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Saturday, October 04, 2008

देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए कातिल में है...


'भगत सिंह विशेष' श्रृंखला में आप पढ़ रहे है प्रेमचंद सहजवाला की कलम से भगत सिंह के जीवन के बारे में। पहली , दूसरी, तीसरी कड़ी की पहली किस्तदूसरी किस्त प्रकाशित कर चुके हैं। अब हम ला रहे हैं इसी श्रृंख्ला की अगली कड़ी..




10 दिसम्बर 1928. लाहौर के Mozang House में 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन' की उस बैठक में उपस्थित युवकों का खून खौल रहा है. बैठक में उपस्थित हैं भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शिवाराम राजगुरु, सुखदेव, जयगोपाल, किशोरी लाल तथा भगवतीचरण वोहरा की पत्नी जिसे सब लोग प्यार से दुर्गा भाभी कहते हैं. भगत सिंह ने कहा - 'सारे देश में तनाव है. बंगाल पार्टी ने अच्छा काम किया है. कुछ अधिकारीयों को ख़त्म कर दिया है. अँगरेज़ भयभीत हैं और अपने परिवारों को इंग्लैंड भेज रहे हैं.कुछ ही दिन में उन्हें महसूस होगा कि भारत उनके पास नहीं रहेगा ..लाला लाजपत राय की शहादत ने कांग्रेस नेताओं के दिल भी दहला दिए हैं. पंडित जवाहरलाल नेहरू कुछ ठोस कदम उठाने की तैय्यारियाँ कर रहे हैं. पर मुझे संदेह है कि वे कुछ कर पाएंगे. जब कि देश के नौजवानों का खून खौल रहा है'.
चंद्रशेखर आजाद ने कहा - केवल स्कॉट ही नहीं, हमें अन्य अंग्रेजों की भी हत्या करनी है. एक हिन्दुस्तानी की हत्या के बदले हमें दस अंग्रेजों को मौत के घाट उतार देना चाहिए. तब जा कर शत्रु के होश ठिकाने आयेंगे.'
दुर्गा भाभी ने प्रस्ताव रखा कि अब ये फ़ैसला करो कि स्कॉट की हत्या कौन करेगा. सब से पहले भगत सिंह ने अपना नाम प्रस्तावित किया - 'स्कॉट को मेरे हाथों से मरना चाहिए'.
राजगुरु, सुखदेव, जयगोपाल व दुर्गा भाभी आदि ने अपने अपने नाम प्रस्तावित किए. पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यह काम महिलाओं को नहीं देना चाहिए. अंत में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव जयगोपाल व चंद्रशेखर आजाद को यह सम्मिलित ज़िम्मेदारी दी गई, भगत सिंह ने जयगोपाल को यह ज़िम्मेदारी दी कि वह 11 से 15 दिसम्बर तक स्कॉट की हर गतिविधि पर नज़र रखे. स्कॉट किस समय दफ्तर जाता है किस समय लौटता है व कौन से रास्ते से आता जाता है. हर बात पर नज़र राखी जाए.
...भगत सिंह इन दिनों गुलाबी रंग के कई पोस्टर तैयार करने में लगे हैं. हर पोस्टर पर शीर्षक है 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी' ('असोसिएशन' को कई बार 'आर्मी' भी लिखा जाता था). शीर्षक के नीचे मोटे मोटे अक्षरों में लिखा है - 'Scott is dead'... इस के साथ ही ब्रिटिश के नाम एक चेतावनी भरा नोटिस - 'इस हत्या के साथ लाला लाजपत राय की हत्या का बदला ले लिया गया है. यह बेहद अफ़सोस की बात है कि देश की तीस करोड़ जनता जिस नेता का सम्मान करती रही, उस पर एक साधारण पुलिस अधिकारी ने लाठियां चलाई. राष्ट्र का यह अपमान युवकों के लिए एक चुनौती था...आज विश्व भर के लोगों ने देख लिया कि भारतवासियों का खून ठंडा नहीं हुआ है. वे सब निर्जीव नहीं हुए हैं. वे देश के सम्मान के लिए अपनी जान निछावर कर सकते हैं...
