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Saturday, January 24, 2009

दर्द


बुधिया और चाँद के बाद अब दर्द पर नयी श्रंखला की शुरुआत कर रहा हूँ पहले सा स्नेह अपेक्षित है...

दर्द-1

मेरा दर्द जब भला चंगा था
तो मैं नाकारा था
कुछ नहीं करने देता था मुझे !
देखो..
समय की धूल से
अस्थमा हो गया है दर्द को
अब दर्द जब खांसता है..
तो उसे देता हूं मैं
यादों की इनहेलर!
और बदले में
मांग लेता हूं उससे
एक प्यारी सी कविता..

दर्द-2

सुबह सोकर उठा
तो सिरहाने
कुर्सी पर बैठा
काफी पीता मिला दर्द
बोला- गुड मार्निंग !
शिष्टाचारवश मुझे भी करनी पडी
उसके अच्छे दिन की कामना
फिर पूछ लिया-कैसे हो?
तो ज़ोर से हंस पडा वो
फिर गम्भीर हो गया
और मेरा हाथ
अपने हाथों में लेकर
बडी कृतज्ञता से बोला-
अच्छा हूं...

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14 कविताप्रेमियों का कहना है :

अनिल कान्त : का कहना है कि -

आपके दर्द से दो चार हुआ .... ...साथ ही साथ अच्छा लेख पढने को मिला ...


अनिल कान्त
मेरा अपना जहान

सीमा सचदेव का कहना है कि -

दर्द पीडा पर आपकी छोटी छोटी कवितायें मन को छु गयी
और महादेवी जी की पंक्तियाँ याद आ रही है
तुमको पीडा में ढूंढा
तुममे ढूंढूंगी पीडा
पीडा मेरे मानस से भीगे पट सी लिपटी है
बधाई

Harkirat Haqeer का कहना है कि -

तो ज़ोर से हंस पडा वो
फिर गम्भीर हो गया
और मेरा हाथ
अपने हाथों में लेकर
बडी कृतज्ञता से बोला-
अच्छा हूं...

in paktiyon k sath jo vyang k tour pr dard ki pida hai wahi kavita ki utkristta hai....

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

वाह!
दोनों लघुकविताएँ एक से बढकर एक हैं। दूसरी तुमने पहले हीं पढा दी थी इसलिए पहली ने मुझपर ज्यादा असर किया। वैसे दूसरी की अंतिम पंक्तियों में बहुत गहराई है।
तुम सफल हुए हो। बधाई स्वीकारो।

-विश्व दीपक

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

अब दर्द जब खांसता है..
तो उसे देता हूं मैं
यादों की इनहेलर!
और बदले में
मांग लेता हूं उससे
एक प्यारी सी कविता

यादें ,दर्द और कविता का एक
अनोखा साथ और संसार है

उम्दा रचना !!

Nipun का कहना है कि -

दर्द और प्यारी सी कविता ...:)
बहुत अच्छी पंक्तियाँ ..:)

तपन शर्मा का कहना है कि -

दूसरी कविता अच्छी लगी

manu का कहना है कि -

दोनों कवितायें शानदार ....
दर्द कितने अपने की तरह मिल रहा है....है ना...?

राजीव तनेजा का कहना है कि -

दर्द जब हद से बढ जाता है तो पी लेते हैँ....

बहुत ही बढिया....

neelam का कहना है कि -

अस्थमा हो गया है दर्द को
अब दर्द जब खांसता है..
तो उसे देता हूं मैं
यादों की इनहेलर!

पता नही कैसे यादों के इन्हेलर से दर्द ठीक हो सकता है
शायद एक नई कविता में उतर आता है
कविता बहुत ही उम्दा है

neelam का कहना है कि -

काफी पीता मिला दर्द
बोला- गुड मार्निंग !
शिष्टाचारवश मुझे भी करनी पडी
उसके अच्छे दिन की कामना
फिर पूछ लिया-कैसे हो?
तो ज़ोर से हंस पडा वो
फिर गम्भीर हो गया
और मेरा हाथ
अपने हाथों में लेकर
बडी कृतज्ञता से बोला-
अच्छा हूं...

neelam का कहना है कि -

ajab itefaak hai ,aapke dard ko bhi coffe pasand hai coffee to hume bhi ................
baat kavita ki ho rahi hai ,naamuraad dard to hameshaa achchaa hi hota hai
ahahaahahhaahahahhahhhhhh

behad sambedansheel sabhi ke dilo ko choo rahi hai aapki kavita

Ruchita का कहना है कि -

dard ko bhi aub dard hone laga he..
kuch isi tarah ka ehsaas karati he tumahari ye kavita Vipul.Isi tarah likhte raho....bahut saari SHUBH KAAMNAAYE..

RUCHITA

Dinesh Dard का कहना है कि -

भाई, तुमने तो जाने-अनजाने मेरा ही ज़िक्र कर दिया.

खेर, ख्याल अच्छे हैं. जताने की ज़रुरत कि कविता दिल से और जिंदगी के तजुर्बों से लिखी है.

दिनेश "दर्द",
उज्जैन

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