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Saturday, January 30, 2010

चलना एकाएक नहीं आता


चलना एकाएक नहीं आता...
घुटने-घुटने चली
घड़ी-घड़ी गिरी
लड़खड़ाई, चोट खाई,
और धीरे-धीरे नन्हे कदमों को
चलना आ गया...

पर मेरा मन...
उसने अभी चलना नहीं सीखा
और ज़िन्दगी भी
"घर का आँगन" तो नहीं,

एक जाल-सा है यहाँ
रास्तों और मंज़िलों का
एक जंगल-सा है
'अपने' और 'परायों' का...

हर सुबह एक नयी जंग होती है
सच और झूठ की
कुछ ख्वाब हारते हैं
कुछ आदर्श ढहते हैं
कुछ विश्वास घायल होते हैं
कुछ बचपन मरता है
और हर शाम
खून से लथपथ मेरा मन
कुछ और बड़ा होता है...

कवयित्री- स्मिता पाण्डेय

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16 कविताप्रेमियों का कहना है :

वाणी गीत का कहना है कि -

जिंदगी घर का आँगन तो नहीं ...
एक जंगल है अपने और परायों का
क्या बात है ....भावपूर्ण रचना ...!!

ह्रदय पुष्प का कहना है कि -

ज़िन्दगी भी
"घर का आँगन" तो नहीं,
.........
हर सुबह एक नयी जंग होती है
सच और झूठ की
कुछ ख्वाब हारते हैं
कुछ आदर्श ढहते हैं
कुछ विश्वास घायल होते हैं
कुछ बचपन मरता है
और हर शाम
खून से लथपथ मेरा मन
कुछ और बड़ा होता है...
जिंदगी की जद्दोजहद को बयाँ करती बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना.

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

जिंदगी में कोई भी चीज़ हम अभ्यास के बिना नही सीख पाते है और अभ्यास और कड़ी मेहनत से हर असंभव चीज़ को संभव भी बनाया जा सकता है....कविता के माध्यम से बहुत बढ़िया बात कही आपने...बढ़िया शैली सुंदर रचना...बधाई हो इस बढ़िया रचना के लिए..

निर्मला कपिला का कहना है कि -

हर सुबह एक नयी जंग होती है
सच और झूठ की
कुछ ख्वाब हारते हैं
कुछ आदर्श ढहते हैं
कुछ विश्वास घायल होते हैं
कुछ बचपन मरता है
और हर शाम
खून से लथपथ मेरा मन
कुछ और बड़ा होता है...
आदमी के अन्तरदुअन्द की सुन्दर तस्वीर बहुत भावमय रचना है धन्यवाद्

संजय भास्कर का कहना है कि -

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay kumar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

manu का कहना है कि -

और ज़िन्दगी भी
"घर का आँगन" तो नहीं,

बहुत खूब...

और..

और हर शाम
खून से लथपथ मेरा मन
कुछ और बड़ा होता है...

कमाल का लिखा है बच्चे तुमने....
तुम्हारी रचनाओं पर आना ही पड़ता है हमें...अगर पता लगे तो..

जीती रहो ..खुश रहो...हमेशा....

ढेरों आशीर्वाद... अनगिनत दुआएं...
जीयो बेटा...

rachana का कहना है कि -

puri kavita kamal ki hai

janti ho khoon se ...........
thoda aur bada ho jata hai

itni sunder baat hai ki mujhe yad rahegi ye line

rachana

गीता पंडित (शमा) का कहना है कि -

आह !!!!! यही तो है
जो बेबस कर देता है लिखने के लियें....

बहुत सुंदर....

स-स्नेह
गीता

Guftugu का कहना है कि -

बहुत खूब ,मुबारकबाद सुन्दर भावों के लिए
किसी ने ठीक ही कहा है,
"क्या भरोसा है जिंदगानी का,
आदमी बुलबुला है पानी का"
स्मितामिश्रा

तपन शर्मा का कहना है कि -

और हर शाम
खून से लथपथ मेरा मन
कुछ और बड़ा होता है...

kya baat hai smita ji.. bahut khoob...

सजीव सारथी का कहना है कि -

बहुत बढ़िया

prem ballabh pandey का कहना है कि -

I have read all poems of Smita and it seems that she is an emerging poet
but she takes the worldly affairs more seriously than it needed.

Anonymous का कहना है कि -

very nice - Venkat Achanta

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

स्मिता,

आपमें भविष्य की कवयित्री को मैं हमेशा से देखता हूँ।

Anonymous का कहना है कि -

Chalana Kaisey Seekha?
Ruk-Ruk Kar, Gir-Gir kar
Ab to Doudiye Chillakar.
No one Can Catch, If Smita Run.
Ready, Steady, Go..........
*****

prem ballabh pandey का कहना है कि -

मन जिस नाम की चिड़िया है उसका स्वभाव ही डावांडोल होते रहना है.ये तो सुबह कुछ कहता है और शाम को कुछ और.

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