ऐ आततायी सरकार, सावधान रहो, इस देश के दमित व संतप्त लोगों को ठेस मत पहुँचाओ. अपने दानवीय तरीकों से बाज़ आ जाओ. तुम्हारे सभी कानूनों के बावजूद इस देश के लोग पिस्टल और रिवोल्वर हासिल करते रहेंगे. भले ही ये हथियार एक सशस्त्र क्रान्ति की दृष्टि से पर्याप्त नहीं हैं, पर देश के अपमान का बदला लेने के लिए वे काफ़ी होंगे. हालांकि हमारे अपने कई नेता हमारी निंदा करते हैं, व उपहास करते हैं... जो अत्याचारी फिरंगी, हमारे देश के गौरव का अपमान करते हैं, उनसे बदला लेने के लिए हम हर समय तैयार रहेंगे...जब हम फांसी के तख्ते तक जायेंगे, हम बुलंद आवाजों में चिल्लायेंगे - 'इन्कलाब...जिंदाबाद.' भगत सिंह ने ये गुलाबी पोस्टर 15 दिसम्बर 1928 को जयगोपाल व एच.आर.वोहरा को भी दिखाए थे, जिन्होंने बाद में अदालत में सरकारी गवाह बन कर भगत सिंह के ख़िलाफ़ गवाही दी थी...जयगोपाल व एच.आर.वोहरा ने 17 दिसम्बर की आधी रात को भी भगत सिंह को ये पोस्टर लिखते हुए देखा था....
...17 दिसम्बर 1928 का सनसनी खेज़ दिन. दोपहर 2 बजे सब को हथियार दे दिए गए हैं. जयगोपाल पुलिस कार्यालय गए थे तथा एक अँगरेज़ पुलिस अधिकारी को युनिफोर्म में मोटर साइकिल पर जाते हुए उन्होंने देखा था. उन्होंने समझा कि यही स्कॉट है, जो आज कार की बजाय मोटर साइकिल पर आया है. दरअसल वह Assistant Supernindent सांडर्स था, जो अभी probation पर था व अभी तक केवल 1 वर्ष 8 महीने व 8 दिन नौकरी कर चुका था. उसका पूरा नाम था John Poyntz Saunders. उस दिन वह 21 वर्ष 4 महीने व 24 दिन की आयु का था...
...जयगोपाल को यही ड्यूटी दी गई की वह पुलिस कार्यालय के आसपास बना रहे तथा ज्यों ही स्कॉट बाहर आए वह रूमाल से एक इशारा कर दे . चंद्रशेखर आजाद ने एक साधारण पिस्टल ले ली तथा भगत सिंह को एक ऑटोमेटिक पिस्टल मिली. शिवाराम राजगुरु को एक रिवोल्वर दी गई.
... जयगोपाल व भगत सिंह साइकलों पर पुलिस कार्यालय गए. जयगोपाल ने अपनी साइकल पुलिस कार्यालय के सामने स्थित DAV कॉलेज के हॉस्टल के बाहर बने टॉयलेट की दीवार से टिका दी. भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद अपनी साइकलें कॉलेज के कम्पाऊंड में ले आए. जयगोपाल ने इन में से एक साइकल को हटा कर टॉयलेट के बाहर रखी अपनी साइकल के साथ खड़ी कर दी. फ़िर वे लौट आए और तीसरी साइकल ले कर पुलिस कार्यालय के बाहर सड़क पर लाये जहाँ से कि कचहरी की गली भी शुरू होती थी. जय गोपाल यह साइकल यहाँ इसलिए लाए ताकि यदि शिकार मोटर साइकिल पर बच निकले तो भगत सिंह इस साइकिल पर उस का पीछा कर के उसे गोली से उड़ा दें. चंद्रशेखर आजाद कॉलेज कम्पाउंड के अन्दर खड़े रहे तथा भगत सिंह व शिवाराम राजगुरु पुलिस कार्यालय के बाहर के रोड पर टहलने लगे. लगभग चार बजे Assistant Supernindent जे पी सांडर्स जिसे जयगोपाल गलती से जे अ स्कॉट समझ रहे थे, अपनी मोटर साइकिल पर पुलिस कार्यालय से बाहर निकला. उसके पीछे हेड कांस्टेबल चानन सिंह भी था. सांडर्स की मोटर साइकिल गेट से निकल कर धीरे धीरे रोड पर फिसलनी शुरू हुई और जयगोपाल ने इशारा कर दिया. राजगुरु तैयार हो गए और ज्यों ही सांडर्स उनके नज़दीक आए, उन्होंने अपनी रिवोल्वर से गोली चला दी. सांडर्स की मोटर साइकिल गिर गई और उस की टांग मोटर साइकिल के नीचे दब गई. तब तक भगत सिंह दौड़ पड़े और उनकी ऑटोमेटिक रिवोल्वर से एक साथ कई गोलियां बरसने लगीऔर सांडर्स के शरीर को छलनी करने लगी . यह पिस्टल अदालत में सबूत के तौर पर प्रर्दशित भी की गई.
भगत सिंह राजगुरु व जयगोपाल कचहरी वाली गली में दौड़ने लगे. हेड कांस्टेबल चानन सिंह ने उन का पीछा किया. इस के साथ ही ट्रैफिक इंसपेक्टर WJG Fearn भी तीनों के पीछे दौडे. पर कचहरी की गली में पीछा कर रहे Fearn को भी गोली लगी, शायद भगत सिंह या राजगुरु में से किसी एक ने मारी हो . ये दोनों गली से निकल कर एक छोटे से गेट के रास्ते कॉलेज कम्पाऊंड में घुस गए. चानन सिंह अभी तक उन के पीछे था, जबकि जयगोपाल अभी तक गली में साइकिल पर भागे जा रहे थे. कॉलेज कम्पाऊंड में घुसते ही एक गोली हवा में सरसराती सी आ कर चानन सिंह को लगी, जो शायद चंद्रशेखर आजाद ने चलाई हो. चानन सिंह घंटे भर बाद लाहौर के मेयो हस्पताल में चल बसा...
