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Wednesday, May 04, 2011

बात चलेगी धीरे-धीरे



मार्च प्रतियोगिता के चौथे पायदान पर एक नया नाम हिंद-युग्म से रचनाकार के तौर पर जुड़ा है। राकेश जाज्वल्य की यह कहीं भी प्रकाशित पहली रचना है। छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखने वाले राकेश का जन्म 1972 मे रायपुर मे हुआ। प्राथमिक शिक्षा जांजगीर मे हुआ, तत्पश्चात इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से कृषि विज्ञान मे परास्नातक किया है। वर्तमान मे क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र रायगढ़ से बतौर वैज्ञानिक संबद्ध हैं। छात्र-जीवन से ही रंग-कर्म और साहित्य मे अभिरुचि रखने वाले राकेश बताते हैं कि "पिता (स्वर्गीय) श्री व्ही. एल. बनवासी जांजगीर में वरिष्ठ कवि के रूप में प्रतिष्ठित रहे किन्तु मुझे कविता में तब विशेष रूचि नहीं थी। कालेज की शिक्षा के बाद जब अनुसन्धान कार्यों में संलग्न रहने के कारण थिएटर में समय देना सहज नहीं रहा तब लम्बे विराम के बाद अचानक ही पिछले दो वर्षों से सृजनात्मकता कविता के रूप में अभिव्यक्त हुई।"
पता: राकेश बनवासी जाज्वल्य
द्वारा- श्री व्ही. एल. बनवासी
पुराना जिला चिकित्सालय, पानी टंकी के पास,
जांजगीर, जिला- जांजगीर. (छत्तीसगढ़.)
संपर्क- 094255-73812

पुरस्कृत रचना: गज़ल

बात चलेगी  धीरे-धीरे.
रात ढ़लेगी  धीरे-धीरे.

गीली लकड़ी इंतज़ार की,
आँख जलेगी धीरे-धीरे.

गर रिश्तों पर बर्फ जमी तो,
साँस गलेगी   धीरे-धीरे.

एक दुआ लब पर शिकवों के,
साथ  पलेगी  धीरे-धीरे.

लेकर चाँद का भोला चेहरा,
रात छलेगी  धीरे- धीरे.

ख़्वाब फ़लक पे बौरायेंगें,
याद फलेगी  धीरे-धीरे.
________________________
पुरस्कार: हिंद-युग्म की ओर से पुस्तकें।


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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

आलोक उपाध्याय का कहना है कि -

Kya baat hai .. babut khoob

Mubarak Ho ...
Alok Upadhyay "Nazar"

Phoenix.. का कहना है कि -

सुंदर..!!

Disha का कहना है कि -

सुंदर रचना
कवि मंडली में स्वागत है।

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ का कहना है कि -

सुंदर रचना के लिए बधाई। "ढ़लेगी" की जगह "ढलेगी" होगा।

RAKESH JAJVALYA राकेश जाज्वल्य का कहना है कि -

Alok ji, Phoenix..ji aur Disha ji....

aap sab ka bahut-bahut shukriya.

RAKESH JAJVALYA राकेश जाज्वल्य का कहना है कि -

Dharmendra ji...

aapne sahi kaha, dhyaan dilane ke liye dhanyavaad.

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो का कहना है कि -

खुबसूरत गजल....

आकर्षण

atul का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
atul का कहना है कि -

गर रिश्तों पर बर्फ जमी तो,
साँस गलेगी धीरे-धीरे.

एक दुआ लब पर शिकवों के,
साथ पलेगी धीरे-धीरे.
Rakesh ji behtar gajal hai.sabd-sabd man ko choo rahe hai.

RITESH का कहना है कि -

अच्छी रचना है ...... बिना कोई लाग लपेट के ज्यो का त्यों कहना अच्छा लगा ........
कविता की सरलता मन मोह लेती है........

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