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Monday, September 15, 2008

तू आसमान हो जा और मैं ज़मीन हो जाऊँ


अब्बू चाहते हैं कि मैं संगीन हो जाऊँ
मासूमियत छोड़कर मैं ज़हीन हो जाऊँ
तू अब्र बनकर बरसना चाहता है तो ठीक है
तू आसमान हो जा और मैं ज़मीन हो जाऊँ
इस क़दर तो मैं डरता नहीं हूँ उस शक़्स से
के वो घूमे बेखौफ़ और मैं परदानशीन हो जाऊँ
कल रात ने अपनी ख्वाइश चाँद को बताई
अब तू काला हो जा और मैं रंगीन हो जाऊँ
बताओ ना "पराग" क्या ऐसा नहीं हो सकता
की मैं चाँद से ज़्यादा हसीन हो जाऊँ ??

--पराग अग्रवाल

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14 कविताप्रेमियों का कहना है :

सजीव सारथी का कहना है कि -

वाह पराग जी बेहद खूबसूरत ग़ज़ल बहुत अच्छे " तू काला हो जा और मैं रंगीन हो जाऊँ " क्या कहने

Harihar का कहना है कि -

बहुत अच्छा लिखा है पराग जी!
पर मैं अभी पैरोडी के मूड में हूँ

भँडास निकाल दूँ गर माईक हाथ लग जाय
अच्छा हो ये दुनियां श्रोता और मैं कवि हो जाऊँ

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

पराग भाई!
बहुत हीं खूबसूरत पंक्तियाँ हैं। ऎसे हीं लिखते रहें।

Anu R Sharma का कहना है कि -

bahut achhey .... pehelwaan.... bahut badhiyaa

Dr. Amar Jyoti का कहना है कि -

बहुत ख़ूब!

Roopam Chopra (RC) का कहना है कि -

Achchi rachana hai!

तू अब्र बनकर बरसना चाहता है तो ठीक है
तू आसमान हो जा और मैं ज़मीन हो जाऊँ
Is She'r mein kuchh gadbad lagti hai... seedha dil mein nahin utarta. Pata nahin launsi baat katakti hai ... ? Shayad ye ke wo ya to abr bane ya aasmaan? Khair.

Ye aakhri She'r laajawaab hai. 'Batao na' ki jagah sirf 'batao' kaisa rahega? Ya kuchh aur?
'Batao na' seems more feminine to me.
बताओ ना "पराग" क्या ऐसा नहीं हो सकता
की मैं चाँद से ज़्यादा हसीन हो जाऊँ ??

sab kuch hanny- hanny का कहना है कि -

bahut achcha likha. is dunia k andar aisa hi hota hai.

फ़िरदौस ख़ान का कहना है कि -

अब्बू चाहते हैं कि मैं संगीन हो जाऊँ
मासूमियत छोड़कर मैं ज़हीन हो जाऊँ
तू अब्र बनकर बरसना चाहता है तो ठीक है
तू आसमान हो जा और मैं ज़मीन हो जाऊँ


बहुत ख़ूब...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

पराग जी,

पिछली बार से आपने बहुत टर्न लिया है। हम पाठकों के लिए यह तो खुशी की बात है। आगे सिलसिला ज़ारी रहे।

sahil का कहना है कि -

सुंदर
आलोक सिंह "साहिल"

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

तू अब्र बनकर बरसना चाहता है तो ठीक है
तू आसमान हो जा और मैं ज़मीन हो जाऊँ


धन्यवाद एवं बधाई!

Anonymous का कहना है कि -

भावः सुंदर हैं लहजा भी दिलकश है ,पर ग़ज़ल नहीं कहला सकती त्रुटियां हैं काफ़ी -श्याम सखा `श्याम

rachana का कहना है कि -

सुंदर अति सुंदर
सादर
रचना

Parag.. Bhaisaab का कहना है कि -

dhaneyeaad aaap sabhi ka, ji sahi pakda aapne ,,, kuchh tankini khaamiya hain, isliye ye gazal nahi kehlaayi ja sakti, magar maine isko apni rachna maan kar, yahan bheja hain.. aap logo ne khayaal le lehze se pasand kiya, uske liye.... aapka abhaari hu, aur sabhi ki daaon aur honsla aafzaai ke liye Dhaneyvaad

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