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Thursday, July 02, 2009

उसके वादे हैं जी लुभाने की शय


शोला-ए-ग़म में जल रहा है कोई
लम्हा-लम्हा पिघल रहा है कोई

शाम यूँ तीरगी में ढलती है
जैसे करवट बदल रहा है कोई

उसके वादे हैं जी लुभाने की शय
और झूठे बहल रहा है कोई

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

दिल की आवारगी के दिन आये
फिर से अरमाँ मचल रहा है कोई

मुझको क्योंकर हो एतबारे-वफ़ा
मेरी जाने-ग़ज़ल रहा है कोई

मनु बेतखल्लुस

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28 कविताप्रेमियों का कहना है :

ओम आर्य का कहना है कि -

एक शानदार नज़्म जिसमे भावनाओ का ढेर है ............बहुत ही सुन्दर

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत ही बढिया !!

neelam का कहना है कि -

उसके वादे हैं जी लुभाने की शय
और झूठे बहल रहा है कोई

bahut khoob .

Nirmla Kapila का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है को
लाजवाब वैसे मनुजी की तो मैं पहले ही फैन हूँ इस सुन्दर नज़्म के लिये बहुत बहुत बधाई

Manju Gupta का कहना है कि -

Gazal prawavshali hai.
Aabhar.

स्वप्निल कुमार 'आतिश' का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

waaaaaah manu ji .badhiya sher bana hai ...achhi ghazal hui hai

pooja का कहना है कि -

दिल की आवारगी के दिन आये
फिर से अरमाँ मचल रहा है कोई
क्या बात है मनुजी? कॉलेज के दिन याद आ रहे हैं क्या ? :)

उसके वादे हैं जी लुभाने की शय
और झूठे बहल रहा है कोई

मुझे लगता है कि इसमें "से" शब्द शायद टाइप नहीं हुआ है....

और झूठ से बहल रहा है कोई......????

rachana का कहना है कि -

मनु जी
आप की ग़ज़ल देख के एक सुखद आश्चर्य हुआ .
ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई
ये शेर क्या कहने जब चाहत हद से ज्यादा हो तो शायद असा ही होता है सुंदर सोच
उसके वादे हैं जी लुभाने की शय
और झूठे बहल रहा है कोई
क्या कहने .किस किस के बारे में लिखूं सबभी शेर बहुत अच्छे हैं
सादर
रचना

manu का कहना है कि -

पूजा जी ,

और झूठे बहल रहा है कोई

मैंने तो इसे ऐसे ही लिखा है,
( मेरा मतलब ये है के झूठ-मूठ ही खुद को बहलना ...या खुद ही बहलना..
उसके वादे मेरे लिए दिल लुभाने की बातें हैं और मैं खुद ही बहल रहा हूँ...)
रचना जी,
ये आश्चर्य तो आज खुद मुझे भी हुआ है...
सभी को धन्यवाद,,,,
निर्मला जी,
ऐसे मुझ को अपना फैन कह कर शर्मिन्दा न करें ,,,मैं बहुत छोटा हूँ ( अर्श सा ही समझिये ,,)
bas sneh banaye rakhein...

'अदा' का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
RC का कहना है कि -

मुझको क्योंकर हो एतबारे-वफ़ा
मेरी जाने-ग़ज़ल रहा है कोई

Speechless!

God bless
RC

Harkirat Haqeer का कहना है कि -

दिल की आवारगी के दिन आये
फिर से अरमाँ मचल रहा है कोई

वाह....वाह....मनु जी ये कम्बखत दिल भी मौसम देख के रंग बदलने लगता है .....बहुत खूब....!!

मुझको क्योंकर हो एतबारे-वफ़ा
मेरी जाने-ग़ज़ल रहा है कोई

वाह......क्या अदा है .....!!

अर्चना तिवारी का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई...

बहुत सुंदर ग़ज़ल है

Deep का कहना है कि -

raha nahi gaya...
bahut hi khoobsurat ghazal kahi hai manu ji

aur yeh do sher to bahut hi pyaare kahe hain

शाम यूँ तीरगी में ढलती है
जैसे करवट बदल रहा है कोई

aur

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

ise kehte hain ek kaamyaab ghazal

محمد احسن का कहना है कि -

computer se duur tha, deri ke liye mu'afi.
bahut hi khoobsoorat ghazal. shaaed hi kisi she'er mein kahiin koi khaami ho.
ba nek khwahishaat
محمد احسن

mohammad ahsan का कहना है कि -

غزل اردو کی تو داد بھی یردو میں - احسن

तपन शर्मा का कहना है कि -

मनु जी ये शे’र पसंद आया..

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई...

अहसन जी.. मनु जी से गुपचुप बात करने का सही रास्ता निकाला है... उर्दू.. ह्म्म्म्म्म

vinay k joshi का कहना है कि -

वाह ! बहुत ही अच्छा लगा | सभी शे'र एक से बढकर एक |
बधाई |

Mansoor Ali का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

umda sher, khubsurat guman, khubsurat khayal

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

उम्दा ग़ज़ल मनु जी
हर शेर शानदार !!!

How beautifully u write
Amazing !!

Ambarish Srivastava का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

एक शानदार नज़्म!
बहुत बहुत बधाई !

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

मनु जी,

पूरी गज़ल ही लाजवाब है। फिर भी मैं इन दो शेरों को अपने बहुत करीब पाता हूँ :-

उसके वादे हैं जी लुभाने की शय
और झूठे बहल रहा है कोई

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई

इस बार तो मुलाकात होनी ही चाहिये।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

Harihar का कहना है कि -

दिल की आवारगी के दिन आये
फिर से अरमाँ मचल रहा है कोई

बहुत शानदार नज़्म ! मनुजी, बधाई

devendra का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई।
--वाह, मनुजी!
पूरी गज़ल इतनी बेहतरीन है कि जबसे पढ़ी है मिजा़ज आशिकाना है।
--अभी और भी शहरों की बर्बादी का खतरा है।
-देवेन्द्र पाण्डेय।

विपुल का कहना है कि -

शानदार प्रस्तुति मनु जी...

sada का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है कोई ।

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति आभार्

Shamikh Faraz का कहना है कि -

ख्वाब में भी गुमां ये होता है
जैसे पलकों पे चल रहा है को

शानदार ग़ज़ल.

shanno का कहना है कि -

मनु जी,
देरी हो गयी है लेकिन बधाई देने में देर-अबेर हो जाने से ग़ज़ल की खूबसूरती व उसे लिखने वाले की शान में कोई कमी नहीं आती है. इतने दिनों के बाद आज अपनी सहेली.....मेरा मतलब है अपनी लैपटॉप के साथ समय फिर से बिताने का मौका मिला है. तो सबसे पहले आपको इतनी खूबसूरत ग़ज़ल लिखने के लिए ढेरों बधाइयाँ. आगे भी इंतज़ार रहेगा आपकी ग़ज़लें पढने का.

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