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Wednesday, November 04, 2009

ग़म क्या एक बताशा है-


पल में तोला,पल में माशा है
जीवन भी क्या खूब तमाशा है

मुंह में डालो बस घुल जाएगा
यारो ,ग़म क्या एक बताशा है

जाने क्यों रहती मुझको हरदम
तुझसे मिलने की अभिलाषा है

वक्त बुरा आने पर आ जाती
हर इक मन में एक हताशा है

घर लौट सदा जो आ जाती है,
वो दोशीजा ही तो आशा है

नासमझो को समझा पाओगे
यार गजल उल्फ़त की भाषा है

श्याम सखा ने तो वक्त्न-फ़वक्त्न
गज़लों में माहौल तराशा है
or

‘श्याम’तुझे हम मान गये,तूने
यार गजल को खूब तराशा है

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12 कविताप्रेमियों का कहना है :

पी.सी.गोदियाल का कहना है कि -

पल में तोला,पल में माशा है
जीवन भी क्या खूब तमाशा है

मुंह में डालो बस घुल जाएगा
यारो ,ग़म क्या एक बताशा है

वाह, बहुत सुन्दर !

वन्दना का कहना है कि -

bahut hi sundar bhav.

M VERMA का कहना है कि -

पल में तोला,पल में माशा है
जीवन भी क्या खूब तमाशा है
वाह क्या कहने बहुत सरलता से सब कुछ कह डाला

Apoorv का कहना है कि -

मुंह में डालो बस घुल जाएगा
यारो ,ग़म क्या एक बताशा है

क्या बात है, इतनी खूबसूरत बात, इतने खूबसूरत शेर के साथ..बेहद शोख और जिंदादिल गज़ल है..अशआरों को पॉजिटिवटी के रंग देती हुई..
’उलफ़्त’ की वर्तनी कुछ खटकती है..

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

मुंह में डालो बस घुल जाएगा
यारो ,ग़म क्या एक बताशा है,

वाह, बहुत सुन्दर गज़ल...

महावीर का कहना है कि -

बहुत ख़ूब!
पल में तोला,पल में माशा है
जीवन भी क्या खूब तमाशा है

वक्त बुरा आने पर आ जाती
हर इक मन में एक हताशा है
क्या बात है!!

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

एक सामन्य सी ग़ज़ल |

ठूस कर भरा शेर है मानो -

जाने क्यों रहती मुझको हरदम
तुझसे मिलने की अभिलाषा है

आप से और अच्छे शेर मिलेंगे, ऐसी कामना के साथ ...


अवनीश तिवारी

Anonymous का कहना है कि -

thode shbdon men gahri baaten

v n misra

Anonymous का कहना है कि -

आपने सही कहा है |

नासमझो को समझा पाओगे
यार गजल उल्फ़त की भाषा है

सच में आपका ब्लॉग एवं उसमे रखी
जो गजल है वह वाकई में दिल को स्पर्स्ती है |

kaviraj का कहना है कि -

आपने सही कहा है |

नासमझो को समझा पाओगे
यार गजल उल्फ़त की भाषा है

सच में आपका ब्लॉग एवं उसमे रखी
जो गजल है वह वाकई में दिल को स्पर्स्ती है |

Anonymous का कहना है कि -

मुंह में डालो बस घुल जाएगा
यारो ,ग़म क्या एक बताशा है


काश ऐसा होता
नीलम

Anonymous का कहना है कि -

Aveeneesh ne sahi kaha. saadhaaran ghazal.
Vivek

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