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Wednesday, December 10, 2008

*****मुझे छोड़कर तुम कहां जा रहे हो


बने फिरते थे जो जमाने मे शातिर
पहाड़ों तले आये वे ऊंट आखिर

छुपाना है मुशकिल इसे मत छूपा तू
हमेशा मुह्ब्बत हुई यार जाहिर

बना क़ैस ,रांझा बना था कभी मैं
मेरी जान सचमुच मैं तेरी ही खातिर

खुदा को भुलाकर तुझे जब से चाहा
हुआ है खिताब अपना तब से ही काफिर

बनी को बिगाड़े, बनाये जो बिगड़ी
कहें लोग हरफ़न में उसी को तो माहिर

मुझे छोड़कर तुम कहां जा रहे हो
हमीं दो तो हैं इस सफर के मुसाफिर

तेरी खूबियां 'श्याम' सब ही तो जाने
खुशी हो कि ग़म तू हरदम है शाकिर

shakir=shukrgujar
f, u, lin 4 bar= 122 122 122 122

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12 कविताप्रेमियों का कहना है :

हरकीरत ' हीर' का कहना है कि -

वाह! स्याम जी, हर शे'र उम्दा है ...is bar koi kasar nani chodi aapne...

बने फिरते थे जो जमाने मे शातिर
पहाड़ों तले आये वे ऊंट आखिर

इस शे'र में पडोसियों की अच्छी खबर ली है आपने ...हा हा हा ...!!

दिगंबर नासवा का कहना है कि -

सुंदर रचना, शब्दों का सुंदर संसार
तरन्नुम में गाने को जी चाहता है

वह श्याम जी अच्छी ग़ज़ल का शुक्रिया
सभी शेर बहुत अच्छे लगे और ये ख़ास कर

MANVINDER BHIMBER का कहना है कि -

मुझे छोड़कर तुम कहां जा रहे हो
हमीं दो तो हैं इस सफर के मुसाफिर
kya baat hai.....khoobsurat

तपन शर्मा Tapan Sharma का कहना है कि -

बने फिरते थे जो जमाने मे शातिर
पहाड़ों तले आये वे ऊंट आखिर....


मुझे छोड़कर तुम कहां जा रहे हो
हमीं दो तो हैं इस सफर के मुसाफिर..

ये दोनों शेर पसंद आये

Nikhil का कहना है कि -

मुश्किल है ऐसी गज़ल लिखना....काफिया ढूंढने में मुश्किल हुई होगी....

Anonymous का कहना है कि -

बने फिरते थे जो जमाने मे शातिर
पहाड़ों तले आये वे ऊंट आखिर....
waha,waah,क्या खूब लिखते हैं सर जी,मजा गया,कमल का शेर है.
आलोक सिंह "साहिल"

manu का कहना है कि -

हमी दो तो हैं इस सफर के मुसाफिर......
बहुत अच्छी लगी ये लाइने

Unknown का कहना है कि -

बने फिरते थे जो जमाने मे शातिर
पहाड़ों तले आये वे ऊंट आखिर
वाह क्या बात कही है, गजल पढकर अच्छा लगा

सुमित भारद्वाज

Straight Bend का कहना है कि -

Great!!
मुझे छोड़कर तुम कहां जा रहे हो
हमीं दो तो हैं इस सफर के मुसाफिर
Yeh bahut ahchca laga ..

RC

Anonymous का कहना है कि -

उम्दा ग़ज़ल है श्यामजी अगर यूँ करें

तेरी खूबियां 'श्याम' सब पे हैं जाहिर
खुशी हो कि ग़म तू हरदम है शाकिर


तेरी खूबियां 'श्याम' सब ही तो जाने
खुशी हो कि ग़म तू हरदम है शाकिर-

Unknown का कहना है कि -

आप सभी को धन्यवाद और अनाम भाई
तेरी खूबियां 'श्याम' सब पे हैं जाहिर
खुशी हो कि ग़म तू हरदम है शाकिर
ऐसा करने से जाहिर काफिया बन जाएगा और शेर मकता न रह कर हुस्ने मतला और इस स्थिति में श्याम भी उडाना पड़ेगा हुजूर-श्याम

Anonymous का कहना है कि -

or shayam hi to udna nahi chahii

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