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Wednesday, September 30, 2009

कहो पागल उसे दीवाना कहो ना-श्याम सखा



नहीं कहना अगर सहरा को सहरा

वही किस्सा पुराना सा कहो ना
बहुत प्यारा है दोबारा कहो ना


नहीं कहना अगर सहरा को सहरा

इसे तुम रेत का दरिया कहो ना


जरूरत है कहां रिश्तों की हमको

मेरी जां बस मुझे अपना कहो ना


नहीं अच्छा घुमाकर बात करना

जो भी कहना है बस सीधा कहो ना


अचानक आज हम तुम जो मिले हैं
है
क्या ये सच,या है सपना कहो ना

सदा जो नाचती बंशी की धुनपर

उसे राधा कहो श्यामा कहो ना


फ़िरे है श्याम खुद को ढूंढ़ता सा
उसे पागल या दीवाना कहो ना


मफ़ाएलुन,मफ़ाएलुन,फ़ऊलुन 128 sh,zind

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18 कविताप्रेमियों का कहना है :

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

जरूरत है कहां रिश्तों की हमको
मेरी जां तुम मुझे अपना कहो ना ,
श्याम जी, हमेशा की तरह बेहतरीन ग़ज़ल....
धन्यवाद

Murari Pareek का कहना है कि -

नहीं अच्छा घुमाकर बात करना
जो भी कहना है बस सीधा कहो ना|
बहुत सुन्दर!
पर किस्से वो सब ख़त्म हुए !! अब हकीकत कहो सच्चाई कहो ना!!

वाणी गीत का कहना है कि -

नहीं अच्छा घुमाकर बात करना
जो भी कहना है बस सीधा कहो ना|
दीवाने पागल को दीवाना कहा तो क्या कहा ..
चलता रहे कहना सुनना ...
बहुत शुभकामनायें ...!!

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

पर किस्से वो सब ख़त्म हुए !! अब हकीकत कहो सच्चाई कहो ना!!
आभार मुरारी जी एक और शे‘र की जमीन देने को
मैं एक टाइपिंग गलती सुधारने आया था तभी आपका क्मेन्ट पढा
सदा कहता तुम्हे अपना है ये ‘श्याम’
है तो झूठा मगर सच्चा कहो ना
श्याम सखा श्याम

Anonymous का कहना है कि -

एक अच्छी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई, धन्यवाद
विमल कुमार हेडा

डॉ टी एस दराल का कहना है कि -

फ़िरे है ‘श्याम’ खुद को ढूंढ़ता सा
कहो पागल उसे दीवाना कहो ना

खुद को ढूँढना इतना मुश्किल है, तभी तो सभी तलाश में लगे है.
अच्छी रचना, पढ़कर आनंद आया.

neeti sagar का कहना है कि -

जरूरत है कहां रिश्तों की हमको
मेरी जां बस मुझे अपना कहो ना

bahut achchi rachna dhanywaad!

Manju Gupta का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
Sumita का कहना है कि -

जरुरत कहां रिश्तों की हमको...सुन्दर रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई!

Manju Gupta का कहना है कि -

Devnaagri mein nhin likhaa jaa rhaa hae .
laajvaab gzal ne sahaaraa kaa registaan yaad kraa diyaa .

MANOJ KUMAR का कहना है कि -

एक बहुत ही अच्छी ग़जल पढ़कर दिनभर की दफ़्तर की थकान दूर हो गई। पर कभी-कभी सहरा को सहरा न कहने में ही भलाई है क्योंकि-
बात अच्छी है, तो उसकी हर जगह चर्चा करो,
है बुरी तो दिल में रक्खो, फिर उसे अच्छा करो।

Nirmla Kapila का कहना है कि -

सारी गज़ल बहुत खूबसूरत है सखा जी को बधाई

Harihar का कहना है कि -

श्याम जी, गज़ब बस ! मैं तो पढ़ कर घायल हो
गया

sumit का कहना है कि -

काफी समय बाद ग़ज़ल पढने आया,ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी

sumit का कहना है कि -

नहीं कहना अगर सहरा को सहरा
इसे तुम रेत का दरिया कहो ना

फ़िरे है ‘श्याम’ खुद को ढूंढ़ता सा
उसे पागल या दीवाना कहो ना

ye do sher bahut acche lage....

Anonymous का कहना है कि -

बहुत खुबसूरत श्याम जी.

वही किस्सा पुराना सा कहो ना
बहुत प्यारा है दोबारा कहो ना

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत खुबसूरत श्याम जी.

वही किस्सा पुराना सा कहो ना
बहुत प्यारा है दोबारा कहो ना

caiyan का कहना है कि -

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