
मूलतः दक्षिणी राजस्थान के वनवासी बहुल डूंगरपुर जिले के ओबरी गाँव के निवासी 37 वर्षीय जितेन्द्र दवे पढाई में बी.कॉम, प्रबंध में एम.कॉम. एवं बी.एड. के बाद पत्रकारिता एवं जनसंचार में अध्ययन किया लेकिन इसे बीच में छोड़कर मुख्यधारा की पत्रकारिता में हाथ आजमाया। दैनिक भास्कर उदयपुर संस्करण के लिए बतौर डूंगरपुर जिला संवाददाता काम किया। लेकिन इससे भी तौबा करके वर्ष २००० में मुम्बई के विज्ञापन जगत का रुख किया, जहां मन रम गया और विगत ९ वर्षो से उसी में सक्रिय। २० वर्षो से कविता लेखन के अलावा, कार्टूनिंग, लघु कहानी, ग़ज़ल, दोहों, हाइकु, फीचर आलेख में भी रुचि। राजस्थान साहित्य अकादमी के मासिक 'मधुमती' सहित राजस्थान पत्रिका, जागती जोत (राजस्थानी), दैनिक नवज्योति, प्रात:काल, हाइकु दर्पण, युगनाद एवं वेब पत्रिका अनुभूति, वेबदुनिया, काव्यालय, में भी काव्य प्रकाशित। इसके अलावा राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, इनाडू, इतवारी, हिंद माता, न्यूज पिच, आदि पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित। बालहंस, सुमन सौरभ, सरिता, आदि में कार्टून प्रकाशित। राजस्थान विद्यापीठ अंतर विश्वविद्यालयी पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान-१९९८। हिन्दुस्तान टाइम्स कार्टून कंटेस्ट में 'सर्टिफिकेट ऑफ़ मेरिट' प्राप्त। एक कविता संकलन एवं एक हाइकु संकलन के लिए पांडुलिपि तैयार है और प्रकाशक की तलाश है.
इनके लिए कविता एक ऐसा जीवन रसायन है, जो इन्हें अपनी कई व्याधियों से तो राहत देता ही है....पाठकों के व्यापक फलक में घुलकर उनकी 'अनकही' को भी 'कही' कर देता है...और रचनाकर्म को सार्थक कर देता है। आज हम इनकी एक कविता के साथ उपस्थित हैं, जिसने आठवाँ स्थान बनाया है।
पुरस्कृत कविता- सरहदेंसरहदें हैं..
कुछ मुटावों की
शिकवों-गिलों की
तैनात है जहां
अपने-अपने अहम्
पैनी निगाहों के साथ
मगर हवाओं में खुशबू सी
सूरज के उजियारे सी
खलिश रुकी कहाँ
अपनापन थमा कहाँ
अपनी-अपनी सरहदों में
कैद हैं हम..
कुछ खलिश लिए
और कुछ अपनापन भी.
प्रथम चरण मिला स्थान- उन्नीसवाँ
द्वितीय चरण मिला स्थान- आठवाँ
पुरस्कार- राकेश खंडेलवाल के कविता-संग्रह 'अंधेरी रात का सूरज' की एक प्रति।