्तक मेला में यूनिकवियों को सम्मानित करने के लिए एक समारोह भी आयोजित कर चुका है। वर्ष 2008 में यूनिपाठकों को सम्मानित किया जा चुका है।
अक्सर इस प्रतियोगिता के परिणाम नये महीने के पहले या दूसरे सोमवार को प्रकाशित हो जाते हैं, लेकिन हिन्द-युग्म की 19वें विश्व पुस्तक मेला में भागीदारी से हर वेबप्रस्तुति में थोड़ा विलम्ब हुआ, इसके लिए हम अपने पाठकों और प्रतिभागियों से क्षमाप्रार्थी हैं।
जनवरी 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता के लिए हमें कुल 48 कविताएँ प्राप्त हुईं। निर्णय 2 चरणों में 6 जजों (प्रथम चरण में 3 जज और द्वितीय चरण में 3 जज) द्वारा कराया गया। प्रथम चरण के बाद 29 कविताओं को दूसरे चरण के जजों को भेजा गया। सभी 6 जजों द्वारा मिले अंकों के औसत के हिसाब से एम वर्मा की कविता 'कबूतर तुम कब सुधरोगे?' को यूनिकविता चुना गया।
यूनिकवि- एम॰ वर्मा
एम॰ वर्मा की एक कविता अक्टूबर 2009 की यूनिकवि प्रतियोगिता में पाँचवाँ स्थान बना चुकी है। एम. वर्मा का जन्म वाराणसी के एक कृषक परिवार में हुआ। सम्पूर्ण शिक्षा वाराणसी में हुई (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम. ए.(हिन्दी), बी. एड.)। शुरू से ही कविताओं का शौक रहा। साथ ही नाटकों में भाग भी लेते रहे। ऊहापोह की जिन्दगी और शादी, फिर बच्चे और अंततोगत्वा दिल्ली में ‘राजकीय विद्यालय’ में अध्यापक बन बैठे। बच्चों के बीच बच्चा बन जाने की आदत छोड़े नहीं छूटती जिसके कारण गुरूत्तर शिक्षकीय दायित्व को मजे लेकर निभा रहे हैं। थियेटर का शौक अभी भी जिन्दा है। कभी-कभार नाटकों में भाग लेते रहते हैं। ‘जश्ने बचपन’ में ‘नीली छतरी’ में अभिनय करना इनके लिए अविस्मरणीय बन गया है। कविताएँ लिखना बदस्तूर जारी है। इन्होंने भोजपुरी रचनाएँ भी लिखी। दिल्ली में हिन्दी अकादमी द्वारा आयोजित ‘रामायण मेले’ में भोजपुरी रचना पुरस्कृत हो चुकी है। ब्लॉगजगत का सफर बहुत पुराना नहीं है। मई 2009 से ब्लॉग में रचनाओं को पिरोना प्रारम्भ किया। बदस्तूर जारी सफर कहाँ तक है, ये नहीं जानते।पुरस्कृत कविता- कबूतर तुम कब सुधरोगे?
कबूतर!
तुम कब सुधरोगे ?
आख़िर तुम क्यों कभी
मन्दिर के अहाते में उतरते हो
तो कभी
मस्ज़िद के आले में ठहरते हो?
क्या तुम्हें पता नहीं है
इनका आपस में
कोई वास्ता नहीं है,
मन्दिर से मस्ज़िद तक
या मस्ज़िद से मन्दिर तक
कोई रास्ता नहीं है।
अरे! अगर तुममें
इतनी भी अक्ल नहीं है,
तो क़्यों नहीं तुम हमसे सीखते हो?
क्यों नहीं तुम भी रट लेते हो।
हमारी बौद्धिक पुस्तकों की भाषा,
जिनमें हमें बताया गया है-
मन्दिर में हिन्दू पूजा करते हैं,
मस्ज़िद में मुसलमाँ सजदा करते हैं
जिनमें यह नहीं बताया गया है
ईद, होली भारत का प्रमुख त्यौहार है
वरन जो बतलाता है
ईद मुसलमानों का त्यौहार है
और
होली, दीवाली हिन्दुओं का है पर्व।
अरे! हमसे सीखो
हम अपना धर्म बचाने के लिए
क्या नहीं करते हैं,
कभी बारूद बनकर मारते हैं
तो कभी बारूद से मरते हैं।
एक तुम हो-
जिसे आनी चाहिए शरम
तुम्हें अब तक ये सलीका नहीं आया
कि पहचान सको अपना धरम।
तुम कहाँ थे जब
मन्दिर हथौड़ा लिए खड़ा था,
मस्ज़िद ख़ंजर लिये
हर राह में अड़ा था?
तुम तो सबक लो
हमारी उन्नत सभ्यता से
हम बेशक खुद को नहीं जानते हैं,
पर अपना-अपना धरम
बखूबी पहचानते हैं।
अरे तुम तो
उस दिन से डरो
जब तुम मरोगे!
