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Monday, December 21, 2009

जीने दो उसे


यूनिकवि प्रतियोगिता के नवम्बर अंक की छठवीं कविता भावना सक्सैना की है। भावना सक्सैना हिन्द-युग्म के 'हिन्दी-ख़बरें' के लिए सूरीनाम की साहित्यिक-सांस्कृतिक रिपोर्टें भेजती रही हैं। केंद्र सरकार की सेवा में कार्यरत भावना सक्सैना आजकल सूरीनाम में अताशे (हिंदी व संस्कृति) के पद पर प्रतिनियुक्त हैं और वहाँ हिंदी प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से अँग्रेजी और हिंदी में स्नातकोत्तर व अनुवाद प्रशिक्षण में स्वर्ण पदक प्राप्त भावना ने विद्यालय स्तर से ही कविता सृजन आरंभ किया।





पुरस्कृत कविता- वह तुम्हारा है

क्यों चाहते हो
उसमें सब खूबियाँ
एक अच्छे इंसान की,
सुघड़ आदतें,
व्यवस्थित जीवन।
ताकि .....
उसे मेडल, ट्रॉफी की तरह
आगे कर सको
और कह सको-
देखो मेरा है
और उसे मिली
प्रशंसा को
अपनी टोपी में लगा सको
एक खूबसूरत पंख की तरह।

जीने दो उसे
उसका जीवन
अल्हड़,
बेपरवाह
संकोचहीन।

उसके अपने अनुभव
ढाल देंगे उसे
और तप कर बन जाएगा कुंदन।

जीने दो उसे
क्योंकि.....
वह तुम्हारा है,
बस तुम्हारा।


पुरस्कार- विचार और संस्कृति की मासिक पत्रिका 'समयांतर' की ओर से पुस्तक/पुस्तकें।

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6 कविताप्रेमियों का कहना है :

निर्मला कपिला का कहना है कि -

और उसे मिली
प्रशंसा को
अपनी टोपी में लगा सको
एक खूबसूरत पंख की तरह।

जीने दो उसे
उसका जीवन
अल्हड़,
बेपरवाह
संकोचहीन।
बहुत सुन्दर भाव हैं लेखक इस के लिये बधाई की पात्र हैं। धन्यवाद्

Devendra का कहना है कि -

इस छोटी सी कविता में सब कुछ है
पढ़कर बहुत खुशी हुई
बधाई.

मनोज कुमार का कहना है कि -

अच्छी रचना बधाई।

sumita का कहना है कि -

जीने दो उसे
क्योंकि.....
वह तुम्हारा है,
बस तुम्हारा।
बहुत ही खूबसूरत कविता...बधाई!

परमजीत बाली का कहना है कि -

अच्छी रचना बधाई।

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

उसके अपने अनुभव
ढाल देंगे उसे
और तप कर बन जाएगा कुंदन।

जीने दो उसे
क्योंकि.....
वह तुम्हारा है,
बस तुम्हारा।

लाज़वाब भाव...बहुत बढ़िया रचना..भावना की बहुत बहुत बधाई

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