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Wednesday, January 14, 2009

युद्ध धर्म



शत्रु सीमा पर खड़ा ललकारता
तू हाथ बाँध ईश को पुकारता ।
वीरता की यह नही पहचान है
हटना युद्ध धर्म से अपमान है ।

त्याग, तप, जप का यहाँ क्या काम है
संहार - शत्रु वीरों की शान है ।
लावा जो हृदय में है दहक रहा
बहने दो ज्वालामुखी भभक रहा ।

बिगुल नही तुमने बजाया, सच है
समर कब तुमने था चाहा, सच है ।
तू हाथ जोड़ अब दिखा न दीनता
इस समर को जीतना ही वीरता ।

अर्थ, स्वार्थ, काम जहां अविराम है,
संघर्ष कुलिष ही वहां परिणाम है ।
उठती हैं जब रण में चिनगारियाँ
याद करो अपनी तुम सरदारियाँ ।

निरीह बन गीत विनय के गा नही
सरल, सरस, अनुनय अब अपना नही ।
हाथ ले अंगार चल अब उस दिशा
प्राण मोह त्याग, मिटा काली निशा ।

अग्नि सी धधक, उबाल रख रक्त में
शत्रु दमन कर उसे गिरा गर्त में ।
वीर बन शक्ति रख, हो सदा विजयी
आग बन राख कर, हो सदा विजयी ।

कवि कुलवंत सिंह


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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

RC का कहना है कि -

Nice, Kulwant ji.

Kisi buzurg ko kehte suna ... "is desh ne azadi ke liye utna khoon nahi bahaya jitna aazadi maangti hai. Abhi aur khoon bahega. Tab tak is desh ke logon ko sone do."

RC

Nirmla Kapila का कहना है कि -

bahut badiaa rachnaahai badhaai

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

बड़ी ओजपूर्ण रचना है |

बधाई |

अवनीश तिवारी

neelam का कहना है कि -

jo bole so nihaal ,sat eri akaal

tussi to chaa gaye kulwant ji ,

kinna badhiya likhte ho tussi

mubaarkan ji mubaarkan

तपन शर्मा का कहना है कि -

बहुत बढ़िया कुलवंत जी

sahil का कहना है कि -

dam hai ji...
bahut achhI PRASTUTI..
ALOK SINGH "SAHIL"

रंजना का कहना है कि -

वाह ! कर्तब्य का स्मरण कराती अतिसुन्दर ओजपूर्ण इस कविता हेतु आभार और नमन..

दिगम्बर नासवा का कहना है कि -

बेहतरीन कविता
देश प्रेम से ओत-प्रेत, बाजू में तूफ़ान भरती

संजीव सलिल का कहना है कि -

देशप्रेम के गीत गा, होता है कवि धन्य.
'सलिल' तभी होती कलम, उसकी सफल प्रणम्य.

कविकुल की कुलवंत जी, रखें मान औ' शान.
दिग्दिगंत में गुंजायें, माँ का गौरव गान.

rachana का कहना है कि -

बिगुल नही तुमने बजाया, सच है
समर कब तुमने था चाहा, सच है ।
तू हाथ जोड़ अब दिखा न दीनता
इस समर को जीतना ही वीरता ।
बहुत ओज से भरी कविता सुंदर कविता
सादर
रचना

Kavi Kulwant का कहना है कि -

aap sabhi ne itna pyaar diya...
natmastak hun..!!

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