उस दिन भी क्या तुम
यही करोगे?
कबूतर तुम कब सुधरोगे?
पुरस्कार और सम्मान- समयांतर, की ओर से पुस्तकें तथा हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र। प्रशस्ति-पत्र वार्षिक समारोह में प्रदान किया जायेगा। समयांतर में कविता प्रकाशित होने की सम्भावना।
इनके अतिरिक्त हम जिन अन्य 9 कवियों की कविताएँ प्रकाशित करेंगे तथा उन्हें विचार और संस्कृति की चर्चित पत्रिका समयांतर की ओर से पुस्तकें प्रेषित की जायेंगी, उनके नाम हैं-
रवीन्द्र शर्मा रवि
अखिलेश कुमार श्रीवास्तव
अरविंद श्रीवास्तव
उमेश्वर दत्त निशीथ
मृत्युन्जय ’साधक’
तरुण ठाकुर
अनवर सुहैल
सुमिता केशवा
अनुपमा मोंगा
हम शीर्ष 10 के अतिरिक्त भी बहुत सी उल्लेखनीय कविताओं का प्रकाशन करते हैं। इस बार हम निम्नलिखित 3 कवियों की कविताएँ भी एक-एक करके प्रकाशित करेंगे-
सुरेंद्र अग्निहोत्री
मेयनुर
संगीता सेठी
उपर्युक्त सभी कवियों से अनुरोध है कि कृपया वे अपनी रचनाएँ 10 मार्च 2010 तक अनयत्र न तो प्रकाशित करें और न ही करवायें।
विमल कुमार हेड़ा हिन्द-युग्म को 1 साल से भी ज्यादा पढ़ रहे हैं, परंतु टिप्पणियाँ निरंतर नहीं भेज पाते थे। जनवरी 2010 में इन्होंने हिन्द-युग्म न कि खूब पढ़ा, बल्कि कमेंट भी किया। इसलिए हम विमल कुमार हेड़ा को जनवरी 2010 का यूनिपाठक चुन रहे हैं।
यूनिपाठक- विमल कुमार हेड़ा
जन्म तिथिः 15 जून 1969जन्म स्थान: ग्राम- धमाना, जिला - चित्तोड़गढ़ ( राजस्थान )
शिक्षाः बी. कोम तथा बी. ए.
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.) से
व्यवसायः सर्विस
क्लर्क (असिस्टेन्ट ग्रेड.-3)
राजस्थान परमाणु बिजलीघर, रावतभाटा (राज.)
लेखन कार्यः विगत लगभग 14 वर्षों से कविता लेखन
रूचिः कविता लिखना एवं पढ़ना एवं साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेना।
साहित्यः स्थानीय पत्र पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन।
पुरस्कार और सम्मान- विचार और संस्कृति की चर्चित पत्रिका समयांतर की ओर से पुस्तकें तथा हिन्द-युग्म की ओर से प्रशस्ति-पत्र।
इस बार हमने दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के विजेता पाठकों के लिए हमने क्रमशः विनोद कुमार पाण्डेय, निर्मला कपिला और सफरचंद को चुना है। इन तीनों विजेताओं को भी विचार और संस्कृति की चर्चित पत्रिका समयांतर की ओर से पुस्तकें भेंट की जायेगी।
हम उन कवियों का भी धन्यवाद करना चाहेंगे, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाया। और यह गुजारिश भी करेंगे कि परिणामों को सकारात्मक लेते हुए प्रतियोगिता में बारम्बार भाग लें। इस बार शीर्ष 13 कविताओं के बाद की कविताओं का कोई क्रम नहीं बनाया गया है, इसलिए निम्नलिखित नाम कविताओं के प्राप्त होने से क्रम से सुनियोजित किये गये हैं।
अर्पिता नायक
दिलशेर ’दिल’
साबिर अली ’घायल’
दीपक कुमार
रोशन कुमार
विनोद कुमार पांडेय
रविकांत अनमोल
प्रियंका सिंह
कमल किशोर सिंह
भावना सक्सेना
विजय सिंह
चंद्रकांत सिंह
कमल प्रीत सिंह
अजय दुरेजा
शशि सागर
गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’
हिमानी दीवान
मनसा आनंद ’मानस’
अभिषेक ताम्रकार
अर्जुन सिंह
डॉ श्याम गुप्त
कविता रावत
डॉ अनिल चड्डा
अनिरुद्ध यादव
अम्बरीष श्रीवास्तव
मनीष जैन
आलोक गौर
अजीत पांडेय
उमेश चंद्र
अनामिका (सुनीता)
अनु केवलिया
रवीश रंजन
बोधिसत्व कस्तुरिया
अरविंद कुरील
देवेश पांडे