...कॉलेज के volleyball मैदान के बीच से दौड़ते भगत सिंह राजगुरु व चंद्रशेखर आजाद हॉस्टल के एक ब्लाक में घुस गए. एक और ब्लाक की ऊपरी मंजिल पर कमरा नंबर 28 में इनके ही कोई क्रन्तिकारी साथी देसराज रहते थे. वहां से ये लोग किसी प्रकार दूसरी तरफ़ निकल आए. तब तक जयगोपाल एक और रास्ते से यहीं पहुँच गए. जो दो साइकलें टॉयलेट के बाहर जयगोपाल ने एक साथ रखी थी, उनमें से एक को तो देसराज ने बिल्कुल ही गायब करवा दिया था व दूसरी वहां से हटवा कर हॉस्टल की रसोई के बाहर रखवा दी थी.
चंद्रशेखर आजाद ने जयगोपाल से साइकिल ले ली. उसी साइकिल पर राजगुरु भी थे. भगत सिंह ने रसोई के बाहर रखी दूसरी साइकिल ले ली. भगत सिंह ने वेश बदलने के लिए जयगोपाल से उसकी लुंगी ले ली थी तथा अपना हैट उसे दे दिया था. पर क्यों कि हडबडी में वे लुंगी को अपने सर पर एक पगडी की तरह बाँध नहीं सके थे, इसलिए उसे वहीं छोड़ कर साइकिल दौडाते चल पड़े. वह लुंगी बाद में एक हेड कांस्टेबल तालेह मांड को मिली थी. कॉलेज के छोटे गेट से साइकलें दौड़ाते भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद व राजगुरु बाहर निकल पड़े. क्यों कि एक साइकिल पर दो जने थे, इसलिए असुविधा भी हो रही थी. रास्ते में एक साइकिल सवार विद्यार्थी अजमेर सिंह दिखा. उस से साइकिल छीनने की कोशिश की गई. पर अजमेर सिंह तगड़ा निकला और इन तीनों को भागने की हडबडी थी. कोशिश विफल हुई. इसलिए दो साइकलों पर तीनों जने फ़िर भाग पड़े. इसी विद्यार्थी अजमेर सिंह ने अदालत में भगत सिंह को पहचान कर उनके ख़िलाफ़ गवाही दी थी. आगे जा कर दोनों साइकलें किसी अत्ता मोहम्मद की साइकलों की दूकान की तरफ़ बढ़ी. वहां कुछ दूर भगत सिंह अपनी साइकिल से उतर कर खड़े हो गए बाकी दोनों में से एक जना पैदल चलने लगा और अत्ता मोहम्मद की दूकान से एक साइकिल चुरा कर तीनों फ़िर चल पड़े. पर अत्ता मोहम्मद ने एक और साइकिल अपनी दूकान से उठा कर तीनों का पीछा किया. उन तीनों को तो किसी प्रकार बच निकलना था. इसलिए एक Swimming Pool के पास अत्ता मोहम्मद की साइकिल छोड़ कर तीनों फ़िर आगे बढ़ गए और किसी प्रकार Mozang House पहुँच गए. इस बीच जयगोपाल एक और कॉलेज की दीवार फांद कर उसी Swimming Pool के नज़दीक आए जहाँ पुलिस का एक Deputy Superintendent मोरिस उन तीनों की खोज कर रहा था. मोरिस ने जयगोपाल से पूछताछ करनी शुरू कर दी. पर उस ने कह दिया कि उसने किसी को भी वहां से साइकलों पर गुज़रते नहीं देखा और कि वह तो एक विद्यार्थी है...
जयगोपाल फ़िर किसी प्रकार Mozang House पहुँच गए जहाँ तीनों साथियों को देख आश्वस्त हुए.
अगले दिन शहर की हर दीवार पर भगत सिंह द्वारा तैयार किए गए गुलाबी पोस्टर चिपके है . केवल स्कॉट का नाम बदल कर सांडर्स कर दिया गया है...

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4 कविताप्रेमियों का कहना है :

तपन शर्मा का कहना है कि -

कुछ नई बातें पता चली सहजवाला जी.
धन्यवाद.

rachana का कहना है कि -

सोचा था मालूम है सब कुछ हम को
नादान थे आज मालूम हुआ
आप का धन्यवाद
सादर
रचना

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

बहुत हीं उपयोगी जानकारियाँ उपलब्ध करवा रहे हैं आप प्रेमचंद जी। आपका किस तरह शुक्रिया अदा करूँ।

बधाई स्वीकारें।

Roney Kever का कहना है कि -

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