दिल्ली बीचो-बीच में भवन भव्य विज्ञान
कर्मठता का पुलिस को, मिलना था सम्मान
मिलना था सम्मान, सो पहुँचे सभी वक्त पर
मोटी - मोटी तोंदों वाले आला अफसर
लम्बे - पतले, मोटे - छोटे, नाटे - गट्टे
अब तक शक्ल दिखी ना जिनकी हुए इकट्ठे
चेहरे रगड़ मलाई, सेंट लागाकर आये
उचक उचक कर तकें कि कब कोई हमें बुलाये
अवार्ड बेस्ट मुस्तैदी का जब पा गया कुत्ता
हुई सिपाही अफसर में फिर गुत्थम-गुत्था
अवार्ड दिलाने के लिये इसने पैसे खाये
तील साल में मुझसे छ: छोछक दिलवाये
उछल उछल कर कुत्ता मंच पर उड़ाये खिल्ली
देशभक्त या द्वेषभक्त, बदल रही है मेरी दिल्ली






