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Monday, October 20, 2008

बंदी मिलिसिया का एक क्षण


प्रत्येक माह की २० तारीख को कुमुद अधिकारी नेपाली की एक कविता का हिन्दी अनुवाद लेकर आपके सामने प्रस्तुत करते हैं। अभी तक की सभी कविताओं को पाठकों ने बहुत पसंद किया है। बहुत से पाठक इन रचानाओं को संग्रहणीय भी कहते रहे हैं। आइए पढ़ते हैं हरि अधिकारी की नेपाली कविता का हिन्दी रूप-

बंदी मिलिसिया का एक क्षण


शांत और सुस्त
अन्य नेपाली कविताएँ
  1. पहली नेपाली कविता:पुरखों के प्रति...

  2. दूसरी नेपाली कविता:जीवनवृत्त

  3. तीसरी नेपाली कविता:पेड़

  4. कुछ पल एक नेपाली कविता के संग

  5. दो नेपाली कवितायें

  6. कविता वैसी कुछ खास चीज नहीं है
प्रतिष्ठाच्यूत और निर्लज्ज
दो घुटनों के बीच छिपाकर अपना कुरूप चेहरा
खुद से बातें करने को भी असमर्थ है वह
ध्वस्त थाने के किसी कोने में
खुद को लपेटकर सो रहे भूखे कुत्ते जैसा कमजोर

बंदी मिलिसिया के मन के फलक में फैला हुआ है
केँचुली बदलकर आया उसका अपना ही संसार
तलवों के दबाव़ से उजली बनी पगडंडियाँ, वन-झुरमुट
झोंपड़े और उन्हीं में प्रतिक्षारत उसके अपने
बुझी लालटेन जैसी निस्तेज आँखोंवाली
एक स्त्री का धूमिल चेहरा

उसके स्मृति बिंब में टंगे हैं
जवां विधवा के असुंदर सफेद दुपट्टे
क्रूरता का शूल भोंककर निकाली गई विभत्स आनंद की मदिरा
बलात् निचोड़कर छोड़े गए जनाने शरीर का कंपन
चित्कार के काले संगीत से बढ़ते उन्माद की तरंग और
धड़ विहीन शिरों के अस्फुट क्रंदन

क्लांत, विकल और मृत्यु के ठंडे स्पर्श के झटके से
व्याकुल वह भयाक्रांत
बंदी मिलिसिया
मन के दर्पण में खोज रहा है
कुछ साल पहले खोया हुआ अपना असली चेहरा।


नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी।

लेखक परिचयः

हरि अधिकारी
प्रकाशित कृतियाँ-
1. संसदमा एक दिन (कविता-संग्रह)
2. हरि अधिकारी का कविता (कविता संग्रह)
सम्मान/पुरस्कारः साझा पुरस्कार.(2006)

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

सजीव सारथी का कहना है कि -

ये तो कहीं से भी अनुवादित कविता नही लगती....कुमद जी क्या तारीफ करूँ आपकी.....excellent ...मूल कवि को भी बधाई

Seema Sachdev का कहना है कि -

क्लांत, विकल और मृत्यु के ठंडे स्पर्श के झटके से
व्याकुल वह भयाक्रांत
बंदी मिलिसिया
मन के दर्पण में खोज रहा है
कुछ साल पहले खोया हुआ अपना असली चेहरा।
इन अन्तिम पंक्तियों ने सभी मनोद्गारो को व्यक्त कर दिया |

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

गजब के शब्द पिरोये हैं कवित-माला में
बहुत ही सुन्दर कविता.. मूल कवि व कुमुद जी को बहुत बहुत बधाई

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कुमुद जी,

बहुत ही सुंदर कविता चुनकर लाये हैं आप।

दीपाली का कहना है कि -

अच्छी अभिव्यक्ति मुझे भी कही से नही लगा की ये अनुवादित कविता है.....
शब्द सयोंजन अद्भुत है.

rachana का कहना है कि -

क्या है की अनुवाद करना सभी की बस की बात नही होती पर आप को इस में महारत हासिल है एक और अच्छी कविता पढ़वाने के लिए आप का धन्यवाद
सादर
रचना

sumit का कहना है कि -

कविता अच्छी लगी
पढकर ऐसा लग ही नही रहा कि ये अनुवादित हो

आपका अनुवाद का तरीका काबिले तारीफ है

sahil का कहना है कि -

कविता पढ़ते वक्त एक पल को भी नहीं लगा की मैं कोई अनुदित रचना पढ़ रहा हूँ,शानदार
आलोक सिंह "साहिल"

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

अफ़सोस! बंदी मिलिसिया को अपना खोया चेहरा कभी वापिस नहीं मिलेगा......बढ़िया कविता.....

neeti sagar का कहना है कि -

kumud ji bakai bahut achchhi avita ko aapne khoja aur uska anubad bahut achchha kiya ye kavitalagti hi nahi k aapne anuwad ki hai bhut achhe bhaw is kavita k aandar aapne apne anubaad kiye hindi shabdon se daale hai

कुमुद अधिकारी का कहना है कि -

आप सभी साथियों का आभार। आप सब के शब्दों ने हौसले बुंलद कर दिए हैं।

दीपावली की शुभकामनाओं के साथ
कुमुद, नेपाल।